Corona Virus

कोलकाता के एक टीकाकरण केंद्र पर खुराक लेने का इंतज़ार करते लोग. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड: टीकाकरण पर सियासी खींचतान की बजाय राज्यों को साथ लेकर समयबद्ध नीति लाए केंद्र

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसे सही वैक्सीन नीति लागू करने को लेकर कार्यपालिका की बुद्धि पर भरोसा करना चाहिए. पर हक़ीक़त यह है कि भारत में स्पष्ट तौर पर कोई भी घोषित राष्ट्रीय वैक्सीन नीति है ही नहीं. सच यह भी है कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अमल के लिए केंद्र और राज्य अलग इकाइयों के तौर पर काम नहीं कर सकते हैं.

Lucknow: UP Chief Minister Yogi Adityanath talks to the media at Central Hall of Assembly in Lucknow, Wednesday, Dec. 19, 2018. (PTI Photo/Nand Kumar) (PTI12_19_2018_000091)

उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों में चिकित्सा व्यवस्था ‘राम भरोसे’: इलाहाबाद हाईकोर्ट

मेरठ ज़िला अस्पताल में भर्ती एक मरीज़ की मौत के बाद शव का निस्तारण ‘अज्ञात’ में कर देने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की. अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं है और अगर महामारी की तीसरी लहर आती है तो उत्तर प्रदेश इसके लिए तैयार है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड की दूसरी लहर में अब तक तीन सौ के क़रीब डॉक्टरों की जान गई: आईएमए

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बताया कि कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान अब तक देशभर के 269 चिकित्सक अपनी जान गंवा चुके हैं. संक्रमण के चलते बिहार में सर्वाधिक 78 डॉक्टरों की मौत हुई है. इसके बाद उत्तर प्रदेश में 37 और दिल्ली में 28 डॉक्टरों की मौत हुई है.

रेमडेसिविर इंजेक्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/Hospital Moinhos de Vento)

केंद्र और राज्य के बीच रेमडेसिविर को लेकर समन्वय की कमी: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर गुजरात की मांग क्यों नहीं पूरी की जा रही है. हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले एक महीने से राज्य को प्रतिदिन करीब 16,000 शीशियों की आपूर्ति जारी रखी है, जबकि मांग प्रतिदिन लगभग 25,000 शीशियों की थी.

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योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कोविड की दूसरी लहर नियंत्रण में है, लेकिन हक़ीक़त कुछ और है

वीडियो: उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस की स्थिति इतनी बुरी है कि भाजपा के एक विधायक ने अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि वह बहुत अधिक कहने से डरते हैं, क्योंकि इससे उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का आरोप लग सकता है. वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि महामारी की दूसरी लहर नियंत्रण में है.

नवनीत कालरा के खान चाचा रेस्तरां में पुलिस छापामारी (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली: ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर कालाबाज़ारी मामले में कारोबारी नवनीत कालरा गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस ने कोरोना वायरस महामारी के बीच ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कथित जमाखोरी और कालाबाज़ारी के आरोपों का सामना कर रहे कारोबारी नवनीत कालरा को गिरफ़्तार किया है. बीते दिनों दिल्ली में उनके तीन रेस्तरां से 500 से अधिक ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर ज़ब्त किए गए थे.

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देश के नामी वायरोलॉजिस्ट ने मोदी सरकार के कोरोना सलाहकार समूह से इस्तीफ़ा दिया

मोदी सरकार द्वारा कोरोना वायरस को लेकर बनाए गए वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष शाहिद जमील ने पिछले कुछ महीनों में कई बार इस बात को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी कि कोरोना संक्रमण को लेकर नीतियां बनाते वक़्त विज्ञान को तरजीह नहीं दी जा रही है, जो अत्यधिक चिंता का विषय है.

पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान एक कर्मचारी. (फोटो: पीटीआई)

यूपी: पंचायत चुनाव ड्यूटी में हुए कोविड संक्रमण से 1600 से ज़्यादा शिक्षकों-कर्मचारियों की जान गई

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने बताया कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी में कोविड संक्रमित होने के बाद 75 ज़िलों के 1,621 शिक्षकों, अनुदेशकों, शिक्षा मित्रों व कर्मचारियों ने जान गंवाई है. संघ ने इनके नामों की सूची मुख्यमंत्री को भेजते हुए परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक मदद व आश्रितों को नौकरी देने की मांग की है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड-19: हाशिये पर रहने वालों की लड़ाई सिर्फ बीमारी से नहीं है…

कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान दवा, ऑक्सीजन आदि की कमी जानलेवा साबित हो रही है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे अस्पताल की चौखट और इलाज तक सहज पहुंच भी मयस्सर नहीं है.

(फोटो: पीटीआई)

कोविड संकट: आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना

इस कठिन वक़्त में सरकारों की काहिली तो अपनी जगह पर है ही, लोगों का आदमियत से परे होते जाना भी पीड़ितों की तकलीफों में कई गुनी वृद्धि कर रहा है. इसके चलते एक और बड़ा सवाल विकट होकर सामने आ गया है कि क्या इस महामारी के जाते-जाते हम इंसान भी रह जाएंगे?

रघुराम राजन. (फोटो:रॉयटर्स)

स्वतंत्रता के बाद कोविड-19 देश की शायद सबसे बड़ी चुनौती: रघुराम राजन

आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के कहा कि महामारी के बाद यदि हम समाज के बारे में गंभीरता से सवाल नहीं उठाते हैं तो यह महामारी जितनी ही बड़ी त्रासदी होगी. उन्होंने कहा कि महामारी के चलते भारत के लिए यह त्रासदी भरा समय है और इस महामारी का एक प्रभाव यह है कि कई जगहों पर विभिन्न कारणों के चलते सरकार लोगों की मदद के लिए मौजूद नहीं थी.

स्पुतनिक वी टीका. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19: डॉ. रेड्डीज ने स्पुतनिक वी टीका भारत में पेश किया, दाम 995 रुपये प्रति खुराक

कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद देश में शुक्रवार को एक तीसरे टीके को भारतीय बाज़ारों के लिए जारी कर दिया गया और पिछले दो टीकों की केंद्र, राज्यों और बाज़ार के लिए अलग-अलग कीमत के बजाय इसकी एक ही कीमत 995.40 रुपये प्रति खुराक रखी गई है.

कोविशील्ड. (फोटो: रॉयटर्स)

कोविशील्ड टीके की दो डोज़ के बीच का समय 6-8 सप्ताह बढ़ाकर 12-16 हफ़्ता किया गया: सरकार

पिछले कुछ महीनों में दूसरी बार ऐसा हुआ है, जब कोविशील्ड टीके की दो डोज के बीच का समयांतर बढ़ाया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मार्च में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वह दो डोज के बीच समयांतर को 28 दिनों से बढ़ाकर 6 से 8 सप्ताह तक कर दें. कोवैक्सीन के दो डोज के बीच के समय में बदलाव नहीं किया गया है.

(फोटो: पीटीआई)

प्रवासी कामगारों के लिए सामुदायिक रसोई, खाद्यान्न और परिवहन की व्यवस्था करें सरकारें: अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाद्यान्न देते हुए प्रशासन उन प्रवासी कामगारों को पहचान पत्र दिखाने पर ज़ोर न दे, जिनके पास फ़िलहाल दस्तावेज़ नहीं हैं. पीठ ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों को यह निर्देश भी दिया कि वे कोविड-19 के कारण फंसे प्रवासी कामगारों में से जो घर जाना चाहते हैं, उनके लिए परिवहन की समुचित व्यवस्था करें.

पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर में एक रैली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

भारत में धार्मिक व राजनीतिक कार्यक्रम भी कोरोना प्रसार में बढ़ोतरी की वजह बने: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि भारत में जन स्वास्थ्य एवं सामाजिक उपायों के पालन में कमी भी वर्तमान हालात के लिए ज़िम्मेदार रही. दक्षिण पूर्वी एशिया में कोरोना वायरस के कुल मामले और मौतों में भारत की 95 एवं 93 फ़ीसदी हिस्सेदारी है. वहीं यदि वैश्विक स्तर पर देखें तो 50 फ़ीसदी मामले और 30 फ़ीसदी मौतें भारत में हो रही हैं.