दक्षिणी गाज़ा के नासिर अस्पताल पर सोमवार को इज़रायली मिसाइलों के हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पांच पत्रकार भी शामिल हैं. इसी महीने हुए एक हमले में गाज़ा में ही कई मीडियाकर्मी मारे गए थे, जिनमें से पांच अल जज़ीरा के लिए काम करते थे. उस समय इज़रायल ने दावा किया था कि वे हमास से जुड़े थे.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्राइवेसी कानून में पत्रकारों को छूट, डेटा सुरक्षा, आरटीआई संशोधन, स्रोत की सुरक्षा, सहमति, और न्यूज़रूम स्वतंत्रता समेत 35 सवाल मंत्रालय को भेजे हैं. यह सवाल क़ानून के जनहित पत्रकारिता पर संभावित असर और सुरक्षा उपायों पर केंद्रित हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त को द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, सलाहकार संपादक करण थापर और सभी कर्मचारियों को बीएनएस की धारा 152 के तहत गुवाहाटी पुलिस द्वारा दर्ज केस में किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिया है. तीन महीनों में असम पुलिस द्वारा संस्थान के ख़िलाफ़ राजद्रोह क़ानून के तहत दर्ज किया गया दूसरा ऐसा मामला है.
असम सरकार द्वारा द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और इससे जुड़े पत्रकारों के ख़िलाफ़ राजद्रोह क़ानून के इस्तेमाल को लेकर पत्रकारों ने आक्रोश जताया है. कई अख़बारों ने अपने संपादकीय में इसे प्रेस की आज़ादी पर अंकुश लगाने के लिए सत्ता का खुलेआम दुरुपयोग बताया है.
असम पुलिस द्वारा द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और सलाहकार संपादक करण थापर को तलब करने के लिए इस्तेमाल की गई एफआईआर कई दिनों की मशक्कत के बाद अंततः बुधवार (20 अगस्त) को मिल सकी, जिसमें वायर से जुड़े कई पत्रकारों और स्तंभकारों को नामजद किया गया है.
भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट और पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा और धमकी के मामलों के बारे में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि 'भारत में एक जीवंत प्रेस और मीडिया इको सिस्टम है, जिसे विदेशी संगठनों से मान्यता की आवश्यकता नहीं है.'
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया व इंडियन वुमेन प्रेस कॉर्प्स ने द वायर और उसके पत्रकारों के ख़िलाफ़ असम पुलिस द्वारा की एफआईआर पर निराशा व्यक्त की. साथ ही बीएनएस की कठोर धारा 152 को 'प्रेस को चुप कराने का हथियार' बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की. उक्त मामले इसी धारा के तहत दर्ज किए गए हैं.
गुवाहाटी अपराध शाखा ने राज्य पुलिस द्वारा दर्ज एक नए ‘राजद्रोह’ मामले में द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और वरिष्ठ पत्रकार करण थापर को समन भेजा है. हालांकि, इसमें एफआईआर की तारीख, कथित अपराध की कोई जानकारी नहीं है और न ही एफआईआर की प्रति दी गई है.
असम में मानवाधिकारों के उल्लंघन और बांग्ला भाषी मुसलमानों के 'अमानवीयकरण' पर असम ट्रिब्यून को अपना कॉलम भेजने के कुछ ही घंटों बाद वरिष्ठ पत्रकार पेट्रीशिया मुखीम को अखबार ने बताया कि प्रबंधन इस लेख को प्रकाशित नहीं करेगा. पेट्रीशिया ने कहा कि यह बताया जाना कि क्या लिखना है और कैसे लिखना है, तानाशाही शासन की निशानी है.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'द वायर' के स्वामित्व वाले 'फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज्म' के सदस्यों और संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को बीएनएस की धारा 152 के तहत असम पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के संबंध में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की है.
इज़रायल ने गाज़ा में अल-शिफ़ा अस्पताल के ठीक बाहर स्थित एक टेंट पर हमला किया, जिसमें अल जज़ीरा के पांच और दो अन्य पत्रकार मारे गए. अल जज़ीरा ने बताया कि इन पांचों को महीनों से धमकियां मिल रही थीं. उसने इन हत्याओं की निंदा करते हुए इसे प्रेस की आज़ादी पर पूर्वनियोजित हमला बताया.
द वायर के दस साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत 1 और 2 अगस्त को होने वाले आयोजन में उर्दू के इतिहास, अनुवाद से लेकर ग़ाज़ा में इज़रायली हिंसा और मीम संस्कृति तक, कई मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही क़िस्सागोई, और मुशायरे का सत्र भी होगा.
श्रीनगर के एक अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने कश्मीर की एक महिला पत्रकार और चार अन्य पत्रकारों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया था. इसके बाद पीड़ित पत्रकार सूफी हिदायत ने पीसीआई, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से जम्मू-कश्मीर सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने और आरोपी डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करने का आग्रह किया है.
कर्नाटक के धर्मस्थल के धर्माधिकारी वीरेंद्र हेगड़े के भाई ने एक सफ़ाई कर्मचारी द्वारा लगाए गए शव दफ़नाने के आरोपों की कवरेज से संबंधित 8,842 लिंक हटाने के लिए एकपक्षीय निषेधाज्ञा प्राप्त की है. इन लिंक्स में कर्मचारी के आरोपों को लेकर टीवी चैनलों, वेबसाइटों और यूट्यूबर्स द्वारा की गई कवरेज शामिल है.
ओडिशा के मलकानगिरी ज़िले के मुरलीगुड़ा गांव के पास स्थानीय ऑनलाइन न्यूज पोर्टल 'टाइम्स ओड़िया' के पत्रकार नरेश कुमार की 13 जुलाई की शाम बेरहमी से हत्या कर दी गई. जानकारी के अनुसार, पांच अज्ञात हमलावरों ने उन पर पर तलवार व अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.