जब बस्तर नक्सल मुक्त हो जाएगा, तब क्या होगा?

देश में माओवाद के ख़त्म होने की चर्चाएं तेज़ हैं, और दावा किया जा रहा है कि यह विकास की शुरुआत है. लेकिन माओवाद प्रभावित क्षेत्रों का आदिवासी समाज अपने जल-जंगल-ज़मीन को लेकर चिंतित है. खनन, सैन्य कैंपों के विस्तार और संसाधनों पर बढ़ते कॉरपोरेट दावों के बीच उनके अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हैं.

मोस्ट वांटेड या आदिवासी नायक? माओवादी नेता माड़वी हिड़मा के अंतिम संस्कार के लिए उमड़े लोग

माड़वी हिड़मा पुलिस के दस्तावेज़ों में मोस्ट वांटेड नक्सली था, लेकिन आम लोगों के लिए हीरो था, जिसने अपने जल-जंगल-जमीन के लिए हथियार उठाया था. ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि हिड़मा को मुठभेड़ में नहीं, बल्कि हिरासत में लेकर मारा गया है.  

आंध्र प्रदेश में एक और मुठभेड़: अब मारे गए सात माओवादी

आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीतारामराजू ज़िले के मारेडुमिली जंगलों में बुधवार तड़के पुलिस के साथ मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) पार्टी के सात सदस्य मारे गए. मारे गए माओवादियों में सेंट्रल कमेटी के सदस्य मेट्टूरी जोगा राव उर्फ ​​टेक शंकर भी शामिल हैं. इसी जंगल में एक दिन पहले पुलिस ने माड़वी हिड़मा समेत छह नक्सलियों को एक मुठभेड़ में मारने का दावा किया था.

आंध्र प्रदेश: कथित मुठभेड़ में चर्चित माओवादी नेता माड़वी हिड़मा की मृत्यु

हिड़मा माओवादियों की सेंट्रल कमेटी के युवा सदस्य थे और दंडकारण्य स्पशेल जोनल कमेटी के सचिव बनने वाले पहले आदिवासी नेता थे. उनकी मृत्यु माओवादी पार्टी के उस धड़े के लिए बहुत बड़ा झटका है, जो सशस्त्र संघर्ष जारी रखना चाहता है.

रिहायशी इलाके में पुलिस कैंप, छीनी जाती ज़मीन: ‘नए भारत’ में आदिवासी अस्तित्व पर गहराता संकट

एक ओर मोदी सरकार आदिवासियों के विकास का ढिंढोरा पीटती है, वहीं निजी कंपनियों के लिए उनके जल, जंगल, ज़मीन के दोहन का रास्ता खोल रही है. पेसा व वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों को निष्क्रिय करते हुए जल, जंगल, ज़मीन और खनन से संबंधित कानूनों में संशोधन किया जा रहा है. यह साफ़ है कि 'नए भारत' में आदिवासियों का अस्तित्व ख़तरे में है.

वरिष्ठ माओवादी मल्लोजुला वेणुगोपाल ने 60 अन्य साथियों सहित किया आत्मसमर्पण

माओवादियों के वरिष्ठ नेता और उनके पोलित ब्यूरो के सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू ने मंगलवार को महाराष्ट्र के गड़चिरोली ज़िले में 60 अन्य माओवादी साथियों सहित सरेंडर किया है. 2010 में पार्टी के प्रवक्ता चेरकूरी राजकुमार के मारे जाने के बाद से वेणुगोपाल पार्टी प्रवक्ता बने थे और तब से वे ‘अभय’ के नाम से प्रेस बयान जारी करते आ रहे थे.

क्या माओवादी संगठन दो गुटों में विभाजित हो चुका है? क्या एक गुट हथियार डाल रहा है?

अगर माओवादी हथियार डाल देते हैं, तो उनके आगामी क्रियाकलाप क्या होंगे? क्या वे किसी राजनीतिक दल के साथ जुड़ जाएंगे, जिन्हें वे अब तक प्रतिक्रियावादी और बुर्जुआ कहते आ रहे हैं, या अपनी नई पार्टी बना लेंगे?

‘ऑपरेशन कगार’ के दौरान एक साल में 323 नक्सली और 34 ग्रामीणों की मौत: माओवादियों का हालिया बयान

माओवादियों ने एक बयान जारी कर कहा है कि पिछले एक साल में सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में कुल 357 लोगों की मौत हुई है, जिनमें ‘34 ग्रामीण’ शामिल हैं. मारे गए अन्य सभी माओवादियों में 136 महिला माओवादी शामिल हैं. साथ ही उन्होंने 28 जुलाई से 3 अगस्त तक अपने वार्षिक कार्यक्रम ‘शहीद स्मृति सप्ताह’ मनाने की घोषणा की है.

छत्तीसगढ़: बीजापुर में मुख़बिरी के शक में माओवादियों द्वारा दो शिक्षकों की हत्या की आशंका

बीजापुर ज़िले में इंद्रावती राष्ट्रीय नेशनल पार्क क्षेत्र के एक सुदूर गांव में माओवादियों द्वारा दो अस्थायी शिक्षकों की हत्या की आशंका जा रही है. पुलिस के मुताबिक, माओवादियों ने इन दोनों को पुलिस का मुख़बिर समझकर मार डाला. हालांकि अब तक शवों की बरामदगी नहीं हो सकी है.

आदिवासियों को स्थायी विपक्ष की भूमिका निभानी होगी: मनीष कुंजाम

मनीष कुंजाम पिछले चार दशकों से राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बस्तर में सक्रिय हैं. पिछले एक साल में केंद्र सरकार ने माओवाद विरोधी अभियान तेज़ किया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने की घोषणा की है. ऐसे में आदिवासी क्षेत्र में शांति की संभावनाएं, सरकार और माओवादियों की भूमिकाएं और विकास प्रक्रिया के परिणामों के बारे में मनीष कुंजाम से बातचीत.

नागरिक संगठनों की सरकारों से अपील: माओवाद के नाम पर आदिवासी इलाकों में सैन्य दमन बंद हो

झारखंड के विभिन्न संगठनों ने एक साझा बयान में आरोप लगाया है कि सरकार माओवाद ख़त्म करने के नाम पर आदिवासियों की ज़मीन, संसाधनों और लोकतांत्रिक विरोधों को निशाना बना रही है. बयान में केंद्र और राज्य सरकारों से तुरंत सैन्य कार्रवाइयों को रोकने और शांतिवार्ता की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है.

छत्तीसगढ़: 2024 के बाद से मारे गए माओवादियों में एक-तिहाई से ज़्यादा महिलाएं

छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में हुई एक मुठभेड़ में 2 महिला माओवादी मारी गई हैं. आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में राज्य में कुल 217 माओवादी मारे गए, जिनमें 74 महिलाएं थीं. वहीं, इस साल 20 जून तक 195 माओवादियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जिनमें 82 महिलाएं शामिल हैं.

छत्तीसगढ़: पुलिस ने मुठभेड़ में ‘माओवादी’ बताकर मारा, परिवार बोला- सरकारी स्कूल में बावर्ची था

बीजापुर ज़िले के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में 5 जून को माओवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे गए सात लोगों में से एक मृतक के परिवार का दावा है कि वह शख़्स माओवादी नहीं था और एक सरकारी स्कूल में रसोइये का काम करता था. हालांकि पुलिस का कहना है कि वह रसोइया होने के साथ माओवादी भी था.

माओवादियों की केंद्रीय समिति के सदस्य समेत तीन माओवादी मुठभेड़ में मारे गए: आंध्र प्रदेश पुलिस

आंध्र प्रदेश पुलिस के अनुसार, अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले स्थित मारेडुमिल्ली के जंगलों में हुई मुठभेड़ में 3 माओवादी मारे गए हैं. ज़िले के एसपी ने बताया कि उन्हें संदेह है कि मारे गए माओवादियों में सेंट्रल कमेटी का सदस्य गजरला रवि उर्फ उदय शामिल है.

वाम दलों की प्रधानमंत्री से अपील- माओवादी विरोधी अभियानों के तहत हो रही ‘न्यायेतर हत्याएं’ रोकें

वाम दलों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिख कर अपील की है कि वह ‘ऑपरेशन कगार’ के नाम पर छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में हो रही 'न्यायेतर हत्याओं' पर तुरंत रोक लगाएं. पत्र में कहा गया है कि कई माओवादी सुरक्षा बलों की हिरासत में हैं, उन्हें कोर्ट में पेश किया जाए और क़ानून के मुताबिक कार्रवाई हो.

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