संपादकीय: गुजराती अस्मिता और गिर के शेर

गुजरात ने शेरों के संरक्षण पर काफ़ी मेहनत की है, लेकिन यह भी दिखता है कि उनके प्रयास केवल 'गुजरात के शेरों तक सीमित है, जबकि आवश्यकता एक राष्ट्रीय नज़रिये की है.

बांग्लादेश की ओर से अभिनेता इरफ़ान ख़ान की फिल्म ‘डूब’ ऑस्कर के लिए जाएगी

अभिनेता आदिल हुसैन और एकावली खन्ना की फिल्म ‘वॉट विल पीपल से’ आॅस्कर फिल्म पुरस्कार समारोह में नार्वे का प्रतिनिधित्व करेगी. भारत की ओर से आॅस्कर के लिए विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म श्रेणी के लिए ‘विलेज रॉकस्टार्स’ का चयन किया गया है.

गणतंत्र दिवस का आंखों-देखा हाल बताने वाले कमेंटेटर जसदेव सिंह का निधन

विभिन्न खेलों और गणतंत्र दिवस समारोह का आंखों-देखा हाल रेडियो के ज़रिये आम जनता तक पहुंचाने वाले जसदेव सिंह लंबे समय से अल्ज़ाइमर बीमारी से पीड़ित थे.

नंदिता दास की ‘मंटो’ में मैं मंटो को तलाश करता रहा

मंटो फिल्म में मुझे जो मिला वो एक फिल्म निर्देशक की आधी-अधूरी ‘रिसर्च’ थी, वर्षों से सोशल मीडिया की खूंटी पर टंगे हुए मंटो के चीथड़े थे और इन सबसे कहीं ज़्यादा स्त्रीवाद बल्कि ‘फेमिनिज़्म’ का इश्तिहार था.

डीएलएफ कैपिटल ग्रीन्स: ‘उन्हें सीवर में जबरन उतारा गया, हादसे के बाद किसी ने ख़बर तक नहीं दी’

ग्राउंड रिपोर्ट: पश्चिम दिल्ली के मोती नगर इलाके में स्थित डीएलएफ कॉम्प्लेक्स में सीवेज टैंक साफ करते समय दम घुटने की वजह से पांच लोगों की मौत हो गई थी. मृतकों के परिजनों का आरोप है कि हाउसकीपिंग के लिए रखे गए कर्मचारियों को टैंकों की सफाई के लिए मजबूर किया गया था.

‘ज़बान वो ख़त्म होती है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी से न निकली हो’

वीडियो: उर्दू को अवाम तक पहुंचाने में देवनागरी और हिंदी की भूमिका, हिंदी में नुक़्ते के चलन और उर्दू के भविष्य पर विनोद दुआ से द वायर उर्दू के फ़ैयाज़ अहमद वजीह की बातचीत.

अदाकार वही है जो गांधी का भी रोल कर ले और विलेन का भी: नीरज कबि

फिल्म शिप ऑफ थिसियस, मॉनसून शूटआउट, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी, तलवार, वेब सीरीज़ सेक्रेड गेम्स और हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ फिल्म वंस अगेन में मुख्य भूमिका में नज़र आए अभिनेता नीरज कबि से प्रशांत वर्मा की बातचीत.

ऑस्कर में असमी भाषा की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ भारत का प्रतिनिधित्व करेगी

असम की फिल्म निर्देशक रीमा दास की फिल्म विलेज रॉकस्टार ने पद्मावत, राज़ी, अक्टूबर, पैडमैन, लव सोनिया जैसी 29 फिल्मों को पछाड़कर बनाई जगह.

विष्णु खरे: एक सांस्कृतिक योद्धा जो आख़िर तक वैचारिक युद्ध लड़ता रहा

विष्णु खरे ने न सिर्फ एक नई तरह की भाषा और संवेदना से समकालीन हिंदी कविता को नया मिज़ाज़ दिया बल्कि उसे बदला भी. एक बड़े कवि की पहचान इस बात से भी होती है कि वह पहले से चली आ रही कविता को कितना बदलता है. और इस लिहाज़ से खरे अपनी पीढ़ी और समय के एक बड़े उदाहरण हैं.

मीडिया बोल, एपिसोड 67: हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज

मीडिया बोल की 67वीं कड़ी में उर्मिलेश हिंदी भाषी मीडिया और हिंदी समाज पर पॉलिटिकल साइंटिस्ट सविता सिंह और जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार से चर्चा कर रहे हैं.

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: मैं साधारण हूं और साधारण ही रहना चाहता हूं, आतंक बनकर छाना नहीं चाहता

जिस तरह केन नदी केदारनाथ अग्रवाल के संसार में बहती दिखती है ठीक वैसे ही कुआनो सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के संसार में बह रही है. हम सभी के संसार में कोई न कोई भुला दी गई नदी बह रही है. सर्वेश्वर बस इसलिए अलग थे कि वह उस नदी और उसके पास लगने वाले फुटहिया बाज़ार को कभी भूले नहीं. वहां मुर्दा जलते और अधजले रह जाते. धोबी कपड़े धोते. औरतें छुपकर सिगरेट पीतीं.

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