कोविड-19

मध्य प्रदेश में भाजपा विधायक ने उठाया ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा

भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई ने सवाल उठाते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी. कृपया ध्यान दें. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र में 50,000 मरीज़ थे और ऑक्सीजन 457 मीट्रिक टन ख़र्च हुआ. वहीं, मध्य प्रदेश में 5,000 मरीजों पर 732 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ख़र्च क्यों हुआ?

अजय विश्नोई. (फोटो साभार: फेसबुक)

अजय विश्नोई. (फोटो साभार: फेसबुक)

भोपाल/इंदौर: कोविड-19 महामारी के बीच मध्य प्रदेश के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी की खबरें सामने आने के बाद भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का इस ओर ध्यान आकर्षित किया और राज्य में इसका उचित इस्तेमाल करने को कहा. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड-19 की लड़ाई में राज्य सरकार नौकरशाहों को तरजीह दे रही है.

विश्नोई ने ट्वीट किया, ‘मध्य प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी. कृपया ध्यान दें. अप्रैल के प्रथम सप्ताह में महाराष्ट्र में 50,000 मरीज थे और ऑक्सीजन 457 मीट्रिक टन खर्च हुआ. वहीं, मध्य प्रदेश में 5,000 मरीजों पर 732 मीट्रिक टन ऑक्सीजन खर्च क्यों हुआ?’

68 वर्षीय विश्नोई प्रदेश के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और वह चौथी बार विधायक हैं.

उनसे इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बृहस्पतिवार को फोन पर कहा कि जीवन रक्षक ऑक्सीजन की बर्बादी को मध्य प्रदेश में रोका जाना चाहिए.

जबलपुर जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र के प्रतिनिधित्व एवं खुद भी अस्पताल चलाने वाले विश्नोई ने दावा किया कि ऑक्सीजन की बर्बादी हो रही है और जब मरीज खाना खा रहा होता है, उस वक्त भी ऑक्सीजन को बंद नहीं किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधियों को भी विश्वास में लिया जाना चाहिए.

विश्नोई ने आरोप लगाया कि कोविड-19 की लड़ाई में राज्य सरकार नौकरशाहों को तरजीह दे रही है और जमीनी स्तर से जुड़े लोगों की अनदेखी कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कोरोना वायरस की जमीनी हकीकत को जानने के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करनी चाहिए, ताकि इससे लड़ने का उचित समाधान निकाला जा सके.’

ऑक्सीजन की कमी को लेकर कांग्रेस ने दिया था धरना

इससे पहले बीते बुधवार को मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायकों ने भोपाल में महात्मा गांधी प्रतिमा के बाद ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर मौन धरना दिया था.

कांग्रेस विधायकों में पीसी शर्मा, जीतू पटवारी और कुणाल चौधरी मुख्य रूप से शामिल रहे.

राज्य की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पटवारी ने कहा था कि अस्पताल ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों को भर्ती करने से मना कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस ओर ध्यान देने का अनुरोध किया था.

जबलपुर के दो अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म होने से पांच मरीजों की मौत

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में लिक्विड प्लांट में आई खराबी के कारण ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से गुरुवार सुबह दो अस्पतालों में पांच मरीजों की मौत हो गई. ये सभी वेंटिलेटर पर थे. वहीं चार अन्य मरीजों की हालत गंभीर है.

शहर के के मेडिसिटी अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने से वेंटिलेटर पर 82 वर्षीय महिला की जान चली गई. वहीं चार लोगों की मौत सुख-सागर मेडिकल कॉलेज में हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में अप्रैल के 13 दिन में ही कोरोना वायरस के सक्रिय मामलों की संख्या दोगुना हो चुकी है. यहां सक्रिय मामले 10,351 हैं. इसमें से तीन हजार मरीज आईसीयू और एचडीयू में गंभीर स्थिति में भर्ती हैं. इस वजह से ऑक्सीजन की खपत 100 टन रोज पर जा पहुंची है, जबकि सप्लाई 60-70 टन ही है.

पिछले 24 घंटे में मध्य प्रदेश के चार बड़े शहरों में ही 4,635 नए मामले आए हैं जबकि 25 लोगों की मौत हुई हैं. एक दिन पहले इन चार शहरों में 4,511 मामले आए थे और 24 लोगों की जान गई थी.

इंदौर में सबसे ज्यादा 1,693 नए मामले आए और छह कोरोना मरीजों की मौत हो गई. भोपाल में 1,637 मामले मिले और 8 लोगों की मौत हो गई. जबलपुर में 653 मामले आए और छह मरीजों की जान चली गई. ग्वालियर में 652 पॉजिटिव मिले और पांच ने जान गंवाई.

रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को गुना, रायसेन, रीवा, टीकमगढ़ और छतरपुर में भी लॉकडाउन लगा दिया गया है. अब तक प्रदेश के 52 जिलों में से 28 जिलों में या उनके शहरी क्षेत्रों में लॉकडाउन लगाया जा चुका है.

वार्ड बॉय द्वारा कथित तौर पर ऑक्सीजन मशीन हटाने से मरीज की मौत

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिला अस्पताल में कोराना वायरस संक्रमण की वजह से भर्ती शिक्षक सुरेंद्र शर्मा की ऑक्सीजन मशीन को कथित तौर पर वार्ड बॉय ने हटा दिया, जिससे उन्होंने तड़प-तड़पकर बेटे के सामने ही बिस्तर पर दम तोड़ दिया.

घटना के बाद परिजन के हंगामे और आरोपों के बीच अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केबी वर्मा ने कहा कि मरीज की ऑक्सीजन नहीं हटाई गई. उनकी हालत खराब थी, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका. परिजन नहीं माने और कोविड वार्ड के सीसीटीवी फुटेज निकलवाने पर अड़ गए.

फुटेज निकलवाए गए तो पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हटाते हुए वार्ड बॉय दिखाई दिया. इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन ने तर्क दिया कि मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत ही नहीं थी, इसलिए नर्स के कहने पर वार्ड बॉय ने दूसरे मरीज के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर निकाल लिया.

इसके बाद मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अक्षय निगम ने पूरे मामले की जांच के लिए टीम गठित करने के आदेश दिए हैं.

रेमडेसिविर की 9,600 इंजेक्शन पहुंचे, हवाई मार्ग से अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया

कोविड-19 की दूसरी लहर के घातक प्रकोप के बीच रेमडेसिविर दवा की कुल 9,600 इंजेक्शन बृहस्पतिवार को इंदौर पहुंचे, जहां से इन्हें सरकारी विमान और हेलिकॉप्टर के जरिये राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया.

अधिकारियों ने बताया कि कोविड-19 की जरूरी दवा की यह खेप महाराष्ट्र के नागपुर से ट्रक के माध्यम से इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंची. उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे से इसे सरकारी विमान और हेलीकॉप्टर के जरिये प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजा गया.

उन्होंने बताया कि रेमडेसिविर के 200 बक्से इंदौर हवाई अड्डे पहुंचे, जिनमें कुल 9,600 इंजेक्शन हैं. हेलिकॉप्टर के माध्यम से इनमें से 42 बक्से भोपाल, सात बक्से रतलाम और चार बक्से खंडवा पहुंचाए गए.

इसी तरह सरकारी विमान से 19 बक्से ग्वालियर, 18 बक्से रीवा, 39 बक्से जबलपुर और 14 बक्से सागर पहुंचाए गए. रेमडेसिविर के 57 बक्से इंदौर के मरीजों के लिए रखे गए हैं जो राज्य में महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित जिला है.

गौरतलब है कि कोविड-19 के मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली रेमडेसिविर की 9,600 इंजेक्शन ऐसे वक्त मध्य प्रदेश पहुंचीं, जब राज्य में इस दवा की भारी किल्लत है और मरीजों के परिजन इसकी कालाबाजारी की शिकायतें भी कर रहे हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)