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जम्मू कश्मीर: आतंकी साज़िश के आरोप में एनआईए ने फोटो पत्रकार को गिरफ़्तार किया, परिवार हताश

जम्मू कश्मीर के फ्रीलांस फोटो पत्रकार मनन गुलज़ार डार को आतंकी साज़िश मामले में एनआईए ने गिरफ़्तार किया है. एनआईए ने इस महीने की शुरुआत में मनन के भाई हनन गुलज़ार डार को गिरफ़्तार किया था. परिवार का कहना है कि एक पखवाड़े से अधिक समय बीत गया है, लेकिन उन्हें नहीं पता कि वह ज़िंदा हैं या नहीं.

एनआईए द्वारा गिरफ्तार फोटो पत्रकार मनन गुलजार डार का कैमरा (फोटो: फैजान मीर)

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के युवा फ्रीलांस फोटो पत्रकार को आतंकी साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया है.

24 वर्षीय पत्रकार मनन गुलजार डार को बीते 10 अक्टूबर को राजधानी श्रीनगर के बटमालू इलाके के पुलिस स्टेशन में समन (बुलाया) किया गया था.

मनन गुलजार को पेशेवर तौर पर मुहम्मद मनन के नाम से जाना जाता है. उनका काम द गार्डियन जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में प्रकाशित हो चुका है.

पेशे से फोटो पत्रकार मनन गुलजार डार की इस साल जुलाई में श्रीनगर में मुठभेड़ के बाद खींची गईं तस्वीरों में से एक तस्वीर द गार्डियन के 20 फोटोग्राफ्स ऑफ द वीक सेक्शन में प्रकाशित की गई.

उनके पिता गुलजार अहमद डार ने द वायर  को बताया कि उन्होंने अपने बेटे को खुद पुलिस जांचकर्ताओं को सौंप दिया था, नई दिल्ली ले जाने से पहले एनआईए ने उनसे लगभग एक पखवाड़े तक श्रीनगर में पूछताछ की गई.

सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी गुलजार अहमद ने कहा, ‘हमें अखबारों के जरिये पता चला कि उसे गिरफ्तार किया गया है. एक पखवाड़े से अधिक समय बीत गया, लेकिन हमें नहीं पता कि वह जिंदा है या नहीं. पुलिस ने हमें बताया कि एनआईए ने उसे गिरफ्तार किया है और नई दिल्ली ले जाया गया है.’

एनआईए ने इस महीने की शुरुआत में मनन के भाई कॉलेज छात्र हनन गुलजार डार को गिरफ्तार किया था. पुलिस सूत्रों का कहना है कि इससे पहले आतंकी फंडिग मामले में हनन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

मनन की मां फहमीदा अख्तर ने कहा, ‘हमें लगा कि यह नियमित पूछताछ थी, क्योंकि पुलिस द्वारा इन दिनों कश्मीर से कई पत्रकारों को उठाया जा रहा है.’

कश्मीर में इस महीने की शुरुआत में संदिग्ध आतंकियों द्वारा निशाना बनाए गए अल्पसंख्यक समुदाय और प्रवासी कामगारों के (हत्या) मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत एनआईए द्वारा दर्ज किए गए मामले में गिरफ्तार 13 संदिग्धों में दोनों भाई (मनन और हनन) भी हैं.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने द वायर  को बताया कि युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देने और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए पाकिस्तान में रची साजिश का मनन हिस्सा थे.

एक अधिकारी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘वह शीर्ष आतंकी कमांडर अब्बास शेख का ‘ओवरग्राउंड’ वर्कर था. उसे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार किया गया था.’

गिरफ्तार किए गए लोगों में इस्लामिक स्टेट (आईएस) द्वारा 2017 में कश्मीर में किए गए पहले हमले के दौरान मारे गए श्रीनगर के आतंकी मुगीस अहमद मीर की बहन और सोबिया अजीज उर्फ मरियम अल कश्मीरी भी शामिल हैं.

आतंकी साजिश में गिरफ्तार अन्य संदिग्धों में आदिल अहमद वार, हिलाल अहमद डार, रउफ भट्ट, शाकिब बशीर, जामिन आदिल, हारिस निसार लांगू, कामरान अशरफ रेशी, रायिद बशीर और सुहैल अहमद ठोकर हैं.

ज्यादातर संदिग्ध श्रीनगर से हैं, दो कुपवाड़ा और एक दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले से हैं.

षड्यंत्र

एनआईए ने आईपीसी की धाराओं 120(बी) (आपराधिक साजिश रचने), 121(ए) (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 122 (युद्ध छेड़ने के इरादे से हथियार आदि इकट्ठा करना) और 123 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने में मदद करना या इसे सुगम बनाना) और यूएपीए की कई धाराओं के तहत नई दिल्ली के पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है.

हमलों के 36 घंटों के भीतर एफआईआर दर्ज की गई. इन हमलों में स्कूल की एक महिला सिख प्रिंसिपल और अल्पसंख्यक समुदायों के तीन अन्य सदस्यों सहित कुल पांच लोगों की मौत हुई थी. मारे गए लोगों में कश्मीर के लोकप्रिय कश्मीरी पंडित केमिस्ट माखन लाल बिंद्रू भी शामिल हैं.

एनआईए ने आठ लोगों की पांच दिवसीय ट्रांजिट रिमांड की मांग करते हुए शनिवार (23 अक्टूबर) को श्रीनगर में अदालत का रुख किया था. इन आठ लोगों में मनन और सोबिया श्रीनगर से हैं. इनमें से दो उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले से हैं.

सूत्रों का कहना है कि अन्य आरोपियों को भी रिमांड पर लिया गया है.

अदालत के समक्ष पेश किए गए दस्तावेजों में एनआईए ने दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिली कि लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, अल बद्र, द रेजिस्टेंस फ्रंट, पीपुल अगेंस्ट फासिस्ट फोर्सेज और इस तरह के अन्य संगठन जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए शारीरिक और साइबर तरीके से साजिश रच रहे हैं.

एनआईए ने बताया कि संदिग्ध जम्मू एवं कश्मीर और दिल्ली स्थित अन्य स्थानों पर आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं. संदिग्धों के घर की तलाशी के दौरान एनआईए ने दावा किया कि उन्हें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, आपत्तिजनक दस्तावेज आदि बरामद किए हैं.

एनआईए का कहना है कि ये संदिग्ध सक्रिय आतंकियों (जेल में बंद भी) के संपर्क में हैं.

एनआईए ने श्रीनगर की अदालत को बताया, ‘वे जम्मू एवं कश्मीर के मुस्लिम समुदाय के युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे हैं और देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.’

आरोपों में फंसाने का डर

13 लोगों की गिरफ्तारी के साथ एनआईए ने जम्मू एवं कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तानी साजिश का पता लगाने का दावा किया है. इसे ‘कश्मीरफाइट’ नाम के ब्लॉगपोस्ट में भी बताया गया था, जिसे हाल ही में अमेरिका आधारित एक प्रकाशन मंच द्वारा हटा दिया गया था.

फोटोग्राफी में डिप्लोमा कोर्स पूरा कर चुके कॉमर्स अंडरग्रैजुएट मनन का परिवार एनआईए के आरोपों से हैरान है.

मनन की मां ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि उनका अपराध क्या है. बीते 15 दिनों से हमें एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन जाना पड़ा, लेकिन हमें उसे (मनन) देखने की अनुमति नहीं मिली.’

मनन के पिता गुलजार ने कहा, ‘हम उसे अतिरिक्त कपड़े भी नहीं दे सके.’

हनन को मंगलवार (26 अक्टूबर) को दिल्ली में एनआईए की अदालत के समक्ष पेश किया गया. वहीं, फिलहाल पुलिस हिरासत में मनन को शनिवार को अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा.

बता दें कि मनन की गिरफ्तारी कश्मीर में स्वतंत्र पत्रकारों पर हुई कार्रवाई के बीच हुई है, इनमें से तीन के खिलाफ आतंकरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है, जबकि कई दर्जन पत्रकारों से उनके पेशेवर कार्य के लिए पूछताछ की गई. कुछ मामलों में पूछताछ कई घंटों तक हुई.

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने ‘कश्मीरफाइट’ ब्लॉगपोस्ट मामले में हाल ही में चार पत्रकारों- शौकत मोट्टा, शाह अब्बास, मीर हिलाल और अजहर कादरी को हिरासत में लिया था. उनके मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे गैजट जब्त किए गए. अभी तक उनके खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाए गए हैं.

मनन के एक सहयोगी ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि मनन ने 2019 में फोटो पत्रकार के तौर पर काम करना शुरू किया था.

उन्होंने कहा, ‘हमने एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन के लिए एक वीडियो शूट किया था. हालांकि, उन्होंने मनन को कोई बाईलाइन नहीं दी. हमने इस प्रोजेक्ट पर मिलकर काम किया और इससे हुई कमाई को साझा किया.’

मनन के पिता गुलजार का कहना है, ‘उसे फोटोग्राफी पसंद है. मुझे हमेशा लगा कि यह पार्ट टाइम काम है. वह उच्च शिक्षा हासिल करना चाहता था, लेकिन हमारी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि हम उसे निजी कॉलेज में पढ़ाने का खर्च उठा सकें.’

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)