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असम में भाजपा के मुख्यमंत्री प्रत्याशी हो सकते हैं पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई: तरुण गोगोई

असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई का कहना है कि उनके सूत्रों के अनुसार रंजन गोगोई का नाम अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों की सूची में हैं. राज्य में 2021 में चुनाव होने हैं.

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटीः असम के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं.

असम में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तरुण गोगोई ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया, ‘मेरे सूत्रों से पता चला है कि रंजन गोगोई का नाम राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों की सूची में है. मुझे लगता है कि उन्हें असम के अगले संभावित मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया जा सकता है.’

उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई राज्यसभा सांसद बन सकते हैं, तो वह असम में भाजपा के अगले संभावित मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर भी सहमत हो सकते हैं.

गोगोई ने कहा, ‘यह सब राजनीति है. भाजपा अयोध्या राममंदिर मामले में फैसले को लेकर रंजन गोगोई से खुश थी. उसके बाद उन्होंने राज्यसभा नामांकन स्वीकार कर धीरे-धीरे राजनीति में प्रवेश किया. उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से क्यों इनकार नहीं किया? वह आसानी से मानवाधिकार आयोग या किसी अन्य अधिकार संगठन के अध्यक्ष बन सकते थे. उनकी राजनीतिक महत्वकांक्षाएं थी इसलिए उन्होंने राज्यसभा का नामांकन स्वीकार किया.’

असम के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह असम में कांग्रेस के अगले संभावित मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं बनने जा रहे.

वह भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), लेफ्ट और क्षेत्रीय पार्टियों के महागठबंधन की वकालत कर रहे हैं.

तरुण गोगोई ने कहा, ‘मैं राज्य का मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहा. मैं मार्गदर्शक या सलाहकार के तौर पर काम करना चाहूंगा. कांग्रेस में कई योग्य उम्मीदवार हैं, जो प्रभार संभाल सकते हैं.’

उन्होंने कहा कि संभावित गठबंधन के एक साझा उम्मीदवार को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदावर के तौर पर पेश करना चाहिए.

हालांकि, कांग्रेस के कई नेता एआईयूडीएफ के साथ पार्टी के गठबंधन के विचार का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष अपना नाराजगी व्यक्त भी की है.

इन नेताओं का मानना है कि एआईयूडीएफ के साथ हाथ मिलाने से असम के ऊपरी इलाकों में कांग्रेस के मतदान प्रतिशत पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. ऐसे इलाकों में जहां चाय बागान समुदाय या जनजातीय लोगों के वोट अधिक हैं.

जोरहाट के पूर्व विधायक राणा गोस्वामी का कहना है, ‘मैंने तरुण गोगोई से बात की और उनसे कहा कि हो सकता है कि एआईयूडीएफ के साथ हाथ मिलाना उचित नहीं हो. हालांकि, अगर महागठबंधन होगा तो स्थिति में बदलाव आएगा.’