नरेगा का लागू होना देश के श्रमिक इतिहास में पहली घटना थी जब महिलाओं को भी पुरुषों के समान मज़दूरी मिलने लगी थी. बेबस और लाचार ग्रामीण दलित आदिवासी महिलाओं में एक अदृश्य राजनीतिक, सामाजिक सौदेबाज़ी की ताक़त का संचार तेज़ी से हुआ था. अब सरकार ने उनकी उम्मीद छीन ली है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम निर्माण ज्ञान और हिंदुत्ववादी विचारधारा की रस्साकशी बन गया है. जेंडर, जाति, भेदभाव और विश्व इतिहास जैसे विषयों को हटाने का दबाव बढ़ रहा है. इससे अकादमिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की बौद्धिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसी विषय पर पढ़ें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद का लेख.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: इस वर्ष साहित्य अकादेमी पुरस्कार एक प्रेस वार्ता में घोषित किए जाने के पहले संस्कृति मंत्रालय के निर्देश पर रोक लिए गए कि मंत्रालय से उनका अनुमोदन होना है. यह अकादेमियों की स्वायत्तता को सीधे अवमूल्यित करना और अकादेमी के लेखक-सदस्यों, जूरी के लेखक-सदस्यों और पुरस्कार के लिए अनुशंसित लेखकों सभी का एक साथ अपमान है.
पीएमओ के 'क्राइसिस मैनेजर' कहे जाने वाले नरेंद्र मोदी के क़रीबी हिरेन जोशी को लेकर अटकलों का बाज़ार गरम है, कहीं उन्हें पद से हटाने की चर्चा है तो कहीं 'सट्टेबाज़ी घोटाले' में उनका नाम लिया जा रहा है. लेकिन वे हैं कौन और देश के सबसे महत्वपूर्ण कार्यालय की धुरी कैसे बने?
स्मृति शेष: विनोद कुमार शुक्ल के यहां विचार से मनुष्यता नहीं बनती, मनुष्यता से विचार उपजता है. भाषा व्याकरण का पालन नहीं करती- उनकी रचना उनकी कल्पना का व्याकरण है.
हरियाणा के दो युवा खिलाड़ियों का बास्केटबॉल कोर्ट में जान गंवा देना व्यवस्थागत विफलता है. इन दुर्घटनाओं को लेकर खेल विभाग की जांच के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है. इन दोनों निर्मम घटनाओं से यह साफ दिखाई दे रहा है कि व्यवस्थाएं संवेदनहीन और ग़ैर-ज़िम्मेदार हो चुकी हैं.
ईसाइयों के ख़िलाफ़ अभियान पिछले सालों में तेज़ होता चला जा रहा है. भारत की कुल जनसंख्या के मात्र 2.3% ईसाई हैं. पिछले कई दशकों से भारत की आबादी में उनका हिस्सा लगभग यही रहा है. फिर धर्मांतरण से ईसाइयों की जनसंख्या में विस्फोटक बढ़ोत्तरी का ख़तरा क्यों सबको वास्तविक जान पड़ता है?
हिंदी साहित्य के वरिष्ठ कवि-कथाकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वे कई दिनों से एम्स रायपुर में भर्ती थे. उनकी सादगीपूर्ण भाषा और मानवीय संवेदनाओं से भरी रचनाओं ने हिंदी साहित्य को विशिष्ट पहचान दी.
नेल्ली के पीड़ितों का दर्द हमें याद दिलाता है कि जो लोग बड़े पैमाने पर हिंसा झेल चुके हैं, उनमें से कई लोग अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन सरकार ने आज तक किसी को भी इस हद तक बेसहारा नहीं छोड़ा है, जैसा इन लोगों के साथ हुआ है.
छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापना दिवस के प्रचार पर क़रीब 6 करोड़ 90 लाख रुपये ख़र्च किए, जबकि राज्य के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का वार्षिक फंड लगभग 64 प्रतिशत घटा दिया गया है. स्कूलों के सामने बिजली बिल चुकाने समेत बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने का संकट खड़ा हो गया है.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: संगीत में स्त्रियों की उपस्थिति का साक्ष्य विरल है मगर आधुनिक शास्त्रीय संगीत में जल्दी ही स्त्रियों की शिरकत होने लगी. मिनिएचर कला में जो रागमाला का चित्रण है वह मुख्यतः स्त्री-केंद्रित है. ख़याल गायकी में स्त्री की उपस्थिति प्रबल और व्यापक है.
बीते दिनों हरियाणा में प्रैक्टिस के दौरान बास्केटबॉल पोल गिर जाने के चलते दो प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की जान चली गई. राज्य के खेल विभाग ने कुछ अधिकारियों को निलंबित तो किया मगर ख़ुद को क्लीन चिट देते यह भी कह दिया कि जहां हादसा हुआ, उस जगह का ज़िम्मा विभाग के पास नहीं था. शोकाकुल परिवार कहते हैं कि भले 'विश्वस्तरीय' सुविधा न मिले पर ऐसा इंतज़ाम तो हो कि खेलते हुए किसी बच्चे की जान न जाए.
1993 में अलीपुरद्वार में एकाएक आई बाढ़ ने सब कुछ बदलकर रख दिया था. देर से पहुंची राहत, अन्न की लूटपाट व दंगे स्थिति को और भयावह बना रहे थे. ऐसे में सबडिवीज़न के प्रशासन को सेना का ही सहारा था, पर क्या सेना के लिए यह मदद करना संभव था? पढ़िए बंगनामा की पैंतीसवीं क़िस्त.
योगी आदित्यनाथ एसआईआर में गड़बड़ियों को लेकर बोलने वाले देश के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बनने को कुछ लोगों ने इसे पहले से अन्य सीएम द्वारा एसआईआर संबंधी गड़बड़ियों की शिकायतों की पुष्टि के रूप में देखा है. हालांकि कई हलकों में यह सवाल पूछा जाने लगा कि क्या यूपी में एसआईआर में 'खेल' करने के अरमानों के विपरीत उलटे भाजपा को ही बड़े नुकसान का अंदेशा सताने लगा है?
नीतीश कुमार द्वारा की गई असभ्यता के पक्ष में दलीलें दी जा रही हैं कि मुख्यमंत्री को महिला विरोधी नहीं कहा जा सकता और न मुसलमान विरोधी क्योंकि इन दोनों के हित के लिए उन्होंने कई काम किए हैं. तो क्या इसका यह अर्थ समझें कि अगर आपने मेरी कोई मदद की है तो मैं आपको अपने साथ बदतमीज़ी करने का हक़ दे दूं?