Unlawful Activities (Prevention) Act

उमर ख़ालिद ने जेल से रोज़ाना फोन करने की सुविधा देने के लिए अदालत का रुख़ किया

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद के आवेदन पर नोटिस जारी कर तिहाड़ जेल के अधीक्षक से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी. उमर उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगा मामले में सितंबर 2020 से जेल में बंद हैं.

छत्तीसगढ़: कार्यकर्ता हिड़मे मरकाम जेल से रिहा, पुलिस आतंकवाद के आरोप साबित नहीं कर सकी

छत्तीसगढ़ की जानी-मानी वन अधिकार और क़ैदी अधिकार कार्यकर्ता हिड़मे मरकाम को 9 मार्च 2021 को दंतेवाड़ा में एक सभा के दौरान गिरफ़्तार कर लिया गया था. उन पर हिंसक नक्सली हमलों और हत्या जैसे पांच मामले दर्ज किए गए थे. करीब दो साल की क़ैद के बाद वे रिहा हुई हैं. अब तक वे चार मामलों में बरी हो चुकी हैं, जबकि एक मामला लंबित है.

कश्मीरी पत्रकार को ज़मानत, कोर्ट ने कहा- साक्ष्य नहीं, एनआईए ने अटकलों के आधार पर आरोपी बनाया

अक्टूबर 2021 में श्रीनगर के फोटो जनर्लिस्ट मोहम्मद मनन डार को एनआईए ने आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार किया था. दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें ज़मानत देते हुए कहा कि आतंकी गतिविधियों का मामला बनाने के लिए कुछ पोस्टर, बैनर या अन्य आपत्तिजनक सामग्री का होना पर्याप्त नहीं है. 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ज़मानत दी

अक्टूबर 2020 में हाथरस बलात्कार मामले की कवरेज के लिए जाते समय यूपी पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए गए केरल के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को सुप्रीम कोर्ट ने बीते सितंबर में यूएपीए मामले में ज़मानत दे दी थी. हालांकि, उनके ख़िलाफ़ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले के कारण उन्हें रिहा नहीं किया गया था. 

दिल्ली दंगा केस: उमर ख़ालिद को सात दिन की अंतरिम ज़मानत मिली

दिल्ली दंगों संबंधी मामले में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार उमर ख़ालिद ने अपनी बहन की शादी के मद्देनज़र दो सप्ताह की अंतरिम ज़मानत मांगी थी. अदालत ने उन्हें 23 से 30 दिसंबर की अवधि के लिए ज़मानत देते हुए कहा कि वे इसके विस्तार की मांग न करें.

यूपी की अदालत ने पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और 6 अन्य के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय किए

पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन और तीन अन्य लोगों को 5 अक्टूबर, 2020 को हाथरस में एक युवती की कथित रूप से सामूहिक बलात्कार के बाद हुई हत्या के मामले की कवरेज के लिए जाते वक्त  गिरफ्तार किया गया था. ईडी ने फरवरी, 2021 में कप्पन के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था. 

दिल्ली दंगा: कोर्ट ने उमर और सैफ़ी को बड़ी साज़िश के आरोपों के कारण एक मामले में बरी किया था

उत्तर-पूर्व दिल्ली में साल 2020 के दंगों से जुड़े एक मामले में दिल्ली की एक अदालत ने बीते तीन दिसंबर को कार्यकर्ता उमर ख़ालिद और ख़ालिद सैफ़ी को आरोपमुक्त कर दिया था.

दिल्ली दंगा: अदालत ने उमर ख़ालिद और ख़ालिद सैफ़ी को पथराव मामले में आरोपमुक्त किया

मामले में बरी किए जाने के बावजूद कार्यकर्ता उमर ख़ालिद और ख़ालिद सैफ़ी जेल में अभी रहेंगे, क्योंकि उन पर दंगों से संबंधित एक अन्य मामले में ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं. दोनों दो साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं. उमर को सितंबर 2020 और सैफ़ी को फरवरी 2020 में गिरफ़्तार किया गया था.

दिल्ली पुलिस ने उमर ख़ालिद की अंतरिम ज़मानत याचिका का विरोध किया

दिल्ली दंगों संबंधी मामले में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार उमर ख़ालिद ने अपनी बहन की शादी के मद्देनज़र दो सप्ताह की अंतरिम ज़मानत के लिए दिल्ली की एक अदालत में अर्ज़ी दायर की है. पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि उनकी रिहाई से ‘समाज में अशांति’ पैदा हो सकती है.

2005 से यूएपीए के कुल 83 मामलों में से 40 में नब्बे दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल की: दिल्ली पुलिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने अक्टूबर में दिल्ली पुलिस को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज उन मामलों की संख्या बताने को कहा था, जिनमें उसने 90 दिनों की निर्धारित समयसीमा के भीतर आरोपपत्र दाखिल किए थे.

यूएपीए के तहत 9 साल से आरोपी जेल में बंद, कोर्ट का 75 दिन में ज़मानत याचिका निपटाने का आदेश

याचिकाकर्ता मंज़र इमाम को 1 अक्टूबर 2013 को इंडियन मुजाहिदीन से संबंध रखने के आरोप में एनआईए ने गिरफ़्तार कर लिया था, वे तब से जेल में हैं और अब तक उन पर आरोप भी तय नहीं हुए हैं.

अब कोर्ट को संकोच छोड़कर कह देना चाहिए कि उमर का जुर्म सिर्फ़ उनका नाम उमर ख़ालिद होना है

भारत में अदालतों में न्याय अब अपवाद बनता जा रहा है. ख़ासकर जब न्याय मांगने वाले मुसलमान हों या मोदी सरकार के आलोचक या विरोधी हों.

दिल्ली दंगे: गृह मंत्रालय द्वारा अतिरिक्त बलों की तैनाती में देरी से हिंसा और भड़की- रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के पूर्व जज वाली फैक्ट-फाइंडिंग समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गृह मंत्रालय की लापरवाह प्रतिक्रिया, हिंसा में दिल्ली पुलिस की मिलीभगत, मीडिया की विभाजनकारी रिपोर्टिंग और सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ भाजपा का घृणा अभियान दिल्ली दंगों के लिए ज़िम्मेदार थे.

पीएफआई पर पाबंदी न्यायोचित है या नहीं, इस पर निर्णय के लिए केंद्र ने अधिकरण गठित किया

केंद्र सरकार पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर यूएपीए के तहत पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाया है. यूएपीए के तहत एक बार किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने के बाद केंद्र सरकार द्वारा 30 दिनों के भीतर यह देखने के लिए एक न्यायाधिकरण गठन किया जाता है कि संगठन को ग़ैर क़ानूनी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं.

एनआईए द्वारा यूएपीए संबंधी 80 फीसदी मामले मोदी सरकार के दौरान दर्ज हुए: रिपोर्ट

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज़ का एक अध्ययन बताता है कि वर्ष 2009 से 2022 के बीच एनआईए ने यूएपीए के कुल 357 मामले दर्ज किए. इनमें से 238 मामलों की जांच में पाया गया कि 36 फीसदी में आतंकवाद की कुछ घटनाएं हुई थीं, पर 64 फीसदी मामलों में ऐसी कोई विशेष घटना नहीं हुई जिनमें हथियार शामिल थे.