violence

भोपाल में ईद के मौके पर एक परिवार. (फोटो: पीटीआई)

त्योहारों की साझा संस्कृति और साझा ऐतिहासिक चेतना आज कहां है

क्या हम पहले के मुकाबले भावनात्मक रूप से अधिक असुरक्षित हो गए हैं? क्या हमारा भाव जगत पहले की तुलना में कहीं संकुचित हो गया है? किसी भी अन्य समुदाय के त्योहार में साझेदारी करने में अक्षम या उस दिन को हथिया लेने की जुगत लगाते हुए क्या हम हीन भावना के शिकार होते जा रहे हैं?

भाजपा द्वारा पत्रकार अभ्रो बनर्जी को मृत पार्टी कार्यकर्ता मानिक मोइत्रो बताने वाले वीडियो का स्क्रीनशॉट. (फोटो: फेसबुक)

बंगाल: भाजपा ने पत्रकार की फोटो को हिंसा में मृत पार्टी कार्यकर्ता बताया, आपत्ति के बाद दी सफाई

भाजपा ने इंडिया टुडे के पत्रकार अभ्रो बनर्जी के फोटो का इस्तेमाल करते हुए दावा किया वह पश्चिम बंगाल के सीतलकुची में मारे गए उनके पार्टी कार्यकर्ता मानिक मोइत्रा हैं. बाद में भाजपा ने अपनी सफाई में कहा कि पत्रकार की तस्वीर गलती से वीडियो में शामिल हो गई.

West Bengal

बंगाल की हिंसा सांप्रदायिक नहीं है, लेकिन हिंसा है

वीडियो: भाजपा नेताओं और उनके सेलिब्रिटी समर्थकों द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की हिंसा को ‘सांप्रदायिक’ के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शेष भारत के हिंदुओं को डराना और सांप्रदायिक बनाना है. द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और प्रो. अपूर्वानंद की बातचीत.

जॉर्ड फ्लॉयड की तस्वीर लेकर उनकी हत्या के खिलाफ विरोध प्रदर्शन. (फोटो: रॉयटर्स)

जॉर्ज फ्लॉयड हत्या के मामले पुलिसकर्मी डेरेक चॉविन दोषी क़रार

पिछले साल 25 मई को अमेरिका के मिनियापोलिस में अश्वेत अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड की मौत उनके गले को श्वेत पुलिस अधिकारी डेरेक चॉविन द्वारा तक़रीबन नौ मिनट तक घुटने से दबाने के कारण मौत हो गई थी. इस दौरान फ्लॉयड बार-बार कहते रहे थे कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है, लेकिन पुलिसकर्मी नहीं माना. फ्लॉयड की निर्मम मौत से देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे.

(प्रतीकात्मक फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट)

मुस्लिमों के उत्पीड़न की वजह अब ध्रुवीकरण नहीं, उन्हें अपमानित ज़िंदगी जीने के लिए मजबूर करना है

देश के नेता विगत कोई बीस सालों के अथक प्रयास से समाज का इतना ध्रुवीकरण पहले ही कर चुके हैं कि आने वाले अनेक वर्षों तक उनकी चुनावी जीत सुनिश्चित है. फिर कुछ लोग अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और उन्हें अपमानित करने के लिए जोशो-ख़रोश से क्यों जुटे हुए हैं?

(फोटो: पीटीआई)

बंगाल चुनाव: हिंसा के बाद चुनाव आयोग ने नेताओं के कूच बिहार जाने पर लगाया प्रतिबंध

बीते शनिवार को चौथे चरण के मतदान के दौरान कूच बिहार ज़िले के एक मतदान केंद्र के बाहर स्थानीय लोगों के कथित हमले के बाद सुरक्षाबलों के की फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोलीबारी की घटना को ‘नरसंहार’ क़रार देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने 72 घंटे के लिए नेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर तथ्यों को दबाना चाहता है.

Rohtas: Students during a protest over closure of coaching institutions, at Sasaram in Rohtas district, Monday, April 5, 2021. (PTI Photo)(PTI04 05 2021 000100B)

बिहारः शैक्षणिक संस्थान बंद कराने के आदेश के ख़िलाफ़ छात्रों ने जमकर किया उपद्रव

बिहार के रोहतास ज़िले के सासाराम का मामला. सरकार ने राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शैक्षणिक संस्थानों को बंद कराने के आदेश दिए थे. इसके विरोध में छात्रों ने सार्वजनिक संपत्ति नष्ट की, अधिकारियों पर पथराव किया और कलक्ट्रेट गेट में आग लगा दी. छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों का कहना है कि सरकार जब मॉल और सिनेमा हॉल नहीं बंद करा रही है तो केवल कोचिंग ही क्‍यों बंद कराया जा रहा है.

न​रसिंहानंद सरस्वती. (फोटो: फेसबुक)

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने डासना मंदिर के पुजारी की गिरफ़्तारी की मांग की

इससे पहले धार्मिक नेता और ग़ाज़ियाबाद के डासना देवी मंदिर के प्रमुख पुजारी नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को कथित तौर पर आहत करने के लिए राजधानी दिल्ली में आप विधायक और दिल्ली वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्ला ख़ान द्वारा बीते तीन अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

न​रसिंहानंद सरस्वती. (फोटो: फेसबुक)

धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में डासना मंदिर के पुजारी के ख़िलाफ़ केस दर्ज

आप विधायक अमानतुल्ला ख़ान ने हिंदुत्वादी नेता और ग़ाज़ियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के पुजारी नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ पैंगबर मुहम्मद और मुस्लिमों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में शिकायत दर्ज कराई है. नरसिंहानंद पिछले महीने तब चर्चा में आए थे, जब डासना मंदिर में पानी पीने के चलते 14 वर्षीय एक मुस्लिम लड़के की बर्बर पिटाई की गई थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना. (फोटो साभार: पीआईबी)

टीएमसी ने चुनाव आयोग से की शिकायत, कहा- मोदी की बांग्लादेश यात्रा चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन

टीएमसी का आरोप है कि प्रधानमंत्री की दो दिवसीय यात्रा का बांग्लादेश की आज़ादी के 50 वर्ष पूरे होने या ‘बंगबंधु’ के जयंती समारोहों में शामिल होने से कोई लेना-देना नहीं था. इसके बजाय उनका एकमात्र मक़सद पश्चिम बंगाल में चल रहे चुनावों में कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान को प्रभावित करने का था.

बांग्लादेश में नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान हुए प्रदर्शन. (फोटो साभार: bdnews24.com)

मोदी की राजनीति के ख़िलाफ़ गुस्से का निशाना बांग्लादेश के हिंदुओं को क्यों बनाया जा रहा है

एक देश में अल्पसंख्यकों पर हमले के विरोध के दौरान जब उसी देश के अल्पसंख्यकों पर हमला होने लगे तो शक़ होता है कि यह वास्तव में किसी नाइंसाफी के ख़िलाफ़ या बराबरी जैसे किसी उसूल की बहाली के लिए नहीं है, बल्कि इसके पीछे भी एक बहुसंख्यकवादी द्वेष ही है.

(फोटो साभार: फेसबुक/alanizart)

भगत सिंह की हंसी के वारिस

भगत सिंह की पवित्र भूमि, उनका स्वर्ग भारत आज उन्हीं की परिभाषा के मुताबिक नर्क बना दिया गया है. उसे नर्क बना देने वाली ताकतें ही भारत की मालिक बन बैठी हैं. भगत के धर्म को मानने वाले क़ैद में हैं, उन्हीं की तरह. और भगत सिंह की तरह ही उनसे उनकी हंसी छीनी नहीं जा सकी है.

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‘अगर मुझे पढ़ना आता तो मैं मंदिर में कभी नहीं जाता’

वीडियो: उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद स्थित शिव शक्ति धाम डासना मंदिर में एक मुस्लिम लड़के को पानी पीने के लिए बर्बरतापूर्वक पीटा गया. हिंसा की इस घटना को लेकर पीड़ित परिवार से बातचीत.

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क्या हिंदुओं को हिंसक बनाया जा रहा है?

वीडियो: उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद स्थित शिव शक्ति धाम डासना मंदिर में एक मुस्लिम लड़का पानी पीने के लिए बर्बरतापूर्वक पीटा गया. डासना में हुई घटना नफ़रत की एक मानसिकता को दर्शाती है. यह मानसिकता क्यों पनपती है? इसके पीछे क्या वजह है? इन मुद्दों को समझने के लिए स्वतंत्र पत्रकार अलीशान जाफ़री से दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद की बातचीत.

डासना के मंदिर में नाबालिग मुस्लिम लड़के की बर्बर पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. (साभार: वीडियोग्रैब)

हिंसा, क्रूरता कितनी भी नियमित हो जाए, उसे सामान्य मानने से इनकार करने की मानवीयता बची रहती है

डासना की घटना से मालूम होता है कि जो हिंसा का निशाना बनाया गया है, पुलिस उसके साथ खड़ी हो सकती है. जिसने हिंसा की, पुलिस उसे खोजकर उसके साथ इंसाफ की प्रक्रिया शुरू कर सकती है. इंसानियत के बचे रहने की उम्मीद क़ानून या संविधान के बोध के जीवित और सक्रिय रहने पर ही निर्भर है.