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गांधी का स्‍वतंत्रता संघर्ष ‘नाटक’ था, ऐसे लोग हमारे देश में महात्मा बन गए: भाजपा सांसद

आपत्तिजनक बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े ने बेंगलुरु में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास पढ़ने पर मेरा खून खौलता है.

भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े. (फोटो साभार/फेसबुक)

भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े. (फोटो साभार/फेसबुक)

बेंगलुरु: आपत्तिजनक बयानों को लेकर हमेशा विवादों में रहने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगड़े इस बार महात्मा गांधी पर टिप्पणी करते हुए स्वतंत्रता आंदोलन में उनके संघर्ष को ड्रामा करार दिया.  उन्होंने यह सवाल भी किया कि भारत में ‘ऐसे लोगों’ को ‘महात्मा’ कैसे कहा जाता है.

एनडीटीवी के अनुसार, बेंगलुरु में शनिवार को एक रैली को संबोधित करते हुए हेगड़े ने कहा, ‘पूरे स्वतंत्रता आंदोलन को अंग्रेजों की सहमति और समर्थन के साथ स्टेज किया गया. इनमें से किसी भी तथाकथित नेता को पुलिस ने नहीं पीटा. इनका स्वतंत्रता आंदोलन एक बड़ा ड्रामा था. इसका मंचन अंग्रेजों की मंजूरी के साथ किया गया. यह वास्तविक लड़ाई नहीं थी.’

उन्होंने महात्मा गांधी की भूख हड़ताल और सत्याग्रह को भी ‘ड्रामा’ करार दिया है.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि भारत को भूख हड़ताल और सत्याग्रह की वजह से आजादी मिली है. यह सच नहीं है. अंग्रेज सत्याग्रह की वजह से देश छोड़कर नहीं गए थे. अंग्रेजों ने परेशान होकर आजादी दी थी. इतिहास पढ़ने पर मेरा खून खौलता है. ऐसे लोग हमारे देश में महात्मा बन जाते हैं.’

हेगड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रह चुके हैं.

कुछ महीने पहले उन्होंने एक बयान देकर अपनी ही पार्टी भाजपा के लिए मुसिबत खड़ी कर दी थी. उन्होंने दावा किया था कि महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस ने रात में जिस तरह एनसीपी नेता अजित पवार को मिलाकर सुबह राज्य में सरकार बनाई थी, उसके पीछे 40 हजार करोड़ रुपया था.

उन्होंने कहा था कि फडणवीस ने राज्य के खजाने से चालीस हजार करोड़ रुपया का निकाल कर केंद्र को दे दिया. भाजपा सांसद ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस 80 घंटे सीएम रहे थे और इतने ही घंटे में उन्होंने यह काम किया.

साथ ही हेगड़े ने कहा था, ‘आपको पता है कि हमारे आदमी 80 घंटे के लिए महाराष्ट्र में सीएम बना था. इसके बाद फडणवीस ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने यह ड्रामा क्यों किया था? क्या हमें पता नहीं था कि हमारे पास बहुमत नहीं है फिर भी वह मुख्यमंत्री बने. यह सवाल हर कोई पूछता है. मुख्यमंत्री के पास करीब 40 हजार करोड़ रुपये थे. अगर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना सत्ता में आ जाते तो वे इन पैसों का गलत इस्तेमाल करते. यह सब केंद्र का पैसा था और इसका इस्तेमाल राज्य के विकास में नहीं होता. यह सब कुछ बहुत पहले तय कर लिया गया था. इसलिए यह ड्रामा रचा गया. फडणवीस ने शपथ लेते ही 15 घंटे के अंदर सारा पैसा केंद्र को भेज दिया.’

वहीं, पिछले साल जनवरी में केंद्रीय मंत्री के पद पर रहते हुए अनंत कुमार हेगड़े ने मॉरल पुलिसिंग के काम को आगे बढ़ाने के लिए हिंदू युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि हिंदू लड़कियों के साथ भागने वाले लोगों का हाथ काट देना चाहिए.

हालांकि, इससे पहले भी भाजपा नेता हेगड़े ने अपनी टिप्पणियों से विवाद खड़ा किया है. बीते अक्टूबर में, हेगड़े ने राज्य सरकार को टीपू सुल्तान जयंती समारोह में ख़ुद को आमंत्रित नहीं करने की बात कहते हुए इस आयोजन को शर्मनाक बताया था.

एक ट्वीट में अनंत कुमार हेगड़े ने टीपू सुल्तान को क्रूर हत्यारे, नीच, कट्टरपंथी और सामूहिक बलात्कारी बताया था. न्यूज़ वेबसाइट स्क्रॉल के अनुसार उन्होंने कहा था, ‘आज सरकार टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है शायद कुछ दिन बाद अजमल कसाब की जयंती भी मनाने लगे.’

इन पर पहले भी इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और भड़काऊ भाषण देने के लिए कार्यवाई की जा चुकी है. मार्च 2016 में हेगड़े ने अपने बयान में कहा था, ‘जब तक इस दुनिया में इस्लाम है तब तक आतंकवाद भी रहेगा.’

वहीं दिसंबर 2017 में उन्होंने यह कहकर अच्छा खासा विवाद खड़ा कर दिया था कि जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष और बुद्धिजीवी मानते हैं, उनकी अपनी खुद की कोई पहचान नहीं होती और वह अपनी जड़ों से अनजान होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा को संविधान से धर्मनिरपेक्ष शब्द निकाल देना चाहिए. हालांकि संसद के दोनों सदनों में उसकी इस टिप्पणी की तीखी आलोचना हुई जिसके बाद उन्होंने संसद में माफी मांगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)