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पूरे देश में लागू होगा एनआरसी, किसी धर्म के किसी व्यक्ति को डरने की जरूरत नहीं: अमित शाह

असम सरकार के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने गृहमंत्री अमित शाह से असम में की गई एनआरसी को खारिज करने का अनुरोध किया है.

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाएगा. इस दौरान उन्होंने दावा किया कि धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एनआरसी को देशभर में लागू करने के अमित शाह बयान के बाद भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने लोगों को आश्वासन दिया कि वह राज्य में इस तरह के नागरिक रजिस्टर की अनुमति कभी नहीं देंगी.

शाह ने राज्यसभा को बताया कि भारत के सभी नागरिक चाहे जो भी हों, एनआरसी सूची में शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि एनआरसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि अन्य धर्मों के लोग रजिस्टर में शामिल नहीं होंगे.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वीकार किया है कि धार्मिक अत्याचार के कारण देश छोड़कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिलनी चाहिए, जिसमें हिंदू, बौद्ध, जैन, ईसाई, सिख और पारसी शामिल हैं.

प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘एनआरसी की प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाएगा. किसी भी धर्म का होने के बावजूद किसी को भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. यह केवल हर किसी को एनआरसी के तहत लाने की प्रक्रिया है.’

शाह ने कहा, ‘सभी धर्मों के लोग जो भारतीय नागरिक हैं उन्हें शामिल किया जाएगा. धर्म के आधार पर किसी भेदभाव का कोई सवाल ही नहीं है. एनआरसी एक अलग प्रक्रिया है और नागरिकता संशोधन विधेयक अलग है.’

उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूरा किया गया और जब अपेडट करने की प्रक्रिया को पूरे देश में लागू किया जाएगा तब असम को भी उसमें जोड़ा गया.

हालांकि, ममता बनर्जी ने कहा कि असम में एनआरसी असम समझौते का हिस्सा थी जिस पर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षर किया गया था और इसे कभी भी पूरे देश में लागू नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग हैं जो एनआरसी के क्रियान्वयन के नाम पर पश्चिम बंगाल में गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. मैं इसे बहुत स्पष्ट करना चाहती हूं कि हम बंगाल में एनआरसी की अनुमति कभी नहीं देंगे.’

मुर्शिदाबाद जिले के सागरडिही में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, ‘कोई भी आपकी नागरिकता नहीं ले सकता है और न ही आपको शरणार्थी बन सकता है. धर्म के आधार पर कोई भी बंटवारा नहीं हो सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में एनआरसी को लागू करने की बात करने से पहले भाजपा को उन 14 लाख हिंदुओं और बंगालियों की चिंता करनी चाहिए जिन्हें असम में एनआरसी सूची से बाहर कर दिया गया है.’

इस बीच, असम सरकार के वित्तमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता हेमंत बिस्वा शर्मा ने बुधवार को कहा कि असम में एनआरसी लागू करते वक्त कई सारी गड़बड़ियां सामने आई हैं. हम चाहते हैं कि वर्तमान में जारी की गई नागरिक सूची को रद्द करते हुए असम सरकार अब राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली एनआरसी प्रक्रिया का हिस्सा बने.

शर्मा ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार ने हाल में जारी एनआरसी को खारिज किए जाने का केंद्र से अनुरोध किया है.

गुवाहाटी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में शर्मा ने कहा कि असम सरकार ने एनआरसी को स्वीकार नहीं किया है. सरकार और बीजेपी ने देश के गृहमंत्री से एनआरसी को खारिज करने का अनुरोध किया है.

एनआरसी के राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला की कड़ी निंदा करते हुए मंत्री ने आरोप लगाया कि एनआरसी सर्वे की पूरी कवायद राज्य सरकार को अलग रखते हुए चलाई गई.

उन्होंने कहा, ‘पूरा देश सोचता था कि एनआरसी लागू करने का काम असम सरकार द्वारा किया जा रहा है. हम एक व्यक्ति की वजह से खामियाजा भुगत रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह से हजेला ने एक भिन्न व्यवस्था के तहत कवायद चलाई, कई स्तरों पर सवाल तैयार किए गए. जनप्रतिनिधि होने के नाते, हम अब इन सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)