Nirmala Sitharaman

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीटीआई)

ब्याज दरें घटाने का आदेश ‘चूक’ के चलते जारी हुआ या चुनावों के कारण वापस लेना पड़ा: कांग्रेस

सरकार की ओर से छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें घटाने और फ़िर अपने इस फैसले को वापस लिए जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. पार्टी ने ये भी कहा कि भाजपा को रजनीकांत को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार पर राजनीतिक फायदा उठाने से बाज़ आना चाहिए.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीआईबी)

सरकार ने ग़लती का हवाला दिया, छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती वापस होगी

छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को झटका देते हुए सरकार ने बीते बुधवार को पीपीएफ और राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र समेत लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में 1.1 प्रतिशत तक की कटौती की थी. माना जा रहा है कि कुछ राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा को किसी नुकसान से बचाने के लिए ब्याज दरों में कटौती का निर्णय वापस लिया गया.

निर्मला सीतारमण. (फोटो: पीटीआई)

‘बीमा संशोधन विधेयक 2021’ को मंज़ूरी, एफ़डीआई सीमा बढ़ाकर 74 फ़ीसदी की गई

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74 फ़ीसदी करने से इस क्षेत्र की कंपनियों की बढ़ती पूंजी ज़रूरत को पूरा करने में मदद मिलेगी. विपक्ष के कुछ सदस्यों के आरोपों को नकारते हुए उन्होंने कहा कि कोई हमारे पैसे को बाहर लेकर नहीं जाएगा, पैसा हमारे यहां ही रहेगा और तो और मुनाफ़े का एक हिस्सा भी यहीं रहेगा.

Prayagraj: Bank employees raise slogans during the second day of a nationwide strike, called by United Forum of Bank Unions (UFBU), against the proposed privatisation of two state-owned lenders, in Prayagraj, Tuesday, March 16, 2021. (PTI Photo)(PTI03 16 2021 000090B)

निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का मुद्दा राज्यसभा और लोकसभा में उठा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी महीने की शुरुआत में बजट पेश करते हुए सरकार की विनिवेश योजना के तहत दो सरकारी बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव रखा था. इसके ख़िलाफ़ नौ यूनियनों के संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 15 और 16 मार्च को हड़ताल का आह्वान किया था.

Kolkata: Bank employees participate in a rally to support the two-day nationwide strike, called by United Forum of Bank Unions (UFBU), against the proposed privatisation of two state-owned lenders, in Kolkata, Monday, March 15, 2021. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI03 15 2021 000083B)

निजीकरण के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी हड़ताल से सरकारी बैंकों में सेवाओं पर असर

सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की सरकार की घोषणा के ख़िलाफ़ दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से किया गया है. निजी क्षेत्र के बैंक इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं.

Amritsar: A closed branch of the State Bank of India (SBI) during the bank employees' two-day nationwide strike for wage revision, in Amritsar on Wednesday, May 30, 2018. (PTI Photo) (PTI5_30_2018_000134B)

निजीकरण के ख़िलाफ़ बैंक संगठनों का विरोध प्रदर्शन, मार्च में संसद के घेराव की योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में अपने बजट भाषण के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी. अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ का कहना है कि बैंक संगठन अगले 15 दिनों के दौरान देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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2021 के बजट पर क्या है दिल्लीवालों की राय

वीडियो: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साल 2021-22 के बजट की घोषणा कर दी है. आम बजट पर दिल्ली के नागरिकों से द वायर के मुकुल सिंह चौहान और आकांक्षा चौधरी की बातचीत.

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आम बजट: सरकारी कंपनियों को बेचने की तैयारी ग़रीबों की झोली ख़ाली

वीडियो: 2021-22 के आम बजट में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल जैसे देश के उन राज्यों के लिए राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, कॉरिडोर से लेकर टेक्सटाइल पार्क जैसी विशेष घोषणाएं की गई हैं, जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर (फोटो: पीटीआई)

बजट 2021: चुनावी राज्यों को मिलीं 2.27 लाख करोड़ रुपये की विशेष परियोजनाएं

2021-22 के आम बजट में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल जैसे देश के उन राज्यों के लिए राजमार्ग, एक्सप्रेस वे, कॉरिडोर से लेकर टेक्सटाइल पार्क जैसी विशेष घोषणाएं की गई हैं जहां इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीटीआई)

जीएसटी क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों की तरफ़ से केंद्र 1.10 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ लेगा: मंत्रालय

केंद्र और कुछ राज्यों के बीच विवाद का विषय बने जीएसटी क्षतिपूर्ति के मुद्दे को सुलझाने की दिशा में यह अहम क़दम माना जा रहा है. कोविड-19 संकट के चलते अर्थव्यवस्था में नरमी से जीएसटी संग्रह कम रहा है. इससे राज्यों का बजट गड़बड़ाया है. इस कमी को पूरा करने के लिए वित्त मंत्रालय ने राज्यों के समक्ष क़र्ज़ लेने के दो विकल्प रखे थे, जिसे कुछ राज्यों ने स्वीकार नहीं किया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फाइल फोटो: पीटीआई)

जीएसटी गतिरोध: अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए राज्यों की ओर से केंद्र को क़र्ज़ लेना चाहिए

भारतीय अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए फंड का का इंतज़ाम करना एक राष्ट्रीय समस्या है. ऐसे समय में, ख़ासकर जब देश की अर्थव्यवस्था बाकी कई देशों के मुक़ाबले अधिक ख़राब है, तब केंद्र और राज्यों का क़र्ज़ लेने को लेकर उलझना अनुचित है.

(फोटो: पीटीआई)

सरकार ने नियमों का उल्लंघन कर जीएसटी क्षतिपूर्ति फंड को अन्य कामों में ख़र्च किया: कैग

कैग रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 और 2018-19 के दौरान वसूले गए कुल जीएसटी उपकर में से 47,272 करोड़ रुपये को जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर निधि में नहीं डाला गया. इस राशि का इस्तेमाल राज्यों को राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाना चाहिए था.

(फोटो: पीटीआई)

जीएसटी क्षतिपूर्ति: 21 राज्यों ने 97,000 करोड़ रुपये के उधार के प्रस्ताव का समर्थन किया

ये राज्य मुख्य रूप से भाजपा शासित और उन दलों की सरकार वाले हैं, जो केंद्र की नीतियों का समर्थन करते रहे हैं. चालू वित्त वर्ष में राज्यों को जीएसटी संग्रह में 2.35 करोड़ रुपये के राजस्व की कमी का अनुमान है. केंद्र ने क्षतिपूर्ति के लिए राज्यों को दो विकल्प दिए थे. इसके तहत 97,000 करोड़ रुपये रिज़र्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सुविधा से या पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये बाज़ार से उधार लेने का विकल्प दिया गया था.

रक्षा मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह. (फोटो: पीटीआई)

रक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई जाने वाली समितियां उनके उद्देश्य में सफल होती क्यों नहीं दिखतीं?

पिछले कई दशकों में रक्षा मंत्रालय ने कई सारे पैनल, समितियों, कार्यसमूहों और टास्क फोर्सों का गठन किया है, लेकिन कुछ को छोड़कर अधिकतर समितियों के सुझावों या सिफ़ारिशों का नाममात्र या कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फोटो साभार: पीआईबी)

जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर केंद्र के विकल्पों को राज्यों ने ठुकराया, कहा- सरकार ख़ुद उधार ले

पिछले हफ्ते जीएसटी परिषद की बैठक के दो दिन बाद केंद्र सरकार ने 2.3 लाख करोड़ रुपये के मुआवज़े की कमी उधार लेकर पूरा करने के लिए राज्यों को दो विकल्प दिए थे. आठ ग़ैर- भाजपा शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. इस संबंध में पांच मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिखा है.