कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कट्टर समर्थक रहीं लेखिका मधु पूर्णिमा किश्वर और कुछ अन्य सोशल मीडिया यूजर्स के ख़िलाफ़ पुलिस ने जाली और गुमराह करने वाला कंटेंट फैलाने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है. बीते मार्च में किश्वर ने प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार और सेक्शुअल मांगों से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए थे, यह दावा करते हुए कि उनके पास अंदरूनी जानकारी है.
दक्षिणपंथी स्तंभकार मधु किश्वर के 'मानुषी' ट्रस्ट ने दारुल उलूम देवबंद में 'बहिश्ती ज़ेवर' नाम की किताब पढ़ाए जाने का दावा करते हुए कहा था कि इसमें यौन हिंसा और यौन अपराध को वैध बताने की कोशिश की गई है. हालांकि, सच यह है कि यह किताब दारुल उलूम के पाठ्यक्रम में ही शामिल नहीं हैं.
दक्षिणपंथी कार्यकर्ता और विद्वान मधु किश्वर ने सोशल मीडिया पर साल 2017 का एक वायरल वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें कांवड़ियों को ले जा रहे एक वाहन द्वारा कथित तौर पर एक मुस्लिम व्यक्ति को कुचलते हुए दिखाया गया था. वीडियो को उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने असत्य और भ्रामक बताया है.
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया है कि सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा भड़काने वाले ट्वीट करने पर मधु किश्वर के ख़िलाफ़ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है. उनके झूठ के पर्दाफ़ाश करने का वक़्त आ गया है.