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(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: कथित तौर पर ज़हरीली शराब पीने से तीन दिन में पांच लोगों की मौत

बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर ज़िले का मामला. मृतक के परिजनों के दावे के इतर ज़िला प्रशासन ने शराब से मौत होने की बात से इनकार किया है. एफ़आईआर दर्ज करने के बाद थानाध्यक्ष को निलंबित करने के साथ सर्किल इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया गया है. बिहार में साल 2016 से पूर्ण शराबबंदी है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में शराबबंदी की पोस्टर देखते हुए. (फोटो: पीटीआई)

भारतीय मादक पेय कंपनियों के संघ ने की बिहार में शराबबंदी ख़त्म करने की मांग

सीआईएबीसी परिसंघ ने ज्ञापन देकर कहा है कि शराबबंदी के कारण ही बिहार में अवैध शराब की तस्करी बढ़ी है तथा सरकारी ख़ज़ाने को बड़ा नुक़सान हुआ है. हाल ही में आए एनएफएचएस-5 के मुताबिक़ बिना शराबबंदी वाले महाराष्ट्र की तुलना में बिहार में शराब का उपभोग अधिक है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

पूर्ण शराबबंदी वाले बिहार में पी जाती है महाराष्ट्र से ज़्यादा शराब: सरकारी सर्वे

साल 2016 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में शराबबंदी लागू की थी. अब राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे में सामने आया है कि बिना शराबबंदी वाले महाराष्ट्र की तुलना में बिहार में शराब का उपभोग अधिक है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

कोरोना लॉकडाउन: केरल में शराब न मिलने पर पांच लोगों ने की आत्महत्या

केरल में पहले भी कई मौकों पर शराब पर पाबंदी लगती रही है लेकिन यह पहली बार है जब देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राज्य में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी लग गई है.

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल. (फोटो: एएनआई)

गुजरात को शराबबंदी से सालाना 15 हज़ार करोड़ का नुकसान, केंद्र से मुआवज़ा मांगा

बजट से पहले वित्त मंत्रालय द्वारा बुलाई गई बैठक में उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 47 के उद्देश्य को सफल बनाने के लिए राज्य ने शराबबंदी लागू की थी. इसके चलते राज्य को जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई केंद्र सरकार करे.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

बिहार: शराबबंदी से राजस्व में कमी न होने का नीतीश कुमार का दावा ग़लत निकला

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दावे के उलट कैग की रिपोर्ट बताती है कि शराबबंदी के कारण वित्त वर्ष 2016-2017 में कर राजस्व में गिरावट आई है.

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मैं कांग्रेसी हूं और मरते दम तक कांग्रेसी ही रहूंगा: मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लाल थानहावला

साक्षात्कार: विधानसभा चुनाव से पहले मिज़ोरम के मुख्यमंत्री लाल थानहावला ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने की ख़बरों को ख़ारिज करते हुए कहा कि आखिरी समय में वोटरों को भ्रमित करने के लिए ऐसी ख़बरें फैलाई जा रही हैं. विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति समेत विभिन्न मुद्दों पर उनसे संगीता बरुआ पिशारोती की बातचीत.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक)

शराबबंदी: सिर दर्द के इलाज के लिए पेट दर्द की गोली दे रहे नीतीश कुमार?

बिहार में दो साल से लागू बिहार मद्य निषेध व उत्पाद अधिनियम, 2016 में करीब आधा दर्जन संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में संशोधन प्रस्ताव को पेश किया जाएगा. इसे लेकर काफी हंगामा होने की उम्मीद है.

(फोटो: गूगल मैप)

बिहार में सर्जरी के लिए इस्तेमाल होने वाला स्प्रिट पीने से चार लोगों की मौत

बिहार के बेगूसराय का मामला. डॉक्टर सर्जिकल स्प्रिट का इस्तेमाल सर्जिकल उपकरणों को साफ़ करने के लिए करते हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

बिहार: शराबबंदी क़ानून के तहत जेल में बंद क़ैदी की मौत

पुलिस के मुताबिक, मृतक सुरेंद्र साह पूर्वी चंपारण ज़िले का रहने वाला था. उसे 17 जून को शराब पीने के चलते उसके गांव से गिरफ़्तार करके जेल में डाला गया था. वह गिरफ़्तारी के बाद से ही बीमार रह रहा था.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में शराबबंदी की पोस्टर देखते हुए. (फोटो: पीटीआई)

बिहार में शराबबंदी: बूढ़ों के साथ विधवाएं भी जेल में बंद, तस्करी में बच्चों का हो रहा इस्तेमाल

अधिकारियों ने बताया कि शराब तस्करी में शामिल ज़्यादातर बच्चे अनुसूचित जाति और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदाय से हैं.

गया से भाजपा सांसद हरि मांझी. (फोटो साभार: फेसबुक)

क्या गया एसएसपी का ट्रांसफर शराब मामले में गिरफ़्तार भाजपा सांसद के बेटे की वजह से हुआ?

बिहार की गया लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हरि मांझी के बेटे राहुल मांझी और उनके दोस्तों को शराब पीने की वजह से बीते 23 अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था.

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बिहार से ग्राउंड रिपोर्ट: नीतीश कुमार की शराबबंदी का नशा गरीबों को भारी पड़ रहा है

शराबबंदी क़ानून के तहत अब तक कुल 1 लाख 21 हज़ार 586 लोगों की ग़िरफ्तारी हुई है, जिनमें से अधिकांश बेहद ग़रीब तबके से आते हैं.