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2016 से 2019 के बीच बीएमसी ने अवैध निर्माण की सिर्फ़ 10.47 फीसदी शिकायतों में कार्रवाई की

आरटीआई के तहत प्राप्त की गई जानकारी से पता चला था कि एक मार्च 2016 से लेकर आठ जुलाई 2019 के बीच बीएमसी को अवैध निर्माण की कुल 94,851 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन उस समय तक इसमें से सिर्फ़ 5,461 मामलों में ही कार्रवाई की गई थी.

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अभिनेत्री कंगना रनौत के बंगले में अवैध परिवर्तनों को ढहाने के लिए लगाया गया बुल्डोजर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: शिवसेना नियंत्रित बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने बीते बुधवार को अभिनेत्री कंगना रनौत के बांद्रा स्थित बंगले में हुए ‘अवैध निर्माणों’ को ढहा दिया.

इसे लेकर राज्य सरकार की काफी आलोचना हो रही है और सवाल किया जा रहा है कि आखिर क्यों इसी समय और सिर्फ रनौत के बंगले पर ही कार्रवाई की गई?

कंगना रनौत ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सरकार उन्हें शिवसेना के साथ उनकी लड़ाई के चलते निशाना बना रही है, जब उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से की थी.

रनौत ने कहा था कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद उन्हें फिल्म माफिया से कहीं अधिक डर मुंबई पुलिस से लगता है.

आंकड़े दर्शाते हैं कि मुंबई में इमारतों का अवैध तरीके से निर्माण किया जाना कोई नई बात नहीं है और इसे लेकर विभाग को कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं, लेकिन इसमें से काफी कम मामलों में ही बीएमसी ने कार्रवाई की है.

सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन के तहत प्राप्त जानकारी से पता चलता है कि एक मार्च 2016 से आठ जुलाई 2019 के बीच बीएमसी को मिली अवैध निर्माण की कुल शिकायतों में से उस समय तक सिर्फ 10.47 फीसदी मामलों में कार्रवाई हुई थी.

शहर में अवैध और अनधिकृत निर्माणों से निपटने के लिए बीएमसी ने 2016 में अतिक्रमण ट्रैकिंग प्रबंधन प्रणाली (आरईटीएमएस पोर्टल) की शुरुआत की थी. इसकी वेबसाइट पर जाकर लोग अवैध निर्माण की शिकायत कर सकते हैं.

इस पोर्टल के जरिये प्राप्त हुईं शिकायतों की जानकारी प्राप्त करने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता शकील शेख ने साल 2019 में एक आरटीआई दायर की थी.

इसके जवाब में बीएमसी ने बताया कि एक मार्च 2016 से लेकर आठ जुलाई 2019 के बीच उन्हें अवैध निर्माण की कुल 94,851 शिकायतें प्राप्त हुई थीं. इसमें से 42,697 शिकायतें समान मामलों को लेकर थीं. इस तरह बाकी की कुल 52,124 शिकायतों में बीएमसी ने 5,462 मामलों में ही कार्रवाई की थी, जो कि कुल शिकायतों की तुलना में मात्र 10.47 फीसदी ही है.

शेख ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘बीएमसी ने कंगना मामले में तत्काल कार्रवाई कर दी लेकिन शहर के अन्य अवैध निर्माणों पर कब कार्रवाई की जाएगी. कई मामलों में बीएमसी के अधिकारी अवैध निर्माणों को ढहाने के बजाय कागजों में दिखा देते हैं कि काम पूरा हो गया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘पिछले कुछ सालों में शहर की कई इमारतें गिरी हैं और लगभग सभी मामलों में अवैध निर्माण प्रमुख वजहों में से एक था.’