केंद्रीय गृह मंत्रालय

पश्चिम बंगाल भाजपा के सदस्य. (प्रतीकात्मक फोटो: ट्विटर)

पश्चिम बंगाल: भाजपा के सभी 77 विधायकों को सुरक्षा मिली, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दी मंज़ूरी

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय के आदेश के मुताबिक 77 में से 61 विधायकों को न्यूनतम ‘एक्स’ श्रेणी की सुरक्षा दी जाएगी और सीआईएसएफ के कमांडो तैनात किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि बाकी को या तो केंद्रीय सुरक्षा प्राप्त है अथवा उन्हें उच्च ‘वाई’ श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी.

अदार पूनावाला. (फोटो: रॉयटर्स)

टीका बनाना विशिष्ट प्रक्रिया, रातों-रात उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाई जा सकती: अदार पूनावाला

टीकों की बढ़ती मांग के बीच कोविशील्ड बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अदार पूनावाला ने कहा कि भारत की आबादी बहुत बड़ी है और सभी वयस्कों के लिए पर्याप्त खुराक का उत्पादन करना कोई आसान काम नहीं है. उन्होंने कहा कि कंपनी उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और अगले कुछ महीनों में 11 करोड़ टीकों की आपूर्ति की जाएगी.

अदार पूनावाला. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड टीका आपूर्ति का भारी दबाव, ताक़तवर लोग धमका रहे थे: अदार पूनावाला

देश में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान टीके की बढ़ती मांग के बीच लंदन पहुंचे सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा कि वे दबाव के चलते देश से बाहर गए हैं. उन्होंने कहा कि सब उनके कंधों पर आ पड़ा है, जो उनके वश की बात नहीं है. उन्होंने भारत के बाहर वैक्सीन निर्माण की व्यावसायिक योजनाओं के संकेत दिए हैं.

Srinagar: Policemen patrolling at Lal Chowk after restrictions were lifted, in Srinagar, Tuesday, Aug. 20, 2019. Barricades around the Clock Tower in Srinagar's city centre Lal Chowk were removed after 15 days, allowing the movement of people and traffic in the commercial hub, as restrictions eased in several localities while continuing in others. (PTI Photo/S. Irfan)(PTI8_20_2019_000114B)

जम्मू कश्मीर: क्या है नई टास्क फोर्स, जो सरकारी कर्मचारियों को बिना जांच बर्ख़ास्त कर सकती है

केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रशासन ने ‘राज्य की सुरक्षा’ के ख़िलाफ़ संदिग्ध गतिविधियों वाले सरकारी कर्मचारियों के मामलों की जांच के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है. संविधान के अनुच्छेद 311 (2)(सी) के अंतर्गत पारित इस आदेश के तहत सरकार को हक़ है कि वो बिना जांच समिति का गठन किए किसी भी कर्मचारी को बर्ख़ास्त कर दे.

अदार पूनावाला. (फोटो: रॉयटर्स)

सीरम इंस्टिट्यूट ने राज्यों के लिए टीके की कीमत 300 रुपये की, पूनावाला को मिली वाई श्रेणी सुरक्षा

सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने अपने कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड की कीमत राज्यों के लिए 400 रुपये कर दी थी, जिसकी काफ़ी आलोचना हो रही थी. भारत बायोटेक ने भी कोवैक्सीन की कीमत बढ़ा दी है. इस बीच गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला की सीआरपीएफ के सुरक्षाकर्मी सुरक्षा करेंगे.

(फोटो: पीटीआई)

केंद्र ने तीन नगा उग्रवादी समूहों के साथ संघर्ष विराम समझौता एक साल के लिए बढ़ाया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि संघर्ष विराम समझौतों को एक साल के लिए और बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जो एनएससीएन/एनके और एनएससीएन/आरके साथ 28 अप्रैल 2021 से 27 अप्रैल 2022 तक तथा एनएससीएन/के-खांगो के साथ 18 अप्रैल 2021 से 17 अप्रैल 2022 तक प्रभावी रहेगा.

गजेंद्र सिंह शेखावत. (फोटो साभार: फेसबुक)

फोन टैपिंग के आरोप में गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री गहलोत के ओएसडी पर मुक़दमा दर्ज कराया

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस नेताओं के बीच लीक हुई फोन बातचीत से राजस्थान में पैदा हुए सियासी उठापटक और अवैध फोन टैप के आरोपों के आठ महीने बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार ने दो हफ़्ते पहले फोन टैपिंग की पुष्टि की थी.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: सियासी खींचतान के महीनों बाद गहलोत सरकार ने स्वीकारी फोन टैपिंग की बात

जुलाई 2020 में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्य के तत्कालीन पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और कांग्रेस विधायक भंवर लाल शर्मा के बीच फोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग लीक हुई थी. तब फोन टैपिंग के आरोपों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि नेताओं के फोन टैप करना उनकी सरकार का तरीका नहीं है.

(फोटोः पीटीआई)

कोरोना संक्रमण बढ़ने के के मद्देनजर नए दिशानिर्देश जारी, 31 दिसंबर तक लागू रहेंगे नए नियम

केंद्र सरकार के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, राज्यों को अपने यहां के हालात के हिसाब से नाइट कर्फ्यू जैसे फैसले लेने के अधिकार होंगे, लेकिन केंद्र से चर्चा किए बग़ैर वे कंटेनमेंट ज़ोन से बाहर लॉकडाउन का फैसला नहीं ले पाएंगे.

अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर. (फोटो: पीटीआई)

सीआईसी ने केंद्र द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान ज़ब्त सामग्री की सूची जारी न करने को मंज़ूरी दी

1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में छिपे आतंकियों को निकालने के लिए सेना द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया था. एक आरटीआई आवेदन में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उस सामान की सूची और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई थी जो इस कार्रवाई में ज़ब्त किया गया था, जिससे मंत्रालय ने इनकार कर दिया.

असम और मिजोरम के अधिकारियों बीच बैठक. (फोटो: एएनआई)

असम-मिज़ोरम सीमा संघर्ष: अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, लोगों के बीच विश्वास बहाली पर ज़ोर

बीते 17 अक्टूबर को असम-मिज़ोरम सीमा पर ग्रामीणों के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे. भीड़ ने क़रीब 20 अस्थायी झोपड़ियों और दुकानों को आग लगा दी थी.

असम-मिजोरम सीमा पर तैनात सुरक्षा बल. (फोटो साभार: ट्विटर/@ZoramthangaC)

असम-मिज़ोरम सीमा पर हिंसक झड़प के बाद तनाव, प्रधानमंत्री कार्यालय को स्थिति से अवगत कराया

यह घटना असम के कछार ज़िले के लैलापुर गांव और मिज़ोरम के कोलासिब ज़िले के वैरेंगटे गांव के निवासियों के बीच हुई. पुलिस ने बताया कि भीड़ ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर क़रीब 20 अस्थायी झोपड़ियों और दुकानों को आग लगा दी. स्थिति अब नियंत्रण में है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: केंद्रीय सुरक्षा बलों में संक्रमण के 36,000 से अधिक मामले,128 जवानों की मौत

बीएसएफ देश की सीमा की रक्षा करने वाले सबसे बड़ा बल है और इसमें लगभग 2.5 लाख कर्मचारी हैं. इसमें अब तक संक्रमण के 10,636 मामले सामने आए हैं. इसके बाद सबसे बड़े अर्द्धसैनिक बल सीआरपीएफ में संक्रमण के 10,602 और सीआईएसएफ में 6,466 मामले सामने आए हैं.

श्रीनगर में कश्मीरी पंडितों का प्रदर्शन (फोटोः शकीर मीर)

श्रीनगर: घाटी में रहने वाले कश्मीरी पंडित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर क्यों हैं

1990 के बाद घाटी से बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित पलायन कर गए थे, लेकिन कुछ परिवार यहीं रह गए. केंद्र सरकार द्वारा ऐसे आठ सौ से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों में किसी एक को नौकरी देने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ.

(फोटो: पीटीआई)

आपराधिक क़ानून में बदलाव के लिए गठित गृह मंत्रालय की समिति भंग करने मांग तेज़

वकीलों और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने विभिन्न समूहों का प्रतिनिधित्व न होने और सार्वजनिक परामर्श के लिए बहुत कम समय दिए जाने जैसे कारणों का हवाला देते हुए मई में गृह मंत्रालय द्वारा गठित आपराधिक क़ानून में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर की समिति को भंग करने की मांग की है.