मंगलवार को फिर से पेट्रोल की क़ीमत में 80 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल के दाम में 70 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. 22 मार्च से क़ीमत में वृद्धि शुरू होने के बाद से अब तक पेट्रोल और डीज़ल के दाम कुल 4.80 रुपये प्रति लीटर बढ़ चुके हैं.
सोमवार को पेट्रोल की कीमतों में 30 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत में 35 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. पिछले एक सप्ताह में कीमतों में छठी बार बढ़ोतरी की गई है. मूल्यवृद्धि को लेकर विपक्षी दल के सदस्यों ने कहा कि सरकार तर्क देती है कि तेल कंपनियां मूल्य बढ़ाती हैं और उसका हस्तक्षेप नहीं होता. अगर यह बात सही है तो यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के समय इनके दाम कैसे नहीं बढ़े.
बीते छह दिनों में हुई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 3.70 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3.75 रुपये प्रति लीटर बढ़ गए हैं. इससे पहले पेट्रोल तथा डीजल की कीमत साढ़े चार महीने तक स्थिर रहने के बाद 22 मार्च को 80 पैसे बढ़ाई गई थी. इसके बाद से इनकी कीमतों में प्रति लीटर 80-80 पैसे की तीन बार बढ़ोतरी की गई.
पेट्रोल और डीज़ल की कीमत में शनिवार को 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. तेल कंपनियां कच्चे माल की कीमत में बढ़ोतरी का भार उपभोक्ताओं पर डाल रही हैं. कुल चार बार में पेट्रोल और डीज़ल के दाम में कुल 3.20 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने पीएम-केयर्स फंड के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से इसका ऑडिट कराने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. इलाहाबाद हाईकोर्ट के 31 अगस्त, 2020 के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि जनता के पैसे की अकल्पनीय और अथाह राशि कोष के ख़जाने में हर रोज़ बेरोकटोक डाली जाती है.
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बीते चार दिनों में तीसरी बार बढ़ोतरी की गई है. तीन बार की बढ़ोतरी के बाद 2.40 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है. उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले चार नवंबर, 2021 से ही पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें स्थिर बनी हुई थीं.
लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि यह सच है कि हमारे बच्चों के परिवारों की आजीविका को बहुत बुरे संकट का सामना करना पड़ा है. लेकिन अब जैसे-जैसे बच्चे स्कूलों में वापस आ रहे हैं, उन्हें और भी बेहतर पोषण की आवश्यकता है. यही नहीं, मिड-डे मील से उन बच्चों को वापस स्कूल लाने में भी मदद मिलेगी, जो महामारी के दौरान स्कूल छोड़ चुके हैं.
विपक्ष ने बंदरगाहों को निजी हाथ में सौंपने का आरोप लगाया तो भाजपा ने पोत परिवहन में विकास की बात कही. विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकारी क्षेत्र के उद्योगों की हालत बहुत ख़राब है. यह सरकार सरकारी कंपनियों को बेचने में बिल्कुल नहीं हिचक रही है. उद्योग क्षेत्र पर निजी क्षेत्र के लोगों का नियंत्रण हो रहा है.
पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन 80 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद कांग्रेस के सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया. इसके अलावा सदन में विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि एवं बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर भारी हंगामा किया.
बीते साल अक्टूबर के बाद एलपीजी के दामों में यह पहली बढ़ोतरी है, जबकि पेट्रोल-डीज़ल के दाम उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले 4 नवंबर 2021 से स्थिर थे. ऐसी अटकलें थीं कि 10 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद बढ़ोतरी की घोषणा की जाएगी. राहुल गांधी ने कहा कि अब सरकार लगातार कीमतों का ‘विकास’ करेगी.
भारत को ख़ुद को ऊर्जा बाज़ार में लंबे व्यवधान और मुद्रा की कमज़ोरी का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि इनका आर्थिक विकास, आजीविका और रोज़गार पर गंभीर असर होगा.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिकित्सा शिक्षा के लिए बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों के विदेश जाने के लिए पिछली सरकारों को ज़िम्मेदार ठहराया और कहा कि उनकी सरकार देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने पर काम कर रही है, ताकि छात्र देश में ही मेडिकल शिक्षा पा सकें.
वीडियो: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और अन्य मसलों को लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र प्रसाद तिवारी से द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी की बातचीत.
ग्राउंड रिपोर्ट: हिंदुत्ववादी पोंगापंथी, दूरदर्शिताविहीन शासन और योगी सरकार की टैनरी कामगारों के प्रति बेरुख़ी ने कानपुर के चमड़ा उद्योग को अब तक के सबसे बड़े संकट में धकेल दिया है.
वीडियो: लखीमपुर खीरी हिंसा के संबंध में यहां के कुछ किसान नेताओं का कहना है कि बीते साल अक्टूबर में प्रदर्शन के दौरान किसानों को एसयूवी से कुचले जाने की घटना की तुलना ब्रिटिश शासन के दौरान जलियांवाला बाग हत्याकांड से की जा सकती है. चार किसानों और एक पत्रकार की कुचले जाने से मौत के बाद भड़की हिंसा में तीन अन्य की मौत हो गई थी.