मध्य प्रदेशः मुनव्वर फ़ारूक़ी के सह-आरोपी की ज़मानत याचिका ख़ारिज

मामले में सह-आरोपी सदाक़त ख़ान ने उसी आधार पर ज़मानत के लिए याचिका दायर की थी, जिस आधार पर फ़ारूक़ी को चार दिन पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम ज़मानत दी गई थी. हालांकि अतिरिक्त जिला जज ने कहा कि क़ानून के तहत ज़मानत देना न्यायोचित नहीं है.

इंदौर: देर रात सुप्रीम कोर्ट के जज की कॉल के बाद हुई मुनव्वर फ़ारूक़ी की रिहाई

केंद्रीय जेल प्रशासन ने इलाहाबाद की एक अदालत के जारी पेशी वॉरंट का हवाला देते हुए फारुकी की रिहाई में शनिवार देर शाम असमर्थता जताई थी. हालांकि देर रात सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने इंदौर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को फोन किया और उन्हें अपलोड किए गए आदेशों के लिए वेबसाइट देखने और उसका अनुपालन करने के लिए कहा.

सुप्रीम कोर्ट से मुनव्वर फ़ारूक़ी को मिली अंतरिम ज़मानत, यूपी पुलिस की गिरफ़्तारी से भी संरक्षण

स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को जनवरी में हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में इंदौर में गिरफ़्तार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि उनकी गिरफ़्तारी में 2014 में दिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया था.

मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट ने मुनव्वर फ़ारूक़ी और नलिन यादव की ज़मानत याचिका ख़ारिज की

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत याचिका यह कहते हुए ख़ारिज कर दी कि ज़मानत देने का कोई आधार नहीं बनता है. फ़ारूक़ी को इस महीने की शुरुआत में हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

मुनव्वर फ़ारूक़ी को जेल में रखना मौलिक स्वतंत्रता की गंभीर अवहेलनाः पीयूडीआर

स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को इस महीने की शुरुआत में हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने कहा कि यह मामला मौलिक स्वतंत्रता की उपेक्षा और इसे बनाए रखने में न्यायपालिका के विफलता का प्रतीक है.

मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत पर फ़ैसला सुरक्षित, कोर्ट ने कहा- ऐसे लोगों को बख़्शना नहीं चाहिए

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत याचिका पर सोमवार को आदेश सुरक्षित रख लिया है. उन्हें इस महीने की शुरुआत में इंदौर में हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

मुनव्वर फ़ारूक़ी मामला: इंदौर पुलिस ने कहा- सबूत नहीं, अब यूपी पुलिस कर रही गिरफ़्तारी की तैयारी

इस महीने की शुरुआत में स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी को इंदौर में हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. पिछले हफ़्ते पुलिस द्वारा उनके ख़िलाफ़ सबूत न होने की बात कहने के बावजूद एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया.

मुनव्वर फ़ारूक़ी गिरफ़्तारी: पुलिस ने कहा- सबूत नहीं, पर ज़मानत याचिका ख़ारिज की जाए

मध्य प्रदेश पुलिस ने हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के सामने हिंदू देवताओं के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में गिरफ़्तार स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी की ज़मानत याचिका की सुनवाई में केस डायरी पेश नहीं की और कहा कि फ़ारूक़ी को रिहा करने से क़ानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है.

पुलिस ने कहा- स्टैंडअप कॉमेडियन द्वारा हिंदू देवताओं के अपमान करने का कोई वीडियो सबूत नहीं

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक मेयर मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ के बेटे ने स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी पर हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणियां करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था. फारूकी समेत पांच लोगों को गिरफ़्तार कर 13 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फ़ारूक़ी समेत पांच लोग गिरफ़्तार, न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक मेयर मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ के बेटे ने मामला दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि इंदौर में नव वर्ष पर एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अभद्र टिप्पणियां की गई थीं.

मशहूर कलाकार और हास्य अभिनेता जगदीप का निधन

जगदीप ने अपने 50 साल के करिअर में क़रीब 400 फिल्मों में काम किया. 1975 में आई फिल्म शोले के सूरमा भोपाली के उनके किरदार को प्रशंसक आज भी याद करते हैं. उनका डायलॉग ‘हमारा नाम सूरमा भोपाली एसे ही नहीं है’ काफी मशहूर है.

क़ादिर ख़ान: जिन्हें लेकर अपनी-अपनी ग़लतफ़हमियां हैं

क़ादिर ख़ान हिंदी सिनेमा में उस पीढ़ी के आख़िरी लेखक थे, जिन्हें आम लोगों की भाषा और साहित्य की अहमियत का एहसास था. उनकी लिखी फिल्मों को देखते हुए दर्शकों को यह पता भी नहीं चलता था कि इस सहज संवाद में उन्होंने ग़ालिब जैसे शायर की मदद ली और स्क्रीनप्ले में यथार्थ के साथ शायरी वाली कल्पना का भी ख़याल रखा.