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केंद्रीय विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों में अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी के 8,773 पद ख़ाली

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में बताया कि देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विज्ञान संस्थान में अनुसूचित जाति श्रेणी में 2,608, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 1,344 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 4,821 पद रिक्त हैं.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विज्ञान संस्थान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग में कुल 8,773 आरक्षित श्रेणी के पद रिक्त हैं.

लोकसभा में एम सेल्वराज के प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पेश आंकड़ों से यह जानकारी मिली है.

देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, भारतीय विज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विज्ञान संस्थान में अनुसूचित जाति श्रेणी में 2,608 पद, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 1,344 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 4,821 पद रिक्त हैं.

लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश के 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति श्रेणी में 2,389 पद, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 1,199 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 4,251 पद रिक्त हैं.

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) में अनुसूचित जाति श्रेणी में 157 पद, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 88 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 231 पद रिक्त हैं.

इसी प्रकार भारतीय विज्ञान, शिक्षा और अनुसंधान संस्थान में अनुसूचित जाति श्रेणी में 28 पद, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 11 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 67 पद रिक्त हैं.

भारतीय विज्ञान संस्थान में अनुसूचित जाति श्रेणी में 34 पद, अनुसूचित जनजाति श्रेणी में 46 पद और अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में 272 पद रिक्त हैं.

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियुक्तियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (शिक्षक संवर्ग में आरक्षण) अधिनियम 2019 अधिसूचित किया गया था.

उन्होंने बताया कि इसके लागू होने के बाद सभी स्तरों पर अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण लागू किया गया है.

उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने का दायित्व केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर है, जो संसद के अधिनियमों के तहत सृजित स्वायत्त संगठन हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, प्रधान ने कहा, ‘इसके अलावा जून 2019 में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और डीम्ड टू बी विश्वविद्यालयों में संकाय की भर्ती के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए हैं, जिसमें चयन प्रक्रिया और भर्ती के लिए समय सीमा की रूपरेखा तैयार की गई है.’

उन्होंने कहा कि यूजीसी ने 31 जुलाई, 2019, 7 अगस्त, 2019, 5 सितंबर, 2019 और 22 अक्टूबर, 2019 को फिर से विश्वविद्यालयों से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था कि विश्वविद्यालय और साथ ही विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए.’

बता दें बीते 29 जुलाई को राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और उसके अधीनस्थ कार्यालयों, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक/तकनीकी/प्रबंधन संस्थानों में रिक्त पदों की जानकारी देते हुए प्रधान ने बताया था कि 41,421 स्वीकृत शिक्षण पदों में से 13,701 केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक/तकनीकी/प्रबंधन संस्थानों में रिक्त हैं.

इसी प्रकार स्वीकृत 61,624 अशैक्षणिक पदों में से 24,945 केंद्रीय विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक/तकनीकी/प्रबंधन संस्थानों में रिक्त हैं. जबकि शिक्षा मंत्रालय (मुख्य सचिवालय) में स्वीकृत गैर-शिक्षण पदों की संख्या 1,072 है, जिनमें से 347 रिक्त हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)