Labour Ministry

ग्रेच्युटी की समयसीमा पांच साल से घटाकर एक साल की जाए: संसदीय समिति

श्रम पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफ़ारिश की है कि ग्रेच्युटी की सुविधा को सभी प्रकार के कर्मचारियों तक बढ़ाया जाना चाहिए, जिसमें ठेका मज़दूर और दैनिक या मासिक वेतन कर्मचारी शामिल हैं.

लॉकडाउन: ईपीएफओ से पैसा निकालने वालों में 74 फीसदी का वेतन 15,000 से कम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के मुताबिक लॉकडाउन के दौरान अप्रैल और मई महीने में कुल 11,540 करोड़ रुपये के 36.02 लाख दावों का निपटारा किया गया है.

कोरोना लॉकडाउन प्रभाव: 6,50,000 से ज्यादा कर्मचारियों ने ईपीएफ से पैसा निकाला

अप्रैल महीने में प्रति कार्य दिवस औसतन 30,000-35,000 लोगों ने अपनी भविष्य निधि से पैसा निकाला है, जो कि दर्शाता है कि लोग किस स्तर के संकट से जूझ रहे हैं.

सरकार ने पीपीएफ और वरिष्ठ नागरिकों की बचत योजनाओं की ब्याज दरों में की भारी कटौती

सरकार ने राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र और लोक भविष्य निधि समेत लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरें 2020-21 की पहली तिमाही के लिए 1.4 फीसदी तक घटा दी हैं.

श्रम मंत्रालय ईपीएफ जमा पर 8.65 प्रतिशत की ब्याज दर कायम रखने का इच्छुक

वित्त मंत्रालय श्रम मंत्रालय पर इस बात के लिए दबाव बना रहा है कि ईपीएफ पर ब्याज दर को सरकार द्वारा चलाई जाने वाली अन्य लघु बचत योजनाओं मसलन भविष्य निधि जमा और डाकघर बचत योजनाओं के समान किया जाए.

नौकरियां पैदा न कर पाने के लिए नेहरू-गांधी परिवार को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते: शिवसेना

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कहा कि महज़ शब्दों के खेल या विज्ञापनों से बढ़ती बेरोज़गारी के मुद्दे का समाधान नहीं होने वाला है, सिर्फ विज्ञापन देने से ही नौकरियां नहीं मिल जाएंगी.

Job applicants wait in line at a technology job fair in Los Angeles. Photo: Reuters

मोदी सरकार ने जारी किए रोज़गार के आंकड़े, 2017-18 में बेरोज़गारी दर 45 साल में सर्वाधिक रही

आम चुनाव से ठीक पहले बेरोज़गारी से जुड़े आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट लीक हो गई थी, तब सरकार ने इस रिपोर्ट को अधूरा बताया था, लेकिन शुक्रवार को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में इसकी पुष्टि हो गई.

मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की 87 हज़ार नौकरियां गईं: श्रम मंत्रालय

श्रम मंत्रालय के एक सर्वेक्षण के अनुसार अप्रैल-जून 2017 के बीच मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के संविदा और अस्थायी कर्मचारी सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए.

आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार के तीन साल में अर्थव्यवस्था के अच्छे दिन नहीं आए

मोदी यह समझाने की कितनी भी कोशिश करें कि उनके आने से बदलाव आया है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अर्थव्यवस्था से जुड़े अधिकांश क्षेत्रों में सरकार प्रगति करने के लिए जूझती नज़र आ रही है.