नई दिल्ली: झारखंड सरकार द्वारा अनियमितताओं की शिकायतों के मद्देनजर 22 भर्ती परीक्षाओं के परिणामों को ‘रद्द’ करने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद राज्य में पेपर लीक और परीक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ हफ्तों से चल रहा युवाओं का आंदोलन बुधवार (20 अगस्त) को खत्म हो गया.
हालांकि, हेमंत सोरेन सरकार के इस फैसले से उन अभ्यर्थियों के करियर पर असर पड़ने की आशंका है, जिन्होंने इन परीक्षाओं को पास कर सरकारी नौकरियां हासिल की थीं. इनमें से कई लोगों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर सरकार के फैसले को चुनौती दी है. इन लोगों ने बुधवार को फैसले के खिलाफ प्रदर्शन भी किया.
मंगलवार रात सोरेन सरकार ने सिलसिलेवार आदेश जारी करते हुए 22 भर्ती परीक्षाओं के परिणाम ‘रद्द’ कर दिए, छह अन्य परीक्षाओं को स्थगित कर दिया और 17 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए.
द प्रिंट के अनुसार, रद्द की गई 22 परीक्षाएं 2023 से लेकर इस साल की शुरुआत तक आयोजित की गई थीं.
इनमें झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा आयोजित कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा के अलावा झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के 11वें, 12वें और 13वें चरण की परीक्षाएं भी शामिल हैं.
प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले दो प्रमुख संगठनों में से एक जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने बुधवार को घोषणा की कि वह अपना आंदोलन दो महीने के लिए स्थगित कर रहा है. दूसरे संगठन जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच ने भी कहा है कि वह अपना आंदोलन खत्म कर रहा है.
रिफॉर्म मंच के रविंद्र पासवान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘हम अपना आंदोलन खत्म नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसे स्थगित कर रहे हैं.’ उन्होंने सोरेन सरकार से राज्य में सक्रिय सभी ‘परीक्षा माफियाओं’ को उजागर करने और दो महीने के भीतर उन सभी परीक्षाओं के परिणाम रद्द करने की मांग की, जिनमें गड़बड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो उनका संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा.
लेकिन सरकार के इस फैसले से अब उन अभ्यर्थियों में चिंता और असमंजस पैदा हो गया है, जिन्होंने अब रद्द की गई परीक्षाओं को पास किया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, ऐसे करीब 2,000 लोगों, खासकर जेएसएससी-सीजीएल के जरिए सरकारी नौकरी पाने वालों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया है. कई लोगों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दायर की हैं.
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में 32 वर्षीय सरकारी कर्मचारी चंदा कुमारी, जिन्होंने सीजीएल परीक्षा पास की थी, ने सचिवालय के बाहर कहा, ‘हम गेट पर अपना पहचान पत्र दिखाते थे और पुलिसकर्मी हमें पहचानकर अंदर जाने देते थे… लेकिन आज दुर्भाग्य से वही लोग हमें धक्का देकर बाहर कर रहे हैं.’
