विशेष: पॉल रॉबसन पिछली सदी के सबसे प्रसिद्ध क्रांतिकारी सांस्कृतिक व्यक्तित्वों में से एक थे. विश्व शांति की अग्रणी और मानवाधिकारों की मुखर आवाज़ रॉबसन ने अफ़्रीकी-अमेरिकी अश्वेतों के साथ होने वाले नस्ल-भेद के ख़िलाफ़ अनथक संघर्ष किया था.
उत्तराखंड में अंग्रेज़ी की किताब में ‘अम्मी-अब्बू’ क्यों? वो भी दूसरी कक्षा की किताब में? बड़ा वाजिब सवाल था और अब भी है, लेकिन इसकी आड़ में उर्दू को निशाना बनाकर धार्मिक आस्था पर हमले की बात कहकर आप सियासी नफ़रत की वही दीवार अपने आंगन में भी खड़ी कर रहे हैं, जिसको हमारी सियासत अक्सर मज़बूत करने को तत्पर रहती है.
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश जीआर स्वामीनाथन ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा है कि अगर देश की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल बदलती है, तो संविधान नष्ट हो जाएगा. जनसांख्यिकीय प्रोफाइल को बनाए रखने के लिए भारतीय परंपराओं और धर्मों का पालन करना होगा. राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस टिप्पणी की आलोचना की है.
उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले के करनपुर गांव का मामला. पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम में पता चला कि दम घुटने से किसान की मौत हुई है. हालांकि परिजनों ने दबंगों पर हत्या का आरोप लगाया है. पुलिस ने कहा कि इस आरोप की जांच की जा रही है.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: यह बहुत असाधारण समय है तो ऐसे में नागरिकता के कर्तव्य भी असाधारण होते हैं. ऐसे में हमारी सभ्यता का तकाज़ा है कि हम तरह-तरह से आवाज़ उठाएं, चुप न रहें. व्यापक जीवन, स्वतंत्रता-समता-न्याय के संवैधानिक मूल्यों, समरसता के पक्ष में और घृणा-हिंसा-हत्या-झूठ-अन्याय के विरुद्ध.
वीडियो: भाजपा राहुल गांधी के 'मोदी सरनेम' संबंधी बयान को इस तरह पेश कर रही है, जैसे दिखा सके कि वे 'पिछड़ा-विरोधी' हैं. भाजपा कहती है कि राहुल ने पूरे ओबीसी मोदी समुदाय का अपमान किया है, हालांकि यह उपनाम कई अन्य जातियां भी इस्तेमाल करती रही हैं. इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान का नज़रिया.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: राजनीति अपने आधिपत्य को फैलाने-बचाने के लिए हर दिन कोई नई तरक़ीब इस्तेमाल करती है, वैसे ही साहित्य को नवाचार में संलग्न होना चाहिए. यह कठिन है पर फिर सच्चा और ईमानदार साहित्य लिखना तो हमेशा ही कठिन रहा है. कठिनाई से निपटना साहित्य-धर्म है, उससे भागना नहीं.
वीडियो: कोविड-19 महामारी, अचानक देश में लगाए गए लॉकडाउन और इस दौरान हाशिये के वर्ग के लोगों के सामने पेश आई मुश्किलें निर्देशक अनुभव सिन्हा की नई फिल्म 'भीड़' का विषय हैं. इस बारे में उनसे और फिल्म की टीम से बातचीत.
विशेष: क्रांतिकारी सपने देखता है. वह उसे विचार व कर्म की आंच में पकाता है. वह शहीद होकर भी संघर्ष की पताका को गिरने नहीं देता. उसे अपने दूसरे साथी के हाथों में थमा देता है. शहीद भगत सिंह ने जिस आज़ाद भारत का सपना देखा था, पाश उसे अपनी कविता में विस्तार देते हैं.
अयोध्या का इतिहास अवध के नवाबों के बग़ैर पूरा नहीं होता. यहां तक कि उनकी बेगमों के बग़ैर भी नहीं. जिस अनूठी तहजीब के कंधों पर इन नवाबों की पालकियां ढोई जाती थीं, उसमें उनकी बेगमें कहीं ज़्यादा आन-बान व शान से मौजूद हैं.
वीडियो: आंखों देखी, दम लगा के हईशा और लाल सिंह चड्ढा जैसी फ़िल्मों के साथ-साथ पंचायत, मिर्ज़ापुर और ब्रीद: इनटू द शैडोज जैसी वेब-सीरीज़ में अभिनय कर चुके अभिनेता श्रीकांत वर्मा से उनके जीवन, रंगमंच, सिनेमा और ओटीटी पर उनके अनुभव और यात्रा के बारे में बातचीत.
कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: उर्दू कविता, अपने हासिल की वजह से भारतीय कविता का बेहद ज़रूरी और मूल्यवान हिस्सा रही है. वह इस तरह हिंदुस्तान का ज़िंदगीनामा है जिसने कभी राजनीति और अध्यात्म के पाखंड को पकड़ने में चूक नहीं की है. उसमें समय के प्रति जागरूकता है, तो उसका अतिक्रमण भी.
वीडियो: महाराष्ट्र में नवंबर 2022 से नफरती रैलियों का एक दौर चला. ये रैलियां सकल हिंदू समाज के द्वारा आयोजित की जाती हैं और इस दौरान कथित लव जिहाद और धर्मांतरण जैसे मुद्दे उठाए जाते हैं. महाराष्ट्र के 36 ज़िलों में ऐसी तक़रीबन 100 से ज़्यादा रैलियां पिछले 5-5 महीनो में देखने मिली है.
तमिलनाडु के अरियालुर ज़िले का मामला. पादरी ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि विहिप नेता मुथुवेल ने उनसे 25 लाख रुपये की मांग की थी. पादरी के अनुसार, ऐसा न करने पर मुथुवेल ने उन्हें स्कूली बच्चों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाकर बदनाम करने की धमकी दी थी.
डॉ. आंबेडकर ने संविधान के पहले मसौदे को संविधान सभा में पेश करते हुए कहा था कि 'नवजात प्रजातंत्र के लिए संभव है कि वह आवरण प्रजातंत्र का बनाए रखे, परंतु वास्तव में तानाशाही हो जाए.' जब मोदी की चुनावी जीत को लोकतंत्र, उनसे सवाल या मतभेद रखने वालों को लोकतंत्र का दुश्मन बताया जाता है, तब डॉ. आंबेडकर की चेतावनी सही साबित होती लगती है.