नॉर्थ ईस्ट

अरुणाचल सीएम के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला दायर कराने वाले कार्यकर्ताओं पर राजद्रोह का केस

मुख्यमंत्री पेमा खांडू की आपत्तिजनक मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर करने के आरोप में बीते 20 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश जस्टिस फोरम के अध्यक्ष नबाम तगम समेत तीन लोगों को दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि मुख्य आरोपी के ख़िलाफ़ हल्की ज़मानती धाराएं लगाई गईं, जबकि नबाम तगम तथा उनके एक अन्य साथी के ख़िलाफ़ राजद्रोह का केस दर्ज किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू. (फोटो: पीआईबी)

नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दायर करने वाले कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया है.

इसी साल 20 जुलाई को राज्य की पुलिस ने दिल्ली पुलिस की एक स्पेशल टीम के साथ मिलकर सफदरगंज एनक्लेव के एक फ्लैट से अरुणाचल प्रदेश जस्टिस फोरम (एपीजेएफ) के अध्यक्ष नबाम तगम समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था.

पुलिस ने उन पर सीएम पेमा खांडू की आपत्तिजनक मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर करने का आरोप लगाया था.

हालांकि अब तगम ने बताया है कि पुलिस ने मुख्य आरोपी- किपा रोबनियांग- के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कुछ अन्य जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जबकि उन पर एवं उनके संगठन के एक अन्य साथी यमरा ताया पर धारा 124ए (राजद्रोह) और धारा 121ए (धारा 124 के तहत दंडनीय अपराध करने की साजिश) के आरोप लगाए गए हैं.

दरअसल सामाजिक कार्यकर्ता नबाम तगम ने मार्च महीने में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर भाजपा मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की सीबीआई जांच की मांग की थी. इसे लेकर 19 अप्रैल को जस्टिस आरएफ नरीमन (अब रिटायर्ड) की अगुवाई वाली पीठ ने पहली सुनवाई की थी.

उन्होंने कहा कि यही एक प्रमुख वजह है, जिसके चलते राज्य की पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर प्रताड़ित किया जा रहा है.

नबाम तगम ने उस दिन को याद करते हुए कहा, ‘हम तीनों को 20 जुलाई को दिल्ली के एक किराये वाले कमरे से सुबह 11-11:30 बजे के करीब उठाया गया था.आईपीएस अधिकारी और पुलिस अधीक्षक (विशेष जांच दल) रोहित राजबीर सिंह ने दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अधिकारियों के साथ चार सदस्यीय राज्य पुलिस टीम का नेतृत्व किया था. साकेत की स्थानीय अदालत द्वारा ट्रांजिट ऑर्डर देने से पहले उन्होंने हमें दो दिन के लिए दिल्ली में रखा. 22 जुलाई को हमें ईटानगर ले जाया गया.’

इस मामले के मुख्य आरोपी किपा रोबनियांग के साथ उनके संबंध के बारे में पूछे जाने पर कार्यकर्ता ने कहा, ‘उन्होंने पूछा था कि क्या वह मेरे और ताया के साथ कुछ दिन दिल्ली में रह सकते हैं. मैं मान गया क्योंकि मैं उन्हें लंबे समय से जानता हूं.’

तगम ने कहा, ‘किपा ने हमें बताया कि उन्हें अपनी बेटी की ऑनलाइन स्कूली शिक्षा के लिए एक मोबाइल फोन की जरूरत है, जिसके बिना उसे पढ़ाई में दिक्कत हो रही थी. तो, ताया ने उसके लिए एक हैंडसेट खरीदा और मैंने फोन के लिए एक सिम कार्ड खरीदा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘चूंकि हमने फोन और सिम कार्ड खरीदा था और कथित तौर पर किपा द्वारा इसका इस्तेमाल सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री की नग्न तस्वीर शेयर करने के लिए किया गया था, इसलिए पुलिस हमें इस मामले में फंसा रही है. उन्होंने दावा किया है कि हम इस अपराध में शामिल हैं, जो कि पूरी तरह से झूठ है.’

तगम ने कहा कि किपा राज्य भाजपा की सांस्कृतिक शाखा के संयोजक थे, लेकिन हाल ही में मुख्यमंत्री के कहने पर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था. तगम ने कहा, ‘वह इस कारण से मुख्यमंत्री से नाराज रहे होंगे.’

अरुणाचल प्रदेश जस्टिस फोरम के अध्यक्ष नबाम तगम.

राज्य भाजपा इकाई के शीर्ष सूत्रों ने तगम के इस दावे की पुष्टि करते हुए द वायर को बताया कि किपा राज्य भाजपा के सांस्कृतिक संयोजक थे.

उन्होंने कहा, ‘वह 20 वर्षों से अधिक समय से भाजपा के सदस्य थे. उन्होंने वर्षों पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ शुरुआत की थी. उन्होंने किरेन रिजिजू (अब केंद्रीय कानून मंत्री) के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम किया है. हमने सुना है कि वे बिना किसी नोटिस के पार्टी से निकाले जाने को लेकर गुस्से में थे और इसीलिए वॉट्सऐप ग्रुप में मुख्यमंत्री की मॉर्फ्ड फोटो शेयर किया था.’

तगम ने आगे कहा, ‘हम मामले में मुख्य आरोपी भी नहीं थे, लेकिन हम दोनों को 124ए के तहत राजद्रोही करार दिया गया. ताया और मैं भयावह परिस्थितियों में 14 दिनों के लिए पुलिस की हिरासत और अरुणाचल की केंद्रीय जेल में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में थे, लेकिन किपा को जेल से रिहा कर दिया गया था.’

उन्होंने कहा, ‘इससे केवल यह निष्कर्ष निकलता है कि हमारे खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई है, क्योंकि हमने मुख्यमंत्री के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मामला दर्ज किया था. ये बात हमने अपनी जमानत अर्जी में भी लिखा है.’

तगम की पत्नी टोको शीतल ने बीते आठ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दोनों की रिहाई की मांग की थी. उन्होंने विशेष तौर पर इस बात पर जोर दिया था कि पेमा खांडू के निर्देश पर ये कार्रवाई हुई है.

तगम ने कहा कि उनके सहित 26 नागरिक समाज संगठनों ने बीते 25 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना को पत्र लिखकर मामले की त्वरित सुनवाई के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की थी.

कुछ हफ्ते पहले तगम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी एक पत्र लिखा था, जिसमें खांडू और विधानसभा अध्यक्ष पासंग दोरजी सोना के खिलाफ ‘रिश्वत’ के विभिन्न आरोपों का उल्लेख किया गया था.

अरुणाचल प्रदेश की एक निचली अदालत में तगम और ताया की जमानत का विरोध करते हुए राज्य एसआईटी ने ‘मिशन 2021 कोर कमेटी’ नामक एक वॉट्सऐप ग्रुप का उल्लेख कर कहा कि ये दोनों इसके सदस्य हैं.

एसआईटी ने पापुम पारे जिले के युपिया में एक स्थानीय अदालत को बताया, ‘इस ग्रुप को राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री को सत्ता से हटाने के लिए बनाया गया था.’

चूंकि उस ग्रुप के एक सदस्य द्वारा एके-47 राइफल की एक तस्वीर अपलोड की गई थी, एसआईटी ने इस आधार पर दावा किया था कि इसे ‘ग्रुप द्वारा खरीदा गया होगा.’

इतना ही नहीं, पुलिस ने मुख्यमंत्री को सत्ता से बेदलखल करने की ‘साजिश’ के रूप में ताया और एक राज्य भाजपा नेता गोजेन गाडी, जिन्हें ‘खांडू के इशारे पर’ निलंबित कर दिया गया था, के बीच एक व्यापारिक लेन-देन को भी प्रस्तुत किया था.

वैसे इस मामले को लेकर तगम और ताया दोनों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन यदि उन्हें राज्य से कहीं भी बाहर जाना होगा तो उन्हें जांच अधिकारी से इजाजत लेनी होगी.

अरुणाचल प्रदेश जस्टिस फोरम के महासचिव यामरा ताया.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस नरीमन ने एपीजेएफ की याचिका को साल 2010 में दायर ऐसी ही दो लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया था, जिसमें खांडू के खिलाफ पैसों का हेरफेर करने और अपने परिवार को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है.

इन दो याचिकाओं में से एक ‘वालन्टेरी अरुणाचल सेना’ और दूसरी, गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी राहुल अग्रवाल द्वारा साल 2010 के गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई है, जिसमें न्यायालय ने खांडू के पिता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू तथा उनके भतीजे जंबे ताशी (अब भाजपा विधायक) के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त कर दिया था.

इस मामले को लेकर दोनों आरोपियों- खांडू और ताशी- ने कोर्ट में करीब-करीब एक जैसी दलील दी थी. उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने जान-बूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है और जरूरी पक्षों को इसमें शामिल नहीं किया गया है.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों को लेकर तीन फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने जांच की थी और उन्होंने कोई भी गड़बड़ी नहीं पाई. उन्होंने गुवाहाटी हाईकोर्ट के साल 2010 के उस फैसले का भी सहारा लिया, जिसमें ऐसे ही आरोपों को खारिज किया गया था.

दोरजी खांडू के खिलाफ प्रमुख रूप से राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता कोष और आपदा राहत कोष के तहत धन का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे.

इसके अलावा केंद्र सरकार की संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (एसजीआरवाई) के तहत राज्य को भेजे गए 24,800 मीट्रिक टन चावल के संबंध में फर्जी बिल बनाने और इसके जरिये 68.4 करोड़ रुपये का हेरफेर करने का आरोप लगा था.

बहरहाल तगम की याचिका पर 19 अप्रैल को सुनवाई होने के बाद इसे कम से कम 17 बार टाला जा चुका है. कोर्ट की रजिस्ट्री के मुताबिक, इस मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होनी है.

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