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कांग्रेस टूलकिट मामला: कोर्ट का जांच कराने की याचिका सुनने से इनकार, कहा- नहीं पसंद तो न देखें

सुप्रीम कोर्ट से एक याचिका में कोविड महामारी से निपटने के तौर तरीकों को लेकर कथित तौर पर देश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल करने के लिए बनाए टूलकिट की जांच का अनुरोध किया गया था. अदालत ने कहा कि यह राजनीतिक दुष्प्रचार का हिस्सा है और यदि आप इसे पसंद नहीं करते हैं, तो नज़रअंदाज़ करें.

टूलकिट मामला: ‘मैनिपुलेटेड’ टैग पर ट्विटर इंडिया के एमडी से दिल्ली पुलिस ने की थी पूछताछ

बीते महीने ट्विटर ने भाजपा नेता संबित पात्रा के एक ट्वीट पर ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ का टैग लगा दिया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी से निपटने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के लिए एक ‘टूलकिट’ बनाया है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने ट्विटर के दिल्ली और गुड़गांव स्थित दफ़्तरों पर छापा मारा था. उस वक़्त सरकार पर ट्विटर को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे.

छ्त्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ टूलकिट मामले की जांच पर रोक लगाई

पिछले महीने भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था. इस पर कांग्रेस ने भाजपा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ में रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

किसान आंदोलन: सरकार के आग्रह पर पंजाबी गायक ज़ैजी-बी सहित तीन अन्य के ट्विटर अकाउंट पर रोक

लुमेन डेटाबेस से मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने छह जून को चार ट्विटर अकाउंट पर कार्रवाई करने के लिए कंपनी से कानूनी अनुरोध किया था, इनमें जैज़ी बी के अलावा हिप-हॉप कलाकार एल-फ्रेश द लॉयन का अकाउंट भी शामिल था. ये लोग कृषि कानूनों के विरोध में डटे किसानों का समर्थन कर रहे थे.

कोविड-19: ये बताने की कोशिश जारी है कि लोगों ने जो त्रासदी झेली उसमें सरकार का कोई दोष नहीं

वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के माध्यम से ये बताया जा रहा है कि ये वैश्विक महामारी है और हर देश प्रभावित है, इसलिए मोदी जी बेचारे क्या कर सकते हैं. इस नरेटिव से सरकार की नाकामी पर पर्दा डालने का प्रयास जारी है, जबकि सच्चाई यह है कि दुनिया में कोविड के दूसरे लहर का सबसे ज़्यादा असर भारत पर ही पड़ा है. जिस देश का जन स्वास्थ्य तंत्र सुदृढ़ है, वहां इसका असर अपेक्षाकृत कम हुआ.

ट्विटर का केंद्र पर डराने-धमकाने का आरोप, सरकार ने कहा- बयान आधारहीन और देश की छवि बिगाड़ने वाला

ट्विटर ने दिल्ली पुलिस के ‘टूलकिट’ जांच मामले में उसके दफ़्तरों में आने को ‘डराने-धमकाने की चाल’ बताया था. इसे लेकर मोदी सरकार ने कहा है कि ट्विटर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र पर अपनी शर्तें थोपने का प्रयास कर रहा है. वहीं दिल्ली पुलिस ने कंपनी के बयान को सच्चाई से परे बताया है.

टूलकिट विवाद: भाजपा नेताओं के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड’ बताने पर ट्विटर के दफ़्तरों पर छापा

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की दो टीमें राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके दिल्ली के लाडो सराय और गुड़गांव में स्थित ट्विटर इंडिया कार्यालयों में गई थीं. स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि ट्विटर के पास टूलकिट के बारे में क्या जानकारी है और उसने कांग्रेस के कथित टूलकिट से संबंधित भाजपा के मुख्य प्रवक्ता संबित पात्रा के एक ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की श्रेणी का टैग देना क्यों चुना.

‘कांग्रेस टूलकिट’ मामले में भाजपा नेताओं रमन सिंह और संबित पात्रा के ख़िलाफ़ केस दर्ज

बीते भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि इस संकट काल में विपक्षी दल की ‘गिद्धों की राजनीति’ उजागर हुई है. इस पर कांग्रेस ने भाजपा पर महामारी के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने एवं लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाया था.

केंद्र ने ट्विटर से संबित पात्रा के ‘कांग्रेस टूलकिट’ ट्वीट से ‘मैनिपुलेटेड’ टैग हटाने को कहा

बीते साल ट्रंप प्रशासन द्वारा ट्विटर के ख़िलाफ़ इस्तेमाल की गई धमकाने वाली समान भाषा में केंद्र सरकार ने कहा कि अगर ट्विटर आधिकारिक मांगों को नहीं मानता है तो एक ‘मध्यस्थ’ के बतौर उसकी क़ानूनी स्थिति पर सवाल उठ सकता है. सरकार ने यह भी कहा कि ट्विटर ने एकतरफा तरीके से मामले में निष्कर्ष निकाल कर भाजपा नेता के ट्वीट को ‘मैनिपुलेटेड मीडिया’ की श्रेणी में डाल दिया.

‘कांग्रेस टूलकिट’ संबंधी संबित के ट्वीट को ट्विटर ने ‘तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’ क़रार दिया

बीते 18 मई को एक कथित टूलकिट के माध्यम से भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया था. कांग्रेस ने इस टूलकिट को फ़र्ज़ी बताते हुए ट्विटर से कहा था कि वह भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी समेत कई भाजपा नेताओं के अकाउंट स्थायी रूप से निलंबित कर दे. कांग्रेस ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

किसान आंदोलन टूलकिट मामला: कोर्ट ने जवाब दाख़िल नहीं करने पर केंद्र को लगाई फटकार

किसान आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर जारी एक टूलकिट में संलिप्तता के आरोप में बीते 13 फरवरी को पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ़्तार किया गया था. अदालत ने बीते 17 मार्च को दिशा रवि की याचिका पर जवाब दाख़िल करने के लिए केंद्र सरकार को आख़िरी मौका दिया था. आरोप है कि किसान आंदोलन का पूरा घटनाक्रम टूलकिट में बताई गई कथित योजना से मिलता-जुलता है.

कांग्रेस ने ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ को लेकर नड्डा समेत कई भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई

भाजपा ने कांग्रेस पर कोरोना महामारी के दौरान देशवासियों में भ्रम फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस संकट काल में विपक्षी दल की ‘गिद्धों की राजनीति’ उजागर हुई है. वहीं कांग्रेस ने भाजपा पर कोरोना महामारी के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि बचाने एवं लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ‘फ़र्ज़ी टूलकिट’ तैयार करने का आरोप लगाया है.

मेरे काम को अदालत ने नहीं, टीआरपी चाहने वालों ने दोषी ठहराया: दिशा रवि

टूलकिट मामले में गिरफ़्तार हुईं जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि ने रिहाई के बाद पहली बार जारी बयान में कहा कि विचार मरते नहीं हैं. कितना ही समय क्यों न लगे सच सामने आ ही जाता है.

टूलकिट मामला: दिशा रवि का ज़मानत आदेश दिल्ली पुलिस के दावों की अर्थहीनता का प्रमाण है

किसान आंदोलन संबंधी टूलकिट साझा करने के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा राजद्रोह क़ानून के तहत गिरफ़्तार युवा कार्यकर्ता दिशा रवि को ज़मानत देते हुए दिल्ली की अदालत ने कई कड़ी टिप्पणियां की हैं. अदालत ने यहां तक कहा कि सरकारों के ग़ुरूर पर लगी ठेस के लिए किसी पर राजद्रोह का आरोप नहीं लगाया जा सकता.

दिल्ली: टूलकिट मामले में युवा कार्यकर्ता दिशा रवि को ज़मानत मिली

किसानों के प्रदर्शन संबंधी टूलकिट साझा करने के मामले में गिरफ़्तार दिशा रवि को ज़मानत देते हुए दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि मामले की अधूरी और अस्पष्ट जांच को देखते हुए कोई ठोस कारण नहीं है कि बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड की किसी 22 साल की लड़की के लिए ज़मानत के नियम को तोड़ा जाए.