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सुप्रीम कोर्ट ने यौनकर्मियों को आधार कार्ड जारी किए जाने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा जारी एक प्रोफार्मा प्रमाण-पत्र के आधार पर यौनकर्मियों को आधार कार्ड जारी किए जाने का निर्देश दिया और कहा कि यौनकर्मियों की गोपनीयता भंग नहीं होनी चाहिए और उनकी पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए.

संक्रमित सुई से एड्स की चपेट में आने वाले हर सौ भारतीय में 35 पंजाब के: आरटीआई

एक आरटीआई आवेदन के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन ने बताया कि 2011-12 से 2020-21 के बीच पंजाब में 15,924 लोग असुरक्षित सुइयों के इस्तेमाल के कारण एचआईवी संक्रमित हुए. वहीं, देश में पिछले 10 साल के दौरान संक्रमित सुइयों के चलते 45,864 लोग एड्स के मरीज़ बन गए.

यौनकर्मियों की पहचान का आधार नाको की ओर से मुहैया सूची तक सीमित नहीं रहे: सुप्रीम कोर्ट

29 दिसंबर को शीर्ष अदालत ने राज्यों को पहचान के सबूत के बिना ही यौनकर्मियों को राशन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. अब कोर्ट ने समुदाय आधारित संगठनों से अपने क्षेत्रों में यौनकर्मियों की एक सूची तैयार कर उसे संबंधित ज़िला क़ानूनी सेवा प्राधिकरण या नाको द्वारा सत्यापित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा करते हुए राज्य के अधिकारी मामले में गोपनीयता बनाए रखें.

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, सेक्स वर्कर्स को राशन, वोटर आईडी, आधार कार्ड मुहैया कराएं सरकारें

यौनकर्मियों को राशन मुहैया कराने को लेकर दिए गए निर्देश का पालन न करने पर कोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि गरिमा का अधिकार एक मौलिक हक़ है जो देश के प्रत्येक नागरिक को उसके व्यवसाय की परवाह किए बिना दिया जाना चाहिए.

नॉर्थ ईस्ट डायरी: मणिपुर विश्वविद्यालय में आंदोलन करने पर 6 शिक्षकों सहित जेल भेजे गए कई छात्र

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, असम, सिक्किम, मेघालय, मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा के प्रमुख समाचार.

सरकार एचआईवी मरीजों से भेदभाव पर रोक वाले क़ानून को क्यों अधिसूचित नहीं कर रही: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन को एचआईवी से ग्रस्त लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए बने क़ानून की अधिसूचना तत्काल जारी करने के संबंध में नोटिस जारी किया है.

देश में एचआईवी प्रभावित बच्चों की जीवन-रक्षक दवा का टोटा

सरकार द्वारा बकाया न चुकाए जाने के चलते प्रसिद्ध दवा निर्माता कंपनी सिप्ला ने एचआईवी प्रभावित बच्चों के लिए बेहद ज़रूरी दवा को बनाना बंद कर दिया है.