North East Delhi Riot

दिल्ली दंगा: बरी हुए व्यक्ति के परिजनों ने कहा- मास्क नहीं पहनने पर किया गया था गिरफ़्तार

दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में पहला फैसला सुनाते हुए सुरेश नामक व्यक्ति को बरी कर दिया. उनकी बहन ने दावा किया कि पुलिस ने मास्क नहीं पहनने के कारण उन्हें पकड़ा था. जब उसके माता-पिता थाने गए तो पुलिस ने उन्हें मास्क लगाने का महत्व बताते हुए डांटा था. अगले दिन सुरेश को तिहाड़ जेल भेज दिया और एक महीने बाद आरोप-पत्र दिया गया जिसमें उन पर दंगों का आरोप लगाया गया था.

दिल्ली दंगा मामले में आया पहला फैसला, कोर्ट ने आरोपी को बरी किया

दिल्ली की एक अदालत ने सुरेश नामक आरोपी को बरी करते हुए कहा कि पुलिस इस केस को साबित करने में बुरी तरह फेल हुई है. दिल्ली पुलिस का आरोप था कि आरोपी सुरेश ने दंगाइयों की भीड़ के साथ मिलकर कथित तौर पर 25 फरवरी, 2020 की शाम को बाबरपुर रोड पर स्थित एक दुकान का ताला तोड़कर लूटपाट की थी.

दिल्ली दंगाः कोर्ट ने कहा- मदीना मस्जिद आगज़नी मामले में पुलिस के ढुलमुल रवैये से आहत

पिछले साल फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के दौरान शिव विहार की मदीना मस्जिद में आग लगा दी गई थी. इसके लेकर कोर्ट ने आदेश दिया था कि पुलिस इस केस में एक अलग एफ़आईआर दायर करे. अब पुलिस ने दावा किया है कि इसे लेकर पहले ही एफ़आईआर दर्ज किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी अदालत को अनजाने में नहीं दे सकी थी.

दिल्ली दंगा: अदालत ने पुलिस की जांच को ‘संवेदनाहीन और हास्यास्पद’ क़रार दिया, जुर्माना लगाया

पुलिस ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दंगों के दौरान गोली लगने से अपनी एक आंख गंवाने वाले मोहम्मद नासिर नामक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. अदालत ने पुलिस को फटकारते हुए कहा कि वे अपना संवैधानिक दायित्व निभाने में बुरी तरह से विफल रहे हैं.

दिल्ली दंगे से जुड़े एक मामले में उमर ख़ालिद को ज़मानत

दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं मिला है, जिससे पता चले के घटना के दिन उमर ख़ालिद वारदात स्थल पर मौजूद थे. हालांकि जेएनयू के पूर्व छात्र ख़ालिद को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा. उनके ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत आपराधिक साज़िश का मुक़दमा भी दर्ज किया गया है.

दिल्ली दंगे के साल भर बाद प्रभावित शिव विहार का हाल

वीडियो: एक साल पहले सांप्रदायिक दंगों में उत्तर पूर्वी दिल्ली में जान-माल का काफ़ी नुकसान हुआ था. तब द वायर ने शिव विहार के प्रभावित लोगों से इस विषय पर बात की थी. एक साल बाद उन्हीं लोगों से दोबारा बातचीत कर उनका हाल जाना गया.

दिल्ली दंगों का एक साल: ख़ौफ़ में जीने को मजबूर शिव विहार के मुसलमान

वीडियो: दिल्ली दंगों के एक साल बाद भी लोग ख़ौफ़ में जी रहे हैं. दंगों में हुए जान-माल के नुकसान की भरपाई हो पाना असंभव है. द वायर ने शिव विहार के लोगों से बातकर उनकी समस्या को जाना.

दिल्ली दंगा: गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ितों ने कहा- उचित मुआवज़ा नहीं मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली की केजरीवाल सरकार का दावा है कि पिछले साल फरवरी महीने में हुए सांप्रदायिक दंगे के पीड़ितों को उचित मुआवज़ा दिया है, हालांकि कई घायलों का कहना कि उन्हें गंभीर चोटें लगने के बावजूद कम मुआवज़ा दिया गया है.

दिल्ली हिंसा को कैसे याद करें?

वीडियो: दिल्ली हिंसा ने बहुत कुछ तबाह किया. 53 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और सैकड़ों की तादाद में लोग घायल हुए. दिल्ली हिंसा के एक साल बाद यह बेहद ज़रूरी सवाल है कि उस हिंसा को किस तरह याद किया जाए?

हिंसा को याद करने का तरीका क्या है

सामूहिक हिंसा एक तरह की नहीं होती. दो समूह लड़ पड़ें, तो वह सामूहिक हिंसा है. एक समूह को निशाना बनाकर की जाने वाली हिंसा भी सामूहिक हिंसा ही है. ऐसी हिंसा को भारत में प्रायः दंगा कह देते हैं. दंगा शब्द में कुछ स्वतः स्फूर्तता का भाव आता है, लेकिन यह सच नहीं है.

दिल्ली दंगा: पीड़ितों द्वारा कुल दावे की तुलना में 10 फीसदी से भी कम मुआवज़ा मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में प्रभावित मौजपुर, अशोक नगर जैसे इलाकों के 55 पीड़ित दुकानदारों ने क्षतिपूर्ति के लिए कुल 3.71 करोड़ रुपये का दावा किया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसमें से 36.82 लाख रुपये का ही भुगतान किया है. ये दावा की गई कुल राशि का 9.91 फीसदी ही है.

दिल्ली दंगों के एक साल: हत्या के 53 मामलों में से 38 में ही अब तक चार्जशीट दाख़िल हुई

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दंगे को लेकर कुल 755 केस दर्ज किए गए थे, जिसमें से 400 मामलों का निपटारा किया जा चुका है. अब तक 1753 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिसमें 933 मुस्लिम और 820 हिंदू हैं.

दिल्ली दंगा: पिंजड़ा तोड़ सदस्यों की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और पुलिस से जवाब मांगा

बीते जनवरी में दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेएनयू छात्राओं- देवांगना कलीता और नताशा नरवाल पर यूएपीए के तहत दर्ज मामले में निचली अदालत ने उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी. इसके ख़िलाफ़ दायर उनकी अपील पर हाईकोर्ट ने पुलिस और सरकार को दस मार्च तक जवाब देने को कहा है.

दिल्ली दंगा: आरोपियों ने अदालत से कहा, आरोप-पत्र पढ़ने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामलों में गैर क़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) क़ानून के तहत मुकदमे का सामना कर रहे कई आरोपियों ने दावा किया कि आदेश के बावजूद जेल में उन्हें आरोप-पत्र तक पहुंच नहीं दी गई. कुछ आरोपियों ने दावा किया कि इसे पढ़ने के लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया.

दिल्ली दंगा: जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद ने जेल में चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने का आरोप लगाया

जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व नेता उमर ख़ालिद को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में बीते सितंबर महीने में गिरफ़्तार किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन दिन से दांत दर्द की शिकायत के बाद भी तिहाड़ जेल प्रशासन ने कोई इलाज मुहैया नहीं कराया है.