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ऑनलाइन सट्टेबाज़ी साइट का विज्ञापन दिखाने से बचें न्यूज़ वेबसाइट व टीवी चैनल: केंद्र

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी परामर्श में कहा कि समाचार वेबसाइट, ओटीटी प्लेटफॉर्म और निजी टीवी चैनल ऑनलाइन सट्टेबाजी साइट का विज्ञापन दिखाने से दूर रहें. अन्यथा लागू कानूनों के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.

हेट स्पीच पर मोदी सरकार चुप है क्योंकि वही इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी है

सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच की बात करके देश की दुखती नब्ज़ पर हाथ रखा है, लेकिन जहां तक उसके ‘केंद्र के मूकदर्शक बने बैठने’ वाले सवाल की बात है, तो यह पूछने वाले को भी पता है और देश भी जानता है कि ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि सरकार व उसे चला रही पार्टी ही हेट स्पीच की सबसे बड़ी लाभार्थी हैं.

टीवी और सोशल मीडिया पर हेट स्पीच से निपटने के लिए संस्थागत प्रणाली लाने की ज़रूरत: कोर्ट

विभिन्न टीवी चैनलों पर नफ़रत फैलाने वाले भाषणों को लेकर नाराज़गी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि उसे ‘मूक दर्शक’ बने रहने की बजाय इस समस्या से निपटने के बारे में सोचना चाहिए.

मुख्यधारा के मीडिया को सबसे बड़ा ख़तरा डिजिटल मंच से नहीं, बल्कि ख़ुद से है: अनुराग ठाकुर

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने एशिया-पैसिफिक इंस्टिट्यूट फॉर ब्रॉडकास्टिंग डेवलपमेंट’ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि अगर न्यूज़ चैनल ऐसे मेहमानों को आमंत्रित करते हैं, जो ध्रुवीकरण कर रहे हैं, झूठी ख़बरें फैलाते हैं और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हैं, तो चैनल की विश्वसनीयता कम हो जाती है.

टीवी की ज़हरीली बहसें महज़ लक्षण हैं, राजनीति और समाज को खा रही बीमारी तो कहीं और है

बीते दिनों केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री ने कई प्राइम टाइम टीवी एंकरों और बड़े चैनलों के संपादकों को यह चर्चा करने के लिए बुलाया कि क्या समाचार चैनलों पर सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने वाली बहसों को कम किया जा सकता है. मंत्री जी स्पष्ट तौर पर ग़लत जगह इलाज का नुस्ख़ा आज़मा रहे हैं, जबकि असल रोग उनकी नाक के नीचे ही है.

पैगंबर बयान विवाद: टीवी चैनल सतर्क रहे होते तो शर्मिंदगी से बचा जा सकता था- एडिटर्स गिल्ड

भाजपा की अपदस्थ प्रवक्ता नूपुर शर्मा के एक टीवी चैनल की बहस में पैगंबर मोहम्मद पर दिए गए बयान को लेकर कानपुर में हुई हिंसा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई आलोचना को लेकर एडिटर्स गिल्ड ने प्रसारकों से कड़ी सतर्कता बरतने का आह्वान करते हुए कहा कि वे ठहरकर सोचें कि कैसे जानबूझकर विभाजनकारी हालात तैयार किए जा रहे हैं.

न्यूज़ नेशन व ज़ी को फटकार, एनबीडीएसए ने कहा- बहस में निष्पक्ष न होने पर एंकर्स पर कार्रवाई हो

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने न्यूज़ नेशन के ‘धर्मांतरण जिहाद’ पर किए गए शो और ज़ी न्यूज़ पर कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप के सदस्यों को ‘चालाक और गैंग’ कहने वाले प्रोग्राम को लेकर फटकार लगाई और इन कार्यक्रमों को चैनल की वेबसाइट, यूट्यूब व अन्य प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है.

दो विभागों ने सरकार से कहा था कि आईटी नियम डिजिटल कंटेंट विनियमन की अनुमति नहीं देते: रिपोर्ट

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने आधिकारिक दस्तावेज़ों में कहा है कि भारत में कोई विशिष्ट कानून नहीं है, जो केंद्र सरकार को ऑनलाइन सामग्री को विनियमित करने का अधिकार देता है. फ़िर भी सरकार नियमों के साथ छेड़छाड़ करने का विकल्प चुनते हुए नए आईटी क़ानून लेकर आई.

नए आईटी नियमों को अभिव्यक्ति की आज़ादी के ख़िलाफ़ बताते हुए कोर्ट पहुंचे मीडिया घराने

बड़े मीडिया घरानों के संगठन ने नए मीडिया नियमों को ‘अस्पष्ट और मनमाना’ क़रार देते हुए ठीक ही किया है, पर इसे यह भी समझना चाहिए कि परंपरागत मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्मों और हालिया समय में आए डिजिटल समाचार मंचों के बीच अंतर करने की कोशिशें भी बचाव योग्य नहीं हैं.

आईटी नियमों के विरोध में 13 मीडिया संगठन और पत्रकार मद्रास हाईकोर्ट पहुंचे, केंद्र को नोटिस

मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस सेंथीलकुमार राममूर्ति की पीठ ने डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन और पत्रकार मुकुंद पद्मनाभन की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. इसके साथ ही संगीतकार टीएम कृष्णा की लंबित याचिका में भी इन नियमों का चुनौती दी गई है.

केंद्र का मुख्यधारा के मीडिया को नये आईटी नियमों से छूट देने से इनकार, कहा- इसे लागू करें

बीते दिनों नेशनल ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने मुख्यधारा के टीवी मीडिया और इसके डिजिटल मंचों को नये आईटी नियमों से बाहर रखने की मांग की थी. इस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है कि नियमों से कुछ को छूट देना उन डिजिटल समाचार प्रकाशकों के साथ भेदभाव होगा, जिनके पास पहले से टीवी या प्रिंट मंच नहीं है.

डिजिटल मीडिया पर सरकार का हमला नरेंद्र मोदी के डर को दिखाता है

दिग्गज सोशल मीडिया मंचों और ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया के साथ नये नियमों को लेकर विवादास्पद बहस ऐसे मौके पर हो रही है जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर सामने आई अब तक की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. ऐसे में आलोचनाओं के दमन में लगी सरकार ने टेक कंपनियों से दो-दो हाथ कर खु़ुद को अपने ही बुने चक्रव्यूह में फंसा लिया है.

समाचार प्रसारकों ने नए आईटी नियमों में सरकार से छूट की मांग की

न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे एक पत्र में कहा है कि यदि आईटी नियम, 2021 लागू होते हैं, तो इससे न केवल समाचार चैनलों या प्रसारकों का उत्पीड़न होगा, बल्कि उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का दमन और उल्लंघन भी होगा तथा इससे निष्पक्ष तरीके से समाचार रिपोर्टिंग भी बाधित होगी.

अदालत ने टीवी चैनलों पर भड़काऊ कार्यक्रमों पर रोक के लिए कुछ न करने पर सरकार को फटकारा

उच्चतम न्यायालय ने उन टीवी कार्यक्रमों पर लगाम लगाने में असफल रहने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई हैए जिनके असर भड़काने वाले होते हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसी ख़बरों पर नियंत्रण उसी प्रकार से ज़रूरी हैं, जैसे क़ानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए ऐहतियाती उपाय.

मीडिया बोल: किसान आंदोलन के ख़िलाफ़ क्यों जुटे हैं टीवी चैनल

वीडियो: किसानों और उनके आंदोलन के ख़िलाफ़ सिर्फ सरकारी एजेंसियां ही अभियान नहीं चला रही हैं, टीवी चैनलों के ज़रिये उनकी छवि बिगाड़ने और देश विरोधी बताने के लिए झूठी कहानियां चलाई जा रही हैं. इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी. सिंह और पंजाब के स्वतंत्र पत्रकार शिव इंदर सिंह से उर्मिलेश की बातचीत.