भारत

सच बाहर लाने के लिए फोन निगरानी से जुड़े पहलुओं की जांच की जानी चाहिए: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा के सहयोगी दलों के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने पेगासस प्रोजेक्ट के खुलासों की जांच की मांग की है. द वायर समेत दुनिया के 17 संस्थानों ने बताया था कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से ज़्यादा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं समेत 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग हुई या वे संभावित निशाने पर थे.

नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: भाजपा की अगुवाई वाली एनएडीए सरकार के सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते सोमवार को कहा कि फोन टैपिंग से जुड़े सभी पहलू की जांच की जानी चाहिए ताकि सच्चाई बाहर आ सके.

नीतीश कुमार भाजपा के सहयोगी दलों के ऐसे पहले नेता हैं जिन्होंने पेगासस प्रोजेक्ट के खुलासों की जांच की मांग की है. इसके तहत द वायर समेत दुनियाभर के 17 संस्थानों ने एक के बाद एक रिपोर्ट्स कर लीक हुए उस डेटाबेस में शामिल लोगों की जानकारी दी थी, जिनकी इजरायल स्थित एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी किए जाने की संभावना है.

एनएसओ ग्रुप का कहना है कि वे सिर्फ ‘प्रमाणित सरकारों’ को ही पेगासस स्पायवेयर बेचते हैं, वहीं भारत सरकार ने पेगासस को खरीदने को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है.

मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित ‘जनता के दरबार’ में मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान फोन टैपिंग से जुड़े सवाल के जवाब में कहा कि फोन टैपिंग की बात काफी दिनों से सामने आ रही है और इस पर पहले ही चर्चा हो जानी चाहिए थी.

उन्होंने कहा, ‘मेरी समझ से इससे जुड़े एक-एक पहलू को देखकर उचित कदम उठाया जाना चाहिए. फोन टैपिंग को लेकर संसद में कुछ सदस्यों ने अपनी बातें रखी हैं. इससे जुड़े सभी पहलू की जांच की जानी चाहिए ताकि सच्चाई बाहर आये.’

नीतीश ने कहा कि फोन टैपिंग को लेकर सरकार ने अपना जवाब संसद में दिया है.

14 जुलाई को मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में पेगासस मामले पर चर्चा की मांग कर रहे हैं. इसके कारण कई बार सदन को स्थगति किया गया है. बीते 30 जुलाई को संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि ‘यह कोई गंभीर मुद्दा नहीं है.’

बिहार मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आजकल तो ये सब कई तरीके से लोग करते हैं, इसलिए इन मामलों में एक-एक बात पर उचित कदम उठाना चाहिए. लेकिन क्या हुआ है, क्या नहीं हुआ है, ये संसद में कुछ लोग बोल रहे हैं और समाचार पत्रों में आ रहा है, तो उसी को देखते हैं हम लोग. लेकिन जो कुछ भी हुआ है उसकी पूरी तरह जांच करके ये पता लगाया जाना चाहिए कि किस तरह दूसरों के फोन को लोग सुन रहे हैं, या उस पर कब्जा कर रहे हैं. इसलिए मेरी समझ से निश्चित रूप से इस मामले में जांच होनी चाहिए, ताकि जो भी सच्चाई है वो सामने आए. यदि कोई किसी को डिस्टर्ब करने के लिए या परेशान करने के लिए ये सब करता है तो ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए.’

हालांकि जब इस मामले को संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने को लेकर सवाल किया गया तो नीतीश ने केंद्र का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने संसद में कुछ जवाब तो दिया है, और बाकी क्या चल रहा है, इसके बारे में हमें भी नहीं पता है.

राहुल ने पेगासस पर सरकार को घरेने की रणनीति पर विपक्षी नेताओं से चर्चा की

वहीं, पेगासस जासूसी मामले पर चर्चा की मांग कर रहे विपक्षी दलों के हंगामे के कारण संसद में बने गतिरोध के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर सरकार को घेरने और दबाव बनाने की रणनीति पर मंगलवार को चर्चा की.

राहुल गांधी के न्योते पर कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता नाश्ते पर कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में मिले.

बैठक में राहुल गांधी के अलावा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी, शिवसेना के नेता संजय राउत, राजद के मनोज झा और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए.

कांग्रेस नेता ने विपक्षी नेताओं के साथ नाश्ते पर ऐसे समय बैठक की है जब पेगासस और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर पिछले कई दिनों से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है. 19 जुलाई से मॉनसून सत्र आरंभ हुआ था. लेकिन, अब तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित रही है.

विपक्षी दलों का कहना है कि पेगासस जासूसी मुद्दे पर पहले चर्चा कराने के लिए सरकार के तैयार होने के बाद ही संसद में गतिरोध खत्म होगा. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए शुक्रवार को लोकसभा में कहा था कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है.

इससे पहले पिछले हफ्ते 14 दलों के नेताओं ने राज्यसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर ये घोषणा की थी कि वे तभी अपना विरोध प्रदर्शन बंद करेंगे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में इस मामले को लेकर चर्चा की जाएगी.

बता दें कि द वायर  की एक पड़ताल के मुताबिक, इजरायल की एक सर्विलांस तकनीक कंपनी एनएसओ ग्रुप के कई सरकारों के क्लाइंट्स की दिलचस्पी वाले ऐसे लोगों के हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक हुई एक सूची में 300 सत्यापित भारतीय नंबर हैं, जिन्हें मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, न्यायपालिका से जुड़े लोगों, कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों, अधिकार कार्यकर्ताओं आदि द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है.