गोलीबारी में नागरिकों की मौत: नगालैंड पुलिस ने सुरक्षा बलों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज

सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत के बाद स्थिति को तनावपूर्ण देखते हुए नगालैंड के मोन ज़िले में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. नगालैंड पुलिस ने सेना के 21वें पैरा मिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की है. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के वाहन पर अंधाधुंध गोलीबारी की जिससे कई ग्रामीणों की मौत हो गई.

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सशस्त्र बलों द्वारा कथित तौर पर मारे गए 14 लोगों को उनके रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नगालैंड के मोन शहर में छह दिसंबर 2021 को श्रद्धांजलि दी. (फोटो: पीटीआई)

सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में 14 नागरिकों की मौत के बाद स्थिति को तनावपूर्ण देखते हुए नगालैंड के मोन ज़िले में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है. नगालैंड पुलिस ने सेना के 21वें पैरा मिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की है. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के वाहन पर अंधाधुंध गोलीबारी की जिससे कई ग्रामीणों की मौत हो गई.

सशस्त्र बलों द्वारा कथित तौर पर मारे गए 14 लोगों को उनके रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नगालैंड के मोन शहर में छह दिसंबर 2021 को श्रद्धांजलि दी. (फोटो: पीटीआई)

कोहिमा: नगालैंड पुलिस ने सोमवार को सेना के 21वें पैरा मिलिट्री फोर्स के खिलाफ नागरिकों पर गोलीबारी में कथित संलिप्तता के लिए मोन जिले के टिज़िट में हत्या का मामला दर्ज किया, जबकि कई आदिवासी संगठनों ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई के विरोध में बंद का आह्वान किया.

प्राथमिकी टिज़िट पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी उबी पोसेहू केज़ो द्वारा दर्ज की गई है.

अधिकारियों ने बताया कि मोन जिले में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण है.

इस बीच नगालैंड के मोन जिले में आम नागरिकों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मरने वालों की संख्या को लेकर सोमवार को भ्रम की स्थिति बनी रही.

शीर्ष आदिवासी संगठन, ‘कोन्यक यूनियन’ ने दावा किया कि घटना में 17 लोग मारे गए, लेकिन बाद में संगठन ने मृतकों की संख्या को संशोधित कर 14 कर दिया.

हालांकि, पुलिस शुरू से दावा करती रही कि शनिवार और रविवार को हुई गोलीबारी की अलग-अलग घटनाओं में 14 लोग मारे गए.

गोलीबारी की पहली घटना जिसमें छह लोग मारे गए थे, तब हुई जब सेना के जवानों ने शनिवार (चार दिसंबर) शाम को एक पिकअप वैन में घर लौट रहे कोयला खदान के कर्मचारियों को प्रतिबंधित संगठन ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-के’ (एनएससीएन-के) के युंग आंग गुट से संबंधित उग्रवादी समझ लिया.

जब मजदूर अपने घरों को नहीं लौटे तो स्थानीय युवक और ग्रामीण उनकी तलाश में गए और सेना के वाहनों को घेर लिया. इसके बाद हुई झड़प में एक सैनिक की मौत हो गई और कई वाहन जला दिए गए. सैनिकों ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई.

पुलिस ने कहा कि दंगा रविवार (पांच दिसंबर) दोपहर तक खिंच गया, जब गुस्साई भीड़ ने यूनियन के कार्यालयों और इलाके में असम राइफल्स के शिविर में तोड़फोड़ की और इसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी. सुरक्षा बलों ने हमलावरों पर जवाबी गोलीबारी की, जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई.

वहीं कोन्यक यूनियन के सदस्यों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने हमलावरों पर जवाबी गोलीबारी की, जिसमें कम से कम दो और लोग मारे गए, लेकिन पुलिस के मुताबिक इस घटना में एक ही व्यक्ति की मौत हुई.

नगालैंड में नागरिकों की हत्या के विरोध में छह दिसंबर 2021 को गोलीबारी में नागरिकों की मौत के खिलाफ कुछ संगठनों ने मोन शहर में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था. (फोटो: पीटीआई)

नगालैंड पुलिस ने सेना के 21वें पैरा मिलिट्री फोर्स के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की है. आईपीसी की धारा 302, 307 और 34 के तहत हत्या, हत्या के प्रयास और सभी के सामान्य इरादे को आगे बढ़ाने के लिए कई व्यक्तियों द्वारा किए गए आपराधिक कृत्य से संबंधित मामला दर्ज किया गया है.

शिकायत में जिले के तिजिट पुलिस थाने ने कहा, ‘चार दिसंबर को करीब साढ़े तीन बजे कोयला खदान के मजदूर एक वाहन से तिरु से अपने पैतृक गांव ओटिंग लौट रहे थे. ऊपरी तिरु और ओटिंग के बीच लोंगखाओ पहुंचने पर सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के वाहन पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसके परिणामस्वरूप कई ग्रामीणों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए.’

शिकायत में यह भी कहा गया कि घटना के समय कोई पुलिस गाइड नहीं था और न ही सुरक्षा बलों ने गाइड की मांग की थी.

प्राथमिकी में कहा गया, ‘इसलिए, यह स्पष्ट है कि सुरक्षा बलों का इरादा नागरिकों की हत्या करना और उन्हें घायल करना था.’ शिकायत में अधिकारियों से अपराधियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया.

इस बीच आदिवासी संगठनों, नागरिक संस्थाओं और छात्र संगठनों ने अचानक एक कदम उठाते हुए सोमवार को राज्य भर में छह से 12 घंटे तक की विभिन्न अवधियों का बंद आहूत किया.

प्रभावशाली नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने पांच दिनों के शोक की घोषणा की है, साथ ही आदिवासियों से इस अवधि के दौरान किसी भी उत्सव में भाग नहीं लेने के लिए कहा है.

अधिकारियों ने कहा कि 28 घायलों में से छह की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को हुई गोलीबारी के संबंध में नगालैंड के आयुक्त रोविलातुओ मोर और नगालैंड पुलिस के डीजीपी टी. जॉन लोंगकुमेर द्वारा तैयार एक रिपोर्ट उसी दिन देर शाम दायर की गई है.

इसमें उल्लेख किया गया है कि रिपोर्ट तैयार किए जाते समय स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मोन शहर में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा आदेश लागू किए गए हैं, जहां स्थिति तनावपूर्ण और अस्थिर बना हुआ है.

सूत्रों ने बताया कि सोमवार सुबह सोम में 14 नागरिकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया.

बीते रविवार को सेना ने घटना की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ का आदेश देते हुए बताया था कि इस दौरान एक सैन्यकर्मी की मौत हो गई और कई अन्य सैनिक घायल हो गए. इसने कहा था कि यह घटना और उसके बाद जो हुआ, वह ‘अत्यंत खेदजनक’ है तथा लोगों की मौत होने की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उच्चतम स्तर पर जांच की जा रही है.

अधिकारियों ने बताया था कि प्रदेश सरकार ने आईजीपी नगालैंड की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है.

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड में सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी 14 लोगों की मौत की घटना पर खेद प्रकट करते हुए सोमवार को कहा कि इसकी विस्तृत जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है तथा सभी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में ऐसे किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो.

मालूम हो कि नगालैंड के मोन जिले के ओटिंग और तिरु गांवों के बीच यह घटना उस समय हुई. गोलीबारी की पहली घटना तब हुई जब चार दिसंबर की शाम कुछ कोयला खदान के मजदूर एक पिकअप वैन में सवार होकर घर लौट रहे थे.

मालूम हो कि 14 नागरिकों की हत्या के कारण पूर्वोत्तर से सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम, 1958 यानी आफस्पा को वापस लेने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है.

नगालैंड के मोन जिले में सशस्त्र बलों द्वारा कथित तौर पर मारे गए 14 लोगों की मौत के बाद भड़के दंगों में पांच दिसंबर 2021 को सुरक्षाकर्मियों के वाहनों में आग लगा दी गई थी. (फोटो: पीटीआई)

पहले ही कई नागरिक संगठन और इलाके के राजनेता वर्षों से अधिनियम की आड़ में सुरक्षा बलों पर ज्यादती का आरोप लगाते हुए इस कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

नागरिक समूह, मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्वोत्तर क्षेत्र के नेता वर्षों से इस ‘कठोर’ कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं और इस कानून की आड़ में सुरक्षा बलों पर ज्यादती करने का आरोप लगाते हैं. आफस्पा अशांत क्षेत्र बताए गए इलाकों में सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां प्रदान करता है.

आफस्पा ‘अशांत क्षेत्रों’ में तैनात सेना और केंद्रीय बलों को कानून के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को मारने, गिरफ्तारी और बिना वारंट के किसी भी परिसर की तलाशी लेने का अधिकार देता है. साथ ही केंद्र की मंजूरी के बिना अभियोजन और कानूनी मुकदमों से बलों को सुरक्षा प्रदान करने की शक्ति देता है.

आदिवासी संगठन ने 17 लोगों की मौत का दावा किया, पुलिस अपने आंकड़ों पर अड़ी

नगालैंड में सोमवार को भी माहौल तनावपूर्ण बना रहा, जहां एक शीर्ष आदिवासी संगठन ‘कोन्यक यूनियन’ ने दावा किया कि मोन जिले में नागरिकों पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई, जबकि पुलिस के मुताबिक 14 लोग ही मारे गए हैं.

आदिवासी निकायों, नागरिक समाजों और छात्र संगठनों ने अचानक एक कदम उठाते हुए सोमवार को राज्य भर में छह से 12 घंटे तक की विभिन्न अवधियों के लिए बंद बुला लिया.

प्रभावशाली नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने पांच दिनों के शोक की घोषणा की है, साथ ही आदिवासियों से इस अवधि के दौरान किसी भी उत्सव में भाग नहीं लेने के लिए कहा है.

अधिकारियों ने कहा कि 28 घायलों में से छह की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और उपमुख्यमंत्री वाई पैटन रविवार को वापस लौट आए हैं और अब स्थिति का जायजा लेने के लिए मोन के लिए रवाना हो गए हैं.

मजदूरों पर गोलीबारी के बाद हुई झड़प में उत्तराखंड का जवान शहीद

नई टिहरी: नगालैंड के मोन जिले में मजदूरों पर गलत पहचान की वजह से शनिवार को सुरक्षाबलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी के बाद हुए बलवे में शहीद हुए जवान की पहचान उत्तराखंड के रहने वाले गौतम लाल के रूप में हुई है.

टिहरी जिले के कीर्तिनगर की उपजिलाधिकारी सोनिया पंत ने सोमवार को बताया कि उन्हें गौतम लाल के नगालैंड में शहीद होने की सूचना मिली है.

जिले के नौली गांव के निवासी गौतम लाल पैराशूट रेजीमेंट की 21वीं बटालियन में पैराट्रूपर के पद पर तैनात थे. पांच भाइयों में सबसे छोटे गौतम लाल 2018 में सेना में भर्ती हुए थे.

शहीद गौतम लाल के पिता रमेश लाल और भाई सुरेश ने बताया कि सेना ने रविवार को उन्हें फोन पर उनके घायल होने की सूचना दी थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)