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एलआईसी का आईपीओ खुला, कांग्रेस ने शेयर भाव और मूल्यांकन को लेकर सवाल उठाए

खुदरा व संस्थागत निवेशकों के लिए एलआईसी के आईपीओ को खोलते हुए सरकार का लक्ष्य अपने 3.5% शेयर बेचकर 21,000 करोड़ रुपये जुटाना है. वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने ऑफरिंग का मूल्य काफी कम रखा है और इसे 30 करोड़ पॉलिसीधारकों के भरोसे की कीमत पर औने-पौने दाम पर बेचा जा रहा है.

एलआईसी को बेचने की जल्दी में क्यों है केंद्र सरकार

वैश्विक बाजार स्थिति के चलते जहां कई अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है, वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम के साथ ऐसा नहीं हुआ है. क्या आम भारतीयों के लिए प्रमुख बचत का ज़रिया रहे एलआईसी को इस तरह आनन-फानन बेचा जाना चाहिए?

केंद्र सरकार ने एनजीओ सीएचआरआई, एएडब्ल्यूडब्ल्यू का एफसीआरए लाइसेंस रद्द किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दो ग़ैर सरकारी संगठनों- ‘कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनीशिएटिव’ और ‘अपने आप विमेन वर्ल्डवाइड’ का एफसीआरए लाइसेंस रद्द करते हुए दावा किया है कि उन्होंने क़ानून का उल्लंघन किया है और विदेशी चंदे के रूप में प्राप्त धन की कथित तौर पर हेराफेरी की.

कम से कम 80 फ़ीसदी ज़िलों में मनरेगा लोकपाल नहीं नियुक्त करने पर राज्य नहीं पाएंगे राशि

बीते दिनों मनरेगा के लिए लोकपाल ऐप लॉन्च करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने विभिन्न ज़िलों में लोकपालों की नियुक्ति नहीं होने पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि यह देखा गया है कि कई जगहों पर राजनीतिक दलों से संबंधित व्यक्तियों की नियुक्ति की गई है.

मनरेगा के तहत 3,360 करोड़ रुपये का भुगतान लंबितः केंद्र सरकार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट में 2022-2023 के लिए मनरेगा के लिए 73,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं. यह मौजूदा वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमान से 25.51 फीसदी कम है.

केंद्र ने पर्यावरण और बाल अधिकारों पर काम कर रहे 10 एनजीओ की फंडिंग रोकीः रिपोर्ट

भारतीय रिज़र्व बैंक के इस साल जुलाई के नोटिस में कहा गया है कि विदेशी एनजीओ को विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम, 2010 की पूर्व संदर्भ श्रेणी (पीआरसी) में रखा गया है. इसका अर्थ है कि जब कोई विदेशी दानकर्ता भारत में प्राप्तकर्ता एसोसिएशन को राशि भेजेगा, तब इसके लिए उसे केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूर्व में मंज़ूरी लेनी होगी.

उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त मदरसा शिक्षकों को चार सालों से नहीं मिल रहा वेतन

केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में नियुक्त किए गए 21,000 से अधिक मदरसा शिक्षकों को चार साल से अधिक समय से वेतन नहीं मिला है. ग्रेजुएट शिक्षकों को प्रति महीने 6,000 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षकों को प्रति माह 12,000 रुपये का मानदेय दिया जाता है.

‘देश ख़तरे में है’ का हौवा स्वतंत्र विचारधारा वालों को प्रताड़ित करने का बहाना है

देश में 2017 से 2019 के बीच राष्ट्र विरुद्ध अपराधों के आरोप में प्रति वर्ष औसतन 8,533 मामले दर्ज किए गए. दुनिया का कोई देश अपने ही नागरिकों पर उसे नुकसान पहुंचाने के इतने केस दर्ज नहीं करता. अगर ये सब केस सच हैं तो दो बातें हो सकती हैं- या तो देश में असल में इतने गद्दार हैं, या देश के निर्माण में ही कोई मूलभूत गड़बड़ी है.