कोविड-19

कोविड-19: बंगाल में चुनाव आयोग ने शाम सात से सुबह 10 बजे के बीच रैलियों-सभाओं पर प्रतिबंध लगाया

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: कोविड-19 की ख़तरनाक स्थिति को देखते हुए तृणमूल ने बंगाल के तीन चरणों के मतदान एकसाथ कराने की मांग फ़िर दोहराई. बंगाल में पांच उम्मीदवार कोरोना वायरस से संक्रमित. अमित शाह ने ममता पर मतुआ लोगों को नागरिकता न देने का आरोप लगाया. सीआईडी ने कूच बिहार गोलीकांड में जांच का ज़िम्मा संभाला. तमिलनाडु में द्रमुक का आरोप, ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में लोगों और का ‘अनधिकृत’ प्रवेश हो रहा है.

(प्रतीकात्मक फोटो: फेसबुक)

(प्रतीकात्मक फोटो: फेसबुक)

नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने कोविड-19 के बढ़ते मामलों के कारण पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के संबंध में कुछ प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिनमें प्रचार के समय में कमी करना भी शामिल है.

आयोन ने शुक्रवार से शाम सात बजे तक ही रैलियां और जनसभाओं के आयोजन की समयसीमा तय कर दी है. इससे पहले रात 10 बजे तक रैलियां और जनसभाएं की जा सकती थीं.

चुनाव आयोग की ओर जारी आदेश में कहा गया है कि शाम सात बजे से लेकर सुबह दस बजे तक रैलियों और जनसभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

इसके अलावा आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के शेष तीन चरणों के लिए मतदान से पूर्व चुनाव प्रचार समाप्त होने की अवधि 48 घंटे से बढ़ाकर 72 घंटे कर दी है.

राज्य में विधानसभा चुनाव आठ चरणों में होने थे, इनमें से चार चरणों के लिए मतदान संपन्न हो गया है और पांचवें चरण के लिए मतदान 17 अप्रैल को है. आयोग द्वारा लगाई गईं नई बंदिशें अंतिम तीन चरणों (22, 26 और 29 अप्रैल) के लिए हैं. अंतिम तीन चरणों में कुल 114 सीटों के लिए चुनाव होने हैं.

इससे पहले कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच पश्चिम बंगाल में एक साथ चुनाव कराने के आग्रह को भारतीय निर्वाचन आयोग ने ठुकरा दिया है.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आयोग से आग्रह किया था कि विधानसभा चुनाव के बाकी चरणों को एक बार में कराने पर विचार किया जाए.

आयोग के एक अधिकारी ने बताया था कि 17 अप्रैल को होने जा रहे पांचवें चरण के चुनाव के लिए बंदोबस्त पहले ही किए जा चुके हैं. सोशल मीडिया पर कई लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि क्या चुनाव के अगले तीन चरण एक ही बार में करवा लेने चाहिए.

बंगाल में चार चरणों में 135 सीटों पर चुनाव हो चुकी है. पांचवें चरण में 45 सीटों पर 17 अप्रैल को चुनाव होने है. पांचवें चरण में 319 प्रत्याशी मैदान में हैं, इनमें 39 महिलाएं हैं. ये 45 सीटें जलपाईगुड़ी, कलिम्पोंग, दार्जिलिंग, नादिया, नॉर्थ 24 परगना और पूर्वा बर्धमान जिले में पड़ती हैं.

तृणमूल कांग्रेस ने तीन चरणों के मतदान एकसाथ कराने की मांग फ़िर दोहराई

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में कोविड-19 की खतरनाक स्थिति को देखते हुए शनिवार को पांचवें दौर के मतदान के बाद विधानसभा चुनाव के अंतिम तीन चरणों को एकसाथ जोड़ने की शुक्रवार को मांग की.

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पिछले दिनों शेष चरणों के लिए मतदान एक ही बार में कराने का सुझाव दिए जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस महासचिव पार्थ चटर्जी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आरिज आफताब के साथ एक बैठक में अंतिम तीन चरणों के मतदान एकसाथ कराने की मांग की.

सीईओ द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से बाहर निकलते हुए चटर्जी ने कहा कि लोगों का जीवन बचाने और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय देते हुए कोविड-19 संक्रमण को नियंत्रित करने के वास्ते चुनाव आयोग द्वारा एक संतुलन बनाया जाना चाहिए.

चटर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने आयोग को बताया है कि कोविड-19 स्थिति के बीच लोगों को उचित स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए, अंतिम तीन चरणों को यह सुनिश्चित करते हुए एकसाथ जोड़ देना चाहिए कि लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बरकरार रखा जाए.’

उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और आम जनता सहित सभी हितधारकों की कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने में भूमिका है.

पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ रहे पांच उम्मीदवार कोरोना वायरस से संक्रमित

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ रहे अलग-अलग दलों के कम से कम पांच उम्मीदवार कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने शुक्रवार को इस बारे में बताया.

उन्होंने बताया कि संक्रमित पाए गए पांच उम्मीदवारों में से तीन तृणमूल कांग्रेस के और एक-एक उम्मीदवार रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हैं.

अधिकारी ने बताया कि जंगीपुर से आरएसपी के उम्मीदवार प्रदीप कुमार नंदी (73) बुधवार को कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए और अभी वह घर पर पृथकवास में हैं.

अधिकारी ने बताया कि माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट से भाजपा के उम्मीदवार आनंदमय बर्मन (38), तृणमूल कांग्रेस के गोलपोखर से उम्मीदवार मोहम्मद गुलाम रब्बानी, तापन से उम्मीदवार कल्पना किसकू और जलपाईगुड़ी से उम्मीदवार डॉ. प्रदीप कुमार बर्मा कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं.

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक, ‘संक्रमित पाए गए उम्मीदवारों को तुरंत प्रचार रोक देना चाहिए. या तो उन्हें अपने घर पर पृथकवास में रहना चाहिए या संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल में भर्ती होना चाहिए.’

मुर्शिदाबाद जिले की शमशेरगंज विधानसभा सीट  में कांग्रेस के प्रत्याशी रेजाउल हक कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे. बृहस्पतिवार तड़के उनका निधन हो गया. इसके बाद निर्वाचन आयोग ने शमशेरगंज विधानसभा सीट पर मतदान स्थगित कर दिया है.

बंगाल में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी के लिए भाजपा ज़िम्मेदार: ममता बनर्जी

नवद्वीप: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदेश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिए सीधे भगवा दल को जिम्मेदार ठहराते हुए शुक्रवार को कहा कि वह निर्वाचन आयोग से कहेंगी कि वह भाजपा को प्रचार के दौरान बाहरी लोगों को लाने से रोके.

ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

नादिया जिले के नवदीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैलियों के लिउ शामियाने लगवाने के लिए भाजपा सबसे बुरी तरह प्रभावित गुजरात जैसे राज्यों से लोगों को लेकर आई.

उन्होंने कहा, ‘मैं निर्वाचन आयोग से अनुरोध करूंगी कि वह गुजरात जैसे राज्यों से आने वाले बाहरी लोगों को रोके जो बंगाल में कोविड-19 के प्रसार के लिये जिम्मेदार हैं.’

बनर्जी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री या अन्य नेता प्रचार के लिए आते हैं तो हमें कुछ नहीं कहना. रैलियों के लिये मंच और पंडाल लगाने के लिए भाजपा को सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों से लोगों को क्यों लाना चाहिए?’

तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि स्थानीय श्रमिक और सज्जाकारों की आवश्यक कोविड-19 जांच के बाद इस उद्देश्य के लिए सेवा ली जा सकती है.

अपनी चोट का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा उनके पैर को निशाना बनाकर उन्हें प्रचार करने से रोकना चाहती थी, लेकिन उन्होंने इस चुनौती को गलत साबित कर दिया.

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मेरे पैर को निशाना बनाया था, लेकिन लोगों के आशीर्वाद से मैंने उन्हें गलत साबित कर दिया. चोट 75 प्रतिशत तक ठीक हो चुकी है.’

शाह ने ममता पर मतुआ लोगों को नागरिकता न देने का आरोप लगाया

अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

अमित शाह. (फोटो: पीटीआई)

तेहट्टा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर दलित मतुआ व नामशूद्र समुदाय के लोगों को नागरिकता देने से इनकार करने का आरोप लगाया क्योंकि उनके वोटबैंक को यह पसंद नहीं आता.

कई सीटों पर विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाले इन दोनों समुदायों को साधने के प्रयास के तहत शाह ने कहा कि राज्य में अगर भाजपा सत्ता में आई तो इन दोनों समुदायों के कल्याण के लिये 100 करोड़ रुपये का एक कोष बनाया जाएगा.

उन्होंने नादिया जिले के तेहट्टा में एक चुनावी रैली के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह मतुआ और नामशूद्र परिवार यहां 50-70 सालों से रह रहे हैं, तीन पीढ़ियों से. लेकिन दीदी कहती हैं कि उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी, क्यों? क्योंकि उनके वोट बैंक को यह पसंद नहीं आएगा.’

राज्य में बुधवार को पहली दो चुनावी रैलियों को संबोधित करने वाले राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शाह ने उन्हें ‘पर्यटक नेता’ बताया.

कांग्रेस यहां वाम दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, जबकि केरल में उनकी पार्टी वाम दलों के खिलाफ चुनाव लड़ रही है.

शाह ने कहा, ‘लगभग पूरा चुनाव खत्म होने के बाद बंगाल में एक पर्यटक नेता आए हैं और हमारे डीएनए पर सवाल उठा रहे हैं. भाजपा का डीएनए विकास, राष्ट्रवाद और आत्मनिर्भर भारत है.’

तृणमूल कांग्रेस में ‘वंशवाद की राजनीति’ पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि भाजपा बंगाल में किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना लागू करना चाहती है, ‘दीदी सिर्फ भाइपो (भतीजा) सम्मान निधि चाहती हैं.’

भाजपा नेता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर लोकसभा सीट से सांसद अभिषेक बनर्जी पर सरकारी तंत्र पर ‘अनावश्यक प्रभाव’ डालने और ‘वसूली सिंडिकेट’ चलाने को लेकर आरोप लगाते रहे हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, ‘दो मई (मतगणना का दिन) को जनादेश आने के बाद कट मनी लेने के लिए कोई नहीं बचेगा और सिंडिकेट की सरकार यहां नहीं रहेगी, भाइपो के लिए काम करने वाली सरकार चली जाएगी.’

शाह ने टीएमसी सरकार पर घुसपैठियों को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया, जिन्होंने युवाओं की नौकरी और गरीबों के खाने पर कब्जा कर लिया.

उन्होंने कहा, ‘अवैध आव्रजकों को छोड़िए, सीमा पार से एक परिंदे को भी बंगाल की सीमा में प्रवेश की इजाजत नहीं होगी. न तो टीएमसी न वामदल और न ही कांग्रेस. सिर्फ भाजपा घुसपैठ रोक सकती है.’

उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश की सीमा से लगने वाले नादिया जिले की जनसांख्यिकी घुसपैठ के कारण बदल गयी है.

सीआईडी ने कूच बिहार गोलीकांड में जांच का जिम्मा संभाला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सीआईडी ने 10 अप्रैल को कूच बिहार जिले में मतदान के दौरान सीआईएसएफ की गोलीबारी में चार लोगों की मौत के मामले में जांच की जिम्मेदारी शुक्रवार को ली. सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

जिले के सीतलकूची में चौथे चरण के मतदान के दौरान हुई घटना की जांच के लिए अपराध जांच विभाग (सीआईडी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है.

इस घटना के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसको चुनौती दे रही भाजपा के बीच उग्र जुबानी जंग शुरू हो गई है और लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है.

अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ता सीतलकूची निर्वाचन क्षेत्र के जोरपाटकी में मतदान केंद्र 126/5 का दौरा करेंगे, जहां सीआईएसएफ जवानों ने ग्रामीणों द्वारा कथित तौर पर हमला करने के बाद गोलियां चला दी थीं.

टीएमसी ने दावा किया है कि जिनकी मौत हुई, वे पार्टी के समर्थक थे और उन्हें उस वक्त गोली मारी गई जब वे वोट डालने के लिए कतार में खड़े थे. टीएमसी प्रमुख एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना को ‘नरसंहार’ बताया है.

वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों से बात करने और उनके बयान दर्ज करने के अलावा एसआईटी घटना का वीडियो फुटेज भी देखेगी. उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ है, जिसकी प्रामाणिकता को जांचने के लिए फॉरेंसिक जांच करवाई जा सकती है.

एसआईटी घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी बात करेगी.

चुनाव आयोग ने घटना के बाद मतदान केंद्र पर वोटिंग रद्द कर दी थी और स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए कूच बिहार में नेताओं के प्रवेश पर 72 घंटे की रोक लगा दी थी.

बनर्जी बुधवार को सीतलकूची पहुंची थीं और मृतकों के परिवार से मुलाकात की थी.

चौथे चरण के मतदान के दौरान कूच बिहार जिले के सीतलकूची क्षेत्र के जोरपाटकी गांव में कथित तौर पर स्थानीय लोगों की तरफ से केंद्रीय बलों पर कथित हमले और उसके बाद जवानों द्वारा की गई फायरिंग में चार लोगों की मौत हो गई थी.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने तब फायरिंग की जब गांववालों ने एक 12 साल के बच्चे पर सीआईएसएफ जवानों द्वारा हमले की अफवाह के बाद उन्हें घेर लिया था.

इस घटना से राजनीतिक तूफान आ गया है. केंद्रीय बल का दावा है कि गोली ‘आत्मरक्षा’ में चलाई गई है. वहीं टीएमसी ने इसे मतदाताओं को डराने के लिए सोच-समझकर की गई हत्या बताया है.

केंद्रीय बलों का घेराव करने के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में ममता के खिलाफ केस दर्ज

कूच बिहार: केंद्रीय बलों का घेराव करने के लिए लोगों को उकसाने के आरोप में कूच बिहार के एक पुलिस थाने में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई. इसमें आरोप लगाया गया है कि उनके उकसाने की वजह से सीतलकूची गोलीबारी की घटना हुई और उसमें चार लोगों की जान गई.

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

(प्रतीकात्मक फोटो: द वायर)

कूच बिहार में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के जिलाध्यक्ष सिद्दिकी अली मिया ने बुधवार को अपनी शिकायत में दावा किया कि ममता बनर्जी द्वारा बनरेश्वर में एक रैली में दिए गए भाषण ने लोगों को चुनावों के चौथे चरण के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मचारियों के खिलाफ हमले के लिए उकसाया था.

माथाभांगा पुलिस थाने में दर्ज अपनी शिकायत के साथ ही उन्होंने ममता बनर्जी के भाषण की एक वीडियो क्लिप भी संलग्न की है.

मिया ने कहा कि ममता बनर्जी के भड़काऊ बयान से भड़के गांव वालों ने तैनात सुरक्षाकर्मियों के हथियार छीनने की कोशिश की.

प्राथमिकी में मिया ने कहा, ‘महिलाओं सहित गांववालों ने केंद्रीय बलों पर शरीरिक नुकसान पहुंचाने के इरादे से हमला किया, यह जानते हुए भी कि यह तैनात सुरक्षाकर्मियों की मौत का कारण भी बन सकता है.’

प्राथमिकी की एक प्रति समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के पास मौजूद है.

भाजपा नेता मिया से जब संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिनों के भीतर पुलिस यदि कुछ कार्रवाई नहीं करती है तो वह ममता बनर्जी को गिरफ्तार करने की मांग के साथ व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे.

उन्होंने कहा, ‘चार लोगों की मौत के लिए सिर्फ ममता बनर्जी जिम्मेदार हैं. वह हमारे जिले के मतदाताओं के प्रति जवाबदेह हैं.’

सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई गोलीबारी से चार लोगों की मौत के बाद उस मतदान केंद्र पर मतदान टाल दिया था.

प्रचार पर 24 घंटे की रोक संबंधी निर्वाचन आयोग के फैसले को लेकर मैं धरना नहीं दूंगा: घोष

कोलकाता: भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा उन पर 24 घंटे के लिए चुनाव प्रचार करने पर लगाई गई रोक संबंधी निर्णय का वह पूरी सख्ती के साथ पालन करेंगे. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी की तरह वह निर्वाचन आयोग के फैसले को लेकर धरना नहीं देंगे.

निर्वाचन आयोग ने केंद्रीय बलों के खिलाफ उनके बयानों को लेकर बनर्जी पर चुनाव प्रचार करने से 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया था जिसके खिलाफ उन्होंने मंगलवार को शहर में धरना दिया था.

घोष ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘मैं चुनाव आयोग के आदेश का पालन करूंगा और सड़कों पर कोई धरना नहीं दूंगा.’

निर्वाचन आयोग ने बृहस्पतिवार शाम घोष के विवादास्पद बयान के लिए उनके प्रचार करने पर 24 घंटे की पाबंदी लगा दी. घोष ने कहा था कि कई जगहों पर सीतलकूची जैसी घटनाएं होंगी.

घोष ने कहा कि वह इस मौके का इस्तेमाल करते हुए आराम करेंगे क्योंकि वह पिछले कुछ सप्ताह से चुनाव प्रचार अभियान में व्यस्त हैं.

उन्होंने कहा, ‘मैं घर पर रहूंगा, खाऊंगा और एक दिन आराम करूंगा.’

तमिलनाडु: द्रमुक का आरोप, ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में लोगों का ‘अनधिकृत’ प्रवेश हो रहा

द्रमुक नेता एमके स्टालिन. (फोटो: पीटीआई)

द्रमुक नेता एमके स्टालिन. (फोटो: पीटीआई)

चेन्नई: द्रमुक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि तमिलनाडु में ईवीएम को रखने के लिये बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम परिसर में लोगों एवं वाहनों का ‘अनधिकृत’ प्रवेश हो रहा है और उसने निर्वाचन आयोग से मामले में कार्रवाई करने की अपील की.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सत्यब्रत साहू को दिए ज्ञापन में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एमके स्टालिन ने ऐसे कई उदाहरण गिनाए और निर्वाचन आयोग से अपील की कि सुनिश्चित करें कि कोई वाहन या व्यक्ति परिसर में प्रवेश नहीं कर पाए.

स्टालिन ने आरोप लगाए कि ऐसे कई मामले सामने आए, जिसमें कोयंबटूर, तिरूवल्लूर और चेन्नई में इस तरह के परिसरों में ‘ढंके हुए वाहन’ लाए गए और पूछने पर उन्हें महिला पुलिसकर्मियों के लिए चलंत शौचालय बताया गया.

स्टालिन ने बताया कि चेन्नई में वाहन के पास काफी संख्या में वाई-फाई कनेक्शन सक्रिय स्थिति में पाए गए.

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश के बावजूद कई स्ट्रॉन्ग रूम परिसरों में प्रोटोकॉल का घोर अभाव है, जहां ईवीएम रखे हुए हैं.’

स्टालिन ने बताया कि हर स्ट्रॉन्ग रूम प्रतिष्ठित कॉलेजों में हैं, जहां पर्याप्त प्रसाधन कक्ष उपलब्ध हैं.

राज्य में 234 विधानसभा सीटों पर छह अप्रैल को चुनाव हुए थे और मतगणना दो मई को होगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)