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चुनाव आयोग ने कहा- तैयारी पूरी, पोस्टल बैलट से एनआरआई को वोट डालने की अनुमति दे केंद्र

चुनाव आयोग ने कहा है कि अगले साल असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में होने वाले चुनावों से इसकी शुरुआत की जा सकती है. एक अनुमान के मुताबिक, विदेशों में क़रीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग वोट देने की उम्र में होंगे, इसलिए चुनाव परिणामों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग (ईसी) ने सरकार से अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को पोस्टल बैलट (डाक-मतपत्र) के जरिये अपना वोट डालने की अनुमति देने को कहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने पिछले हफ्ते कानून मंत्रालय को बताया कि एनआरआई को इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस) की सुविधा देने के लिए ‘तकनीकि और प्रशासनिक’ रूप से तैयार है. चुनाव आयोग ने कहा कि अगले साल असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में होने वाले चुनावों से इसकी शुरुआत की जा सकती है.

फिलहाल विदेशों में रह रहे भारतीयों को सिर्फ उनके संबंधित चुनाव क्षेत्र में वोट डालने की इजाजत है. इस नियम को अड़चन के रूप में देखा जाता है और संभवत: यही वजह है कि कुछ हजार ही विदेशी भारतीयों ने खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर कराया है, जिसमें से केरल के सर्वाधिक लोग है.

एक अनुमान के मुताबिक, विदेशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, जिसमें से 60 लाख लोग वोट देने की उम्र में होंगे, इसलिए चुनाव परिणामों में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

ईटीपीबीएस के तहत पोस्टल बैलट इलेक्ट्रॉनिकली डिस्पैच हो जाता है और साधारण डाक से वापस हो जाता है. विदेश में रह रहे मतदाताओं को ये सुविधा देने के लिए सरकार को सिर्फ कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स 1961 में संशोधन करने की जरूरत है. इसे संविधान की मंजूरी जरूरी नहीं है.

कानून मंत्रालय द्वारा प्राप्त किए गए आयोग के प्रस्ताव के मुताबिक, पोस्ट बैलट के जरिये वोट देने के इच्छुक एनआरआई को चुनाव की घोषणा के कम से कम पांच दिन बाद रिटर्निंग ऑफिस (आरओ) को इसकी जानकारी देनी होगी. इस तरह की सूचना मिलने के बाद आरओ द्वारा बैलट पेपर को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेज दिया जाएगा.

इसके बाद एनआईआर वोटर को इसमें अपनी पसंद के निशान पर टिक मार्क करके वापस भेजना होगा. इसके साथ ही वोटर को एक घोषणा-पत्र भी भेजना होगा, जो कि भारतीय उच्चायोग द्वारा नियुक्त एक ऑफिसर द्वारा अटेस्ट किया गया होगा.

बता दें कि साल 2014 में पहली बार चुनाव आयोग ने एनआरआई को वोट डालने की मंजूरी देने के प्रस्ताव को संज्ञान में लिया था. राजनीतिक दलों में एनसीपी ने इसके प्रति पूरा समर्थन दिया था.

वहीं बसपा, भाजपा और भाकपा का कहना था कि समयसीमा के चलते पोस्टल बैलट सही विकल्प नहीं है. कांग्रेस पार्टी पोस्टल बैलट को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजने के पक्ष में नहीं थी.

साल 2018 में सरकार ने विदेशी मतदाताओं को प्रॉक्सी वोटिंग की सुविधा देने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा था. ये विधेयक लोकसभा से पारित हो गया था और राज्यसभा में लंबित था, लेकिन तब तक 16वीं लोकसभा की समाप्ति हो गई और इसलिए ये विधेयक भी खत्म हो गया.