दिल्ली: मॉल में सीवेज लाइन की सफाई के लिए उतरे व्यक्ति की मौत

घटना बीते 12 मई को रोहिणी के सेक्टर-10 के डी मॉल में हुई, जहां हाउसकीपिंग स्टाफ के दो सदस्यों को सीवर सफाई के लिए मजबूर किया गया, जिनमें से एक की मौत हो गई और एक का इलाज चल रहा है. पुलिस ने घटना को लेकर मॉल के तीन कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया है.

कर्नाटक: बीदर में अंतरधार्मिक संबंधों के शक में मुस्लिम महिला पर हमला, तीन गिरफ़्तार

घटना दो हफ्ते पहले घटित हुई थी, जो सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद प्रकाश में आई. पुलिस ने 5 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

भारत की जेलों में 9,600 से अधिक बच्चों को ग़लत तरीके से क़ैद में रखा गया: अध्ययन

लंदन के एक संगठन द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2021 के बीच भारत में लगभग 9,681 बच्चों को वयस्क लोगों की जेल में बंद रखा गया था. यह अध्ययन भारत की कुल 570 जिला और केंद्रीय जेलों में से 50 फीसदी पर आधारित है.

अग्निपथ योजना: उत्तराखंड की शानदार सैन्य परंपरा और आर्थिकी पर गहरी चोट

उत्तराखंड के कई गांव सैनिकों के गांव कहे जाते हैं. राज्य की अर्थ और सामाजिक व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सेना से जुड़ा हुआ है. अग्निपथ योजना के आने के बाद यह व्यवस्था संकट में नज़र आ रही है.

नरेंद्र दाभोलकर हत्याकांड: 11 साल बाद सनातन संस्था के दो लोगों को उम्रक़ैद, तीन बरी

पेशे से डॉक्टर नरेंद्र दाभोलकर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे और अपनी संस्था के माध्यम से वह अंधविश्वास के खिलाफ अभियान चलाते थे. 20 अगस्त, 2013 को पुणे में दो बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी थी.

क्या भारत की आबादी में वाकई मुसलमानों की हिस्सेदारी बढ़ी है?

लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा पहले ही मुस्लिम विरोधी अभियान चला रही है. पीएम-ईएसी की रिपोर्ट आने के बाद मीडिया इसके कुछ हिस्सों का हवाला देकर सनसनीख़ेज़ ख़बरें चला रहा है, जो भाजपा की झूठी कहानी को आगे बढ़ाने जैसा है. पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने एक चुनावी रैली में मुसलमानों को 'ज़्यादा बच्चा पैदा करने वाले' कहा था.

लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय संस्कृति पर एक कलंक है: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि वैवाहिक कर्तव्यों के प्रति उदासीनता ने संभवतः लिव-इन रिश्तों को जन्म दिया है. यह भारतीय सिद्धांतों के विपरीत एक आयातित सोच है.

बस्‍तर के आदिवासी की विडंबना: ‘ईश्‍वर’ को भी दो गज़ ज़मीन के लिए करना पड़ा इंतज़ार 

छत्तीसगढ़ के बस्‍तर ज़िला स्थित छिंदबहार गांव के निवासी ईश्‍वर कोर्राम की मृत्यु अप्रैल के अंतिम सप्ताह में हुई थी, लेकिन ग्रामीणों ने यह कहकर गांव में उनका अंतिम संस्कार नहीं होने दिया कि वह ईसाई धर्म अपना चुके थे. इस तरह के मामले पूरे छत्तीसगढ़ से सामने आ रहे हैं, जहां ईसाई आदिवासियों की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार होने से रोका जा रहा है.

‘कथाकहन मेरी जिज्ञासा, जरूरत और जिद का परिणाम है’

कथा-लेखन की इस वार्षिक कार्यशाला ने बहुत कम समय में अपनी जगह बना ली है, और इस भ्रान्ति को भी तोड़ दिया है कि लेखकीय प्रतिभा जन्मजात होती है, उसे सिखाया नहीं जा सकता.

मुंबई: बीएमसी अस्पताल में फोन की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी, महिला व शिशु की मौत

मुंबई में बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा संचालित एक अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा सेलफोन टॉर्च का उपयोग करके सिजेरियन डिलीवरी करने के बाद एक गर्भवती और उसके शिशुकी मौत हो गई. परिवार का आरोप है कि प्रसूति गृह में बिजली चली गई और तीन घंटे तक जेनरेटर चालू नहीं किया गया.

कर्नाटक: मंदिर ने दलित परिवार को परिजन के अंतिम संस्कार के लिए धन देने को मजबूर किया

कर्नाटक के चिक्काबल्लापुरा ज़िले का मामला. आदि कर्नाटक समुदाय से आने वाली एक महिला की मृत्यु के बाद स्थानीय मंदिर के पदाधिकारियों ने उनके परिजनों को अंतिम संस्कार की अनुमति देने से पहले 25,000 रुपये देने को कहा था. परिवार के क़र्ज़ लेकर 3,000 रुपये चुकाने के बाद उन्हें अंतिम संस्कार करने दिया गया.

मद्रास हाईकोर्ट के जज ने अपने ही फैसले की आलोचना करते हुए कहा- इस पर पुनर्विचार की ज़रूरत

मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने अपने ही एक पुराने फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर कोई गलती करता है और एक बार जब आपको पता चल जाए कि गलती हो गई है, तो यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप तुरंत इस तथ्य को स्वीकारें कि आपने गलती की है और इसे बदलने का प्रयास करें.

कर्नाटक: बेलगावी में हिंदुत्व कार्यकर्ताओं ने गो तस्करी के संदेह में ट्रक ड्राइवर को पीटा

कर्नाटक के बेलगावी में रविवार को युवकों के एक समूह ने मवेशी ले जा रहे एक ट्रक को रोका और ड्राइवर से मारपीट की. सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यह भीड़ 'जय श्री राम' के नारे लगाती नज़र आ रही है.

‘आपको क्या मुफ़्त चाहिये’ – इस सवाल पर बच्चों के जवाब समाज की स्थिति बता देते हैं

भोपाल से प्रकाशित बच्चों की मासिक पत्रिका 'चकमक' हिंदी की अब तक की इकलौती 'बाल विज्ञान पत्रिका' है. इसका एक स्तंभ है- 'क्यों क्यों '. इसमें बच्चों से हर महीने एक सवाल पूछा जाता है और अगले महीने उसके जवाब प्रकाशित किए जाते हैं.