पैंडोरा पेपर्स नाम के अंतरराष्ट्रीय ख़ुलासे में सामने आया था कि सैकड़ों बड़े भारतीय नाम टैक्स से बचने के लिए संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, कुल संपत्तियों का खुलासा न करने में शामिल हैं. अब आयकर विभाग और इसकी नवगठित विदेशी संपत्ति जांच इकाई ने इसे लेकर कार्रवाई तेज़ कर दी है.
पैंडोरा पेपर्स में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ के एनआरआई बेटे बकुलनाथ का नाम सामने आया है. इसके अलावा अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर स्कैंडल के आरोपी राजीव सक्सेना का भी नाम इसमें शामिल है. प्रभावशाली व्यक्तियों की छिपाई गई संपत्ति का खुलासा करने वाले ‘पैंडोरा पेपर्स’ में भारत से उद्योगपति अनिल अंबानी, हीरा व्यापारी नीरव मोदी, क्रिकेटर और भारत रत्न सचिन तेंदुलकर आदि के नाम शामिल हैं.
दुनिया भर के प्रभावशाली व्यक्तियों की छिपाई गई संपत्ति का ख़ुलासा करने वाले ‘पैंडोरा पेपर्स’ में 300 से अधिक भारतीयों के नाम हैं. सीबीडीटी ने एक बयान में कहा कि सरकार ने इस रिपोर्ट का संज्ञान लिया है. संबंधित जांच एजेंसियां इन मामलों की पड़ताल करेंगी और क़ानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी
पैंडोरा पेपर्स नामक अंतरराष्ट्रीय ख़ुलासे में बताया गया है कि सैकड़ों बड़े भारतीय नाम टैक्स से बचने के लिए अपनी संपत्तियों को टैक्स हैवेंस में छिपाने, ऑफशोर कंपनियां खोलने, कुल संपत्तियों का खुलासा न करने में शामिल हैं. इस सूची में कारोबारी अनिल अंबानी, हीरा व्यापारी नीरव मोदी, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, अभिनेता जैकी श्रॉफ, बायोकॉन की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ, दिवंगत कांग्रेस नेता सतीश शर्मा जैसे लोगों के नाम शामिल हैं.
इन गुप्त खातों के लाभार्थियों के रूप में पहचाने गए नेताओं में जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिस, केन्या के राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा, इक्वाडोर के राष्ट्रपति गुइलेर्मो लासो, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल हैं.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस ने एक आरटीआई आवेदन के जवाब में बताया है कि पनामा पेपर्स खुलासे के बाद से 46 मामले दायर किए गए और आरोपियों से 142 करोड़ रुपये का कर वसूला जा चुका है. ‘पनामा पेपर्स’ नामक जांच के तहत भारत समेत दुनियाभर के धनकुबेरों एवं ताक़तवर लोगों की छिपाई गई संपत्ति का खुलासा किया गया था, जिन्होंने टैक्स बचाने के लिए ग्लोबल टैक्स हैवेंस कहे जाने वाले देशों की ऑफशोर कंपनियों में अपने पैसों को
इससे पहले जून महीने में भारतीय राजस्व सेवा के 27 वरिष्ठ अधिकारियों को भ्रष्टाचार और विभिन्न आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दे दी गई थी. इनमें से 12 अधिकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से थे.