नॉर्थ ईस्ट

नगालैंडः नगा समूहों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की, शांति प्रक्रिया के लिए साथ काम करने पर सहमत

मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो के साथ बैठक में विभिन्न नगा जातियों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, चर्च के प्रतिनिधियों, नगा समाज की प्रमुख हस्तियों ने सात सूत्रीय प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और केंद्र के साथ चल रही शांति प्रक्रिया को सुविधानजनक बनाने का आह्वान किया.

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो. (फोटो: पीटीआई)

नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने नगा मामले को लेकर 15 अक्टूबर को कोहिमा में विभिन्न नागरिक सामाजिक संगठनों और पक्षकारों के साथ बैठक की, जिसमें नगा मामले को एकमत से सुलझाने के लिए सामूहिक और एकीकृत रूप से काम करने से लेकर शांति प्रक्रिया को सुगम बनाने पर विचार-विमर्श किया गया.

मुख्यमंत्री के आवासीय परिसर के भीतर हुई बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री रियो ने की.

विभिन्न नगा जातियों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, चर्च के प्रतिनिधियों, राज्य में नगा समाज की प्रमुख हस्तियों ने बैठक के अंत में सात सूत्रीय प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए और केंद्र के साथ चल रही शांति प्रक्रिया को सुमग बनाने का एकमत से आह्वान किया.

हालांकि, नगा होहो ने बैठक के बीच से ही वॉकआउट कर दिया. बता दें कि नगा होहो को नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (एनएससीएन-इसाक-मुइवाह) का करीबी माना जाता है.

विभिन्न जनजातियों के अलावा नगा होहो मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश में रह रहे सभी नगाओं का प्रतिनिधित्व करता है.

अगस्त 2015 में फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद से ही नरेंद्र मोदी सरकार के साथ बातचीत के दौरान एनएससीएन-आईएम की प्रमुख मांगों में नगालिम या नगा के तहत नगालैंड, असम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में रह रहे सभी नगाओं के लिए समाधान खोजना है.

बैठक के बीच से जाने के बारे में पूछने पर नगा होहो के पूर्व अध्यक्ष चुबा ओजुकम ने द वायर  को बताया, ‘मैं बैठक में नहीं था. हालांकि, मुझे बताया गया कि बैठक में अन्य नगा इलाकों से किसी संगठन या शख्स को नहीं बुलाया गया था और नगा होहो एकमात्र संगठन था, जिसे नगा लोगों की ओर से बोलना था लेकिन नगा राजनीतिक मामलों पर अपना रुख पेश करने के लिए नगा होहो प्रतिनिधिमंडल को प्राथमिकता नहीं दी गई.’

ओजुकम ने कहा, ‘नगा होहो प्रतिनिधिमंडल के प्रति अनादर दिखाने का यह प्रयास बैठक के सहअध्यक्ष द्वारा जानबूझकर किया गया था.’

बैठक के सहअध्यक्ष और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एम. किकोन ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि बैठक में भोजन के बाद नगा होहो के लिए समय तय किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘वे बैठक से चले जाने के बजाय अपनी नाराजगी को वहां हमारे समक्ष व्यक्त कर सकते थे. हमने उन्हें जाते हुए नहीं देखा. यह सामान्य रूप से बाहर जाना नहीं था.’

किकोन ने कहा कि एनएससीएन-आईएम के करीबी रहे एक अन्य शक्तिशाली संगठन में नगा मदर्स एसोसिएशन ने इस संयुक्त प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं.

राज्य के एक वरिष्ठ पत्रकार ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर द वायर को बताया, ‘यह बहुत स्पष्ट था कि बैठक नगालैंड के गैर सरकारी संगठनों, धार्मिक एवं जनजातीय निकायों और लोगों के साथ मिलकर नगा मुद्दे के जल्द से जल्द समाधान के लिए केंद्र सरकार की ओर से बैठक आयोजित की गई थी. यह इसलिए क्योंकि सरकार नगा समझौते पर आगे बढ़ने से पहले इन संगठनों की नब्ज टटोलना चाहती थी.’

उन्होंने कहा, ‘यह अलग झंडेऔर संविधान की उनकी मांग की वजह से एनएससीएन के साथ गतिरोध तोड़ने के लिए है क्योंकि केंद्र सरकार इससे इनकार करती रही है.’

उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल और वार्ताकार आरएन रवि पहले ही कह चुके हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो सरकार सात नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप (एनएनपीजी) के साथ शांति समझौते पर आगे बढ़ेगी, जो इन मांगों को लेकर अधिक उत्सुक नहीं है. इसका मतलब है कि यह प्रक्रिया बिना एनएससीएन आईएम के तेजी के साथ आगे बढ़ सकती है लेकिन नगालैंड के इन संगठनों और लोगों के समर्थन के बिना.’

पत्रकार ने कहा, ‘नगा होहो को बैठक में प्राथमिकता नहीं दी गई. केवल इस बात पर प्रकाश डाला गया कि नगालैंड में नगाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और अन्य नगा मामलों का राज्यों में विशेष परिषदों के जरिए समाधान किया जाएगा.’

10 अगस्त को द वायर  ने बताया था कि एनएससीएन-आईएम की रवि के साथ खुली असहमति और वार्ताकार को बदलने की मांग के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संगठन के साथ गतिरोध को समाप्त करने के लिए पूर्वोत्तर से समन्वयक लाने का फैसला किया था.

गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप नगालैंड के मुख्यमंत्री रियो और असम के वित्त मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने अन्य के साथ मिलकर एनएससीएन-आईएम के महासचिव टी. मुइवाह से दिल्ली के एक अस्पताल में मुलाकात की, जहां उन्हें भर्ती किया गया था.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस कदम के बाद 15 अक्टूबर की यह बैठक हुई. साल 2015 में फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद दिल्ली में सरकारी आवास में रह रहे मुइवाह ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर किसी तीसरे देश में वार्ता करने की मांग की थी.

इस पत्र को छह अक्टूबर को एनएससीएन-आईएम ने मीडिया में जारी किया था.

इस बीच 15 अक्टूबर को हुई बैठक में मौजूद लोोगं को संबोधित करते हुए रियो ने अपने संबोधन में सभी नगाओं के लिए एक समाधान की बात दोहराई और इसके साथ ही शांति प्रक्रिया का समर्थन किया.

रियो ने कहा, ‘आज की सभा सिर्फ ऐतिहासिक ही नहीं है बल्कि इसने भारत सरकार और दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि नगा वास्तविक शांति चाहते हैं. हम एकता और एक नगा परिवार के रूप में एकता की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे. मुझे विश्वास है कि हमारी आवाज और हमारी इच्छा सीमाओं से परे भी सुनी जाएगी.’

प्रतिनिधिमंडल द्वारा हस्ताक्षरित प्रस्तावों में कहा गया है कि वे नगाओं के विशेष इतिहास को स्वीकारने और नगा मुद्दों को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर पहचानने के लिए केंद्र सरकार की सराहना करते हैं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)