राजनीति

गुजरात: आपराधिक मामलों का सामना कर रहे एनसीपी विधायक को पुलिस शिकायत केंद्र का सदस्य बनाया

गुजरात में पोरबंदर ज़िले के कुटियाना से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक कंधाल जडेजा को जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त किया गया है. उन पर 15 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

कंधाल जडेजा. (फोटो साभार: फेसबुक)

कंधाल जडेजा. (फोटो साभार: फेसबुक)

अहमदाबाद: गुजरात सरकार ने 26 जिलों में 46 विधायकों को गुजरात पुलिस अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त किया है. इनमें गुजरात से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एकमात्र विधायक कंधाल जडेजा का भी नाम शामिल है, जिन पर 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं.

जडेजा पोरबंदर जिले के कुटियाना सीट से विधायक हैं और गॉडमदर (लेडी डॉन) कही जाने वाली दिवंगत संतोखबेन जडेजा के बेटे हैं.

जिला पुलिस शिकायत केंद्र एक ऐसा मंच है जहां कोई भी व्यक्ति जाकर जिले में तैनात इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी के खिलाफ शिकायत कर सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त को की गईं नियुक्तियों में तीन विधायक विपक्षी कांग्रेस पार्टी से हैं- जिनमें जामनगर में विक्रम मदाम, गिर सोमनाथ में विमल चुडास्मा और जूनागढ़ में भागाभाई बराड़ शामिल हैं.

कंधाल जडेजा को भाजपा विधायक और गुजरात सरकार में पूर्व मंत्री बाबू बोखिरिया के साथ पोरबंदर जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त किया गया है.

कंधाल ने इस साल जून महीने में चार राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनावों के दौरान अपनी पार्टी ह्विप के खिलाफ जाकर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में  मतदान किया था.

रिपोर्ट के अनुसार, कंधाल संतोखबेन जडेजा के चार बेटों में से सबसे बड़े हैं, उनके खिलाफ 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें देश में अवैध और गुप्त रूप से बंदूकों की तस्करी, विस्फोटक रखने, रंगदारी मांगने, मारपीट, धोखाधड़ी, हिरासत से भागने, दंगा और आपराधिक धमकी जैसे मामले शामिल हैं.

इनमें से मारपीट और दंगे से जुड़े तीन मामले कुटियान के विधायक के तौर पर सात साल के उनके कार्यकाल के दौरान दर्ज किए गए हैं. कुल 15 मामलों में से 10 पोरबंदर जिले में, तीन राजकोट शहर में और दो अहमदाबाद शहर में दर्ज हैं.

गुजरात पुलिस अधिनियम के अनुसार, जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण पुलिस अधिकारियों से ड्यूटी के दौरान कर्तव्य का पालन न करने, गंभीर कदाचार, शक्तियों का दुरुपयोग करने और ऐसी ही अन्य शिकायतों के संबंध में पूछताछ कर सकता है.

शिकायत प्राधिकरण पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कदाचार की शिकायतों के मामलों में विभागीय पूछताछ की निगरानी भी कर सकता है.

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार एक जिले से चुने गए विधानसभा के दो सदस्यों को जिला पुलिस शिकाकत प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त कर सकती है. एसपी इस प्राधिकरण का पदेन अध्यक्ष और डिप्टी एसपी पदेन सचिव होता है. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट प्राधिकरण का पदेन सदस्य होता है.

कंधाल जडेजा साल 1994 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था, जब पोरबंदर के रानावाव पुलिस थाने में अवैध रूप से देसी और विदेशी हथियार रखने को लेकर केस दर्ज हुआ था. उसी साल राजकोट के प्रद्युम्ननगर पुलिस थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ दंगा और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

आर्म्स एक्ट के तहत कंधाल के खिलाफ छह मामले दर्ज हैं. 1995 में अवैध हथियार और रिवॉल्वर मिलने के बाद से पोरबंदर में कुटियाना पुलिस द्वारा आतंकवाद और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) के तहत मामला दर्ज किया गया था.

इसके अलावा उन पर दंगे से संबंधित के चार और जबरन वसूली से संबंधित एक मामला दर्ज हुआ था.

कंधाल के खिलाफ 1995 में प्रकाश मोढा हत्याकांड और 2005 में हुए केशू ओडेदरा हत्याकांड में भी पोरबंदर में केस चल रहा है. पोरबंदर नगर पालिका में भाजपा पार्षद ओडेदरा की कथित तौर पर पोरबंदर के छाया इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

राकांपा के टिकट पर 2012 में विधायक बनने के बाद कंधाल और उनके आठ अन्य सहयोगियों के खिलाफ साल 2015 में कीर्ति मंदिर पुलिस ने कुटियाना नगर पालिका की अध्यक्ष धेलीबेन ओडेदरा के बेटे नागेश ओडेदरा पर हमला करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था.

2017 में कुटियाना सीट से उनके दोबारा चुने जाने के दो दिन बाद 21 दिसंबर को कंधाल और उनके भाइयों को उनके पूर्व सहयोगी ओडेदरा और उनके एक दोस्त के साथ कथित रूप से मारपीट करने के लिए रानावाव पुलिस थाना में मामला दर्ज हुआ था.

राजकोट जेल में बंद रहने के दौरान कंधाल की पत्नी रेखा जडेजा की अज्ञात बंदूकधारी ने गोलीमार कर हत्या कर दी थी. इस हत्या के संबंध में कंधाल के छोटे भाई करन को गिरफ्तार किया गया था. कथित तौर पर परिवार में रेखा के बढ़ते दबदबे की वजह से उन्हें गोली मारी गई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, ओडेदरा हत्याकांड के संबंध में एक स्थानीय अदालत ने सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया था. साल 2006 में कंधाल और संतोखबेन को प्रकाश मोढा हत्या मामले से बरी कर दिया गया था.

आपराधिक मामलों का सामना कर रहे विधायकों की नियुक्ति पर गुजरात के गुह राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा, ‘प्रावधानों के अनुसार पुलिस शिकायत केंद्र में एक जिले से दो विधायकों की नियुक्ति की जा सकती है. पोरबंदर में सिर्फ दो विधायक हैं, एक भाजपा से और एक एनसीपी से, इसलिए उनकी (कंधाल) नियुक्ति की गई है. हम पार्टी के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते.’