नई दिल्ली: जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में नागरिक समाज और जन आंदोलन के संगठन कैम्पेन फॉर जस्ट एंड फेयर डिलिमिटेशन (जेएफडी) के 48 घंटे के बंद के बीच राज्य सरकार ने बुधवार (19 अगस्त) को ‘मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति’ को देखते हुए 20 से 23 अगस्त तक सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया.
इस निर्देश के दायरे में स्कूल, उच्च शिक्षण संस्थान और कॉलेज शामिल हैं. इनमें राज्य के शिक्षा बोर्डों और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध संस्थान भी शामिल हैं.

जेएफडी की मांग है कि 2027 की जनगणना राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू किए जाने के बाद ही कराई जाए. 2027 की जनगणना की तैयारियां जारी रहने के बीच यह मांग विवाद का एक प्रमुख मुद्दा बन गई है.
यह विरोध मणिपुर में 2027 की जनगणना के घरों की सूची बनाने (हाउस-लिस्टिंग) के चरण के दौरान हो रही है, जिसके तहत 17 अगस्त को ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (खुद जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया) शुरू हुई थी. मुख्य हाउस-लिस्टिंग का काम 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच होना है.
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, इसके चलते जनगणना के लिए पर्यवेक्षकों, प्रगणकों और फील्ड प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़ी नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं.
इससे पहले राज्य में हुए प्रदर्शनों के कारण जनगणना प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी बाधित हुए थे. समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने बिष्णुपुर जिले में आयोजित जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम को बाधित किया था.
जेएफडी ने जनगणना से पहले एनआरसी की प्रक्रिया कराए जाने की अपनी मांग को कथित रूप से बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों की मौजूदगी और जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर अपनी चिंताओं से जोड़ा है. ये चिंताएं राज्य में जारी व्यापक सामाजिक और राजनीतिक विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं.
कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के सदस्यों को ‘बिना दस्तावेज वाले प्रवासी’ बताए जाने का विरोध किया है और जेएफडी की मांग को भी खारिज किया है. इसलिए यह बंद मणिपुर में जातीय और आदिवासी समुदायों के बीच पहले से मौजूद तनाव से गहराई से जुड़ गया है. यह तनाव पिछले तीन वर्षों से हिंसाग्रस्त इस राज्य को प्रभावित करता रहा है.
चार दिनों तक बंद रहेंगे शैक्षणिक संस्थान
सरकार के चार दिनों तक स्कूल और कॉलेज बंद रखने के आदेश में अलग-अलग प्रबंधन व्यवस्था और विभिन्न शिक्षा बोर्डों के तहत आने वाले संस्थान शामिल हैं. इस तरह यह फैसला केवल उन भौगोलिक इलाकों तक सीमित नहीं है, जहां स्थिति अपेक्षाकृत अधिक तनावपूर्ण है, बल्कि पूरे राज्य में लागू किया गया है.
अस्थायी रूप से संस्थानों को बंद रखने के इस आदेश से नियमित कक्षाएं और शैक्षणिक कार्यक्रम भी बाधित होंगे. यह इस बात को भी दर्शाता है कि जारी आंदोलन का असर अब केवल प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि 2027 की जनगणना से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियां भी इससे प्रभावित हो रही हैं.
संस्थानों को दोबारा खोलने के संबंध में आगे कोई फैसला लेने से पहले अधिकारियों द्वारा जमीनी स्थिति पर नजर रखे जाने की उम्मीद है.
