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असम में दोबारा निर्वाचित विधायकों की संपत्ति 95 फीसदी तक बढ़ी: रिपोर्ट

असम इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2016 में दोबारा निर्वाचित विधायकों की संपत्ति में औसत वृद्धि 1.48 करोड़ है यानी उनकी संपत्ति में 95 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई. पर्यटन मंत्री चंदन ब्रह्मा उन पांच विधायकों में शीर्ष पर हैं, जिनकी संपत्ति दोबारा निर्वाचित होने के बाद उल्लेखनीय तरीके से बढ़ी है.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (फोटो: पीटीआई)

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: असम में पर्यटन मंत्री चंदन ब्रह्मा उन पांच विधायकों में शीर्ष पर हैं, जिनकी संपत्ति दोबारा निर्वाचित होने के बाद उल्लेखनीय तरीके से बढ़ी है. इस सूची में स्वास्थ्य मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंता भी शामिल है. इसकी जानकारी एक रिपोर्ट से मिली है.

‘असम इलेक्शन वॉच’ ने 2016 में दोबारा निर्वाचित विधायकों की संपत्ति का विश्लेषण किया है. रिपोर्ट में बताया गया कि 2016 में दोबारा निर्वाचित विधायकों की संपत्ति में औसत वृद्धि 1.48 करोड़ है, यानी उनकी संपत्ति में 95 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई.

रिपोर्ट के अनुसार ‘बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट’ (बीएफपी) से ताल्लुक रखने वाले ब्रह्मा उन विधायकों में सबसे शीर्ष पर हैं, जिनकी संपत्ति में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है.

ब्रह्मा की संपत्ति 2011 से दो करोड़ से बढ़कर 2016 में नौ करोड़ हो गई. उनकी संपत्ति में कुल 268 फीसदी बढ़ोतरी हुई.

इसके बाद एआईयूडीएफ के अब्दुर रहीम अजमल, कांग्रेस के नजरूल इस्लाम, भाजपा के शर्मा और एजीपी के महंता हैं. अजमल की संपत्ति छह करोड़ से बढ़कर 13 करोड़ हुई.

2016 में विधानसभा चुनाव से पहले शर्मा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. उनकी संपत्ति तकरीबन तीन करोड़ से बढ़कर छह करोड़ हुई यानी उनकी संपत्ति में 108 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

राज्य में दो बार मुख्यमंत्री रहे एजीपी के प्रफुल्ल कुमार महंता  की संपत्ति चार करोड़ से बढ़कर सात करोड़ हो गई.

बता दें बीते जनवरी महीने में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और असम इलेक्शन वॉच (एईडब्ल्यू) ने एक रिपोर्ट जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि मौजूदा विधायकों में 58 प्रतिशत करोड़पति हैं जबकि कांग्रेस के 55 प्रतिशत.

सबसे ज़्यादा 77 प्रतिशत करोड़पति विधायक असम गण परिषद में हैं. एडीआर और एईडब्ल्यू ने संपत्ति का विश्लेषण में पाया था कि 2006 में केवल 12 प्रतिशत विधायक करोड़पति थे और 2011 में यह बढ़कर 37 प्रतिशत हो गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)