राजनीति

यूपी: चुनाव से पहले श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का इस्तीफ़ा, सपा में शामिल होंगे

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा के विधायक दल का नेता रहते हुए अचानक इस्तीफ़ा देकर भाजपा का दामन थामा था. अब उन्होंने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि उन्होंने पांच साल तक पीड़ा में रहकर भाजपा में कठिन परिस्थितियों में काम किया. उनके इस्तीफ़े बाद बांदा के तिंदवारी से विधायक बृजेश प्रजापति और तिलहर विधायक रोशन लाल वर्मा ने भी भाजपा छोड़ दी है.

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उनके साथ की तस्वीर ट्विटर पर डाली है. (फोटो साभार: ट्विटर/अखिलेश यादव)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के चौथे ही दिन मंगलवार को राज्य सरकार के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

मौर्य ने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को भेजा है. हालांकि, राजभवन के सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

स्‍वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होंगे. मंगलवार को त्यागपत्र देने के बाद मौर्य के साथ सपा प्रमुख और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी तस्‍वीर ट्विटर पर साझा की तथा उनका स्‍वागत किया.

स्‍वामी प्रसाद मौर्य के त्यागपत्र की प्रति सोशल मीडिया पर मंगलवार दोपहर बाद तेजी से वायरल होने लगी.

मौर्य ने राज्यपाल को संबोधित अपने त्यागपत्र में लिखा है, ‘मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ जी के मंत्रिमंडल में श्रम, सेवायोजन एवं समन्वय मंत्री के रूप में विपरीत परिस्थितियों व विचारधारा में रहकर भी बहुत ही मनोयोग के साथ उत्तरदायित्व का निर्वहन किया है, किंतु दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों के प्रति घोर उपेक्षात्मक रवैये के कारण उत्तर प्रदेश के मंत्रिमंडल से इस्तीफा देता हूं.’

इस्तीफा देने के बाद मौर्य ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) नीत सरकार ने बहुतों को झटका दिया है और अगर मैं मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर उसे झटका दे रहा हूं तो इसमें नया क्या है.’

भाजपा छोड़ने की वजह पूछने पर उन्होंने कहा, ‘मैंने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को भेजे हुए पत्र में उन सभी कारणों का उल्‍लेख किया है जिनके कारण भाजपा और मंत्रिमंडल से इस्‍तीफा दे रहा हूं.’

वहीं, एक अन्य सवाल के जवाब में उन्‍होंने कहा, ‘भाजपा के जिस नेता ने मुझसे बातचीत की, उनसे मैंने ससम्‍मान बातचीत की. मैंने आज भी सुबह उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बंसल (सुनील बंसल, प्रदेश महामंत्री संगठन) से बात की.’

उन्‍होंने कहा, ‘मेरी नाराजगी स्‍वाभाविक है. पार्टी के उपेक्षात्‍मक रवैये के कारण यह निर्णय लेना पड़ा है और मुझे इसका दुख नहीं है. नाराजगी की वजह जहां बतानी थी, बता दी.’

इस्तीफे से भाजपा पर असर के संबंध में सवाल करने पर मौर्य ने कहा, ‘मेरे इस्‍तीफे का असर 2022 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद आपको नजर आएगा. 10 मार्च को जो भी होगा, आपके सामने होगा.’

बेटा-बेटी को सपा से टिकट मिलने के सवाल पर उन्‍होंने कहा, ‘बात बेटा-बेटी की नहीं, विचारधारा की है. मैं (डॉक्टर भीमराव) आंबेडकर की विचारधारा का हूं और पांच साल तक पीड़ा में रहकर भाजपा में कठिन परिस्थितियों में काम किया.’

उन्‍होंने दावा किया कि अगले एक-दो दिन में भाजपा के कई और विधायक पार्टी का साथ छोड़ेंगे.

मौर्य के त्यागपत्र के बाद अखिलेश यादव ने मंगलवार को ट्वीट किया, ‘सामाजिक न्याय और समता-समानता की लड़ाई लड़ने वाले लोकप्रिय नेता श्री स्वामी प्रसाद मौर्य जी एवं उनके साथ आने वाले अन्य सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का सपा में ससम्मान हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन. सामाजिक न्याय का इंकलाब होगा- बाइस में बदलाव होगा.’

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव से पहले स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का विधायक दल का नेता रहते हुए अचानक त्‍यागपत्र देकर भाजपा का दामन थाम लिया था.

मौर्य को भाजपा ने पिछड़ों के प्रमुख नेता के रूप में आगे किया था और मंगलवार को उनके इस कदम से भाजपा के खेमे में खलबली मच गई.

उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी प्रसाद से बैठकर बात करने की अपील की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, ‘स्वामी प्रसाद मौर्य जी ने किन कारणों से इस्तीफा दिया है, मैं नहीं जानता हूं. उनसे अपील है कि बैठकर बात करें, जल्दबाजी में लिए हुए फैसले अक्सर गलत साबित होते हैं.’

अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की मौर्य बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले 68 वर्षीय स्वामी प्रसाद मौर्य  मूल रूप से प्रतापगढ़ जिले के चकबड़ गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने 1980 में सक्रिय रूप से राजनीति में कदम रखा और लोकदल के नेता के रूप में उनकी पहचान बनी.

बाद में जनता दल का गठन होने के बाद वे 1991 से 1995 तक उत्तर प्रदेश में जनता दल के महासचिव पद पर रहे. इसके बाद वे बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए.

मौर्य पहली बार 1996 में बसपा के टिकट पर डलमऊ (रायबरेली) क्षेत्र से विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए थे और 1997 में मायावती के नेतृत्व वाली भाजपा-बसपा गठबंधन सरकार में खादी ग्रामोद्योग मंत्री बने.

मौर्य 2001 में बसपा विधानमंडल दल के नेता बने. 2002 विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर वह दूसरी बार विधायक चुने गए. मायावती ने 2007 में उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया और वे बसपा सरकार में राजस्व मंत्री बने. मौर्य बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

बसपा ने 2009 में पडरौना (कुशीनगर) विधानसभा सीट पर उपचुनाव में मौर्य को उम्मीदवार बनाया और चुनाव जीतने पर उन्हें पंचायती राज मंत्री का पद दिया. 2012 में मौर्य फ‍िर पडरौना से चुनाव जीते और बसपा ने उन्हें विधानसभा में पार्टी का नेता बनाया.

22 जून, 2016 को अचानक एक पत्रकार वार्ता में मौर्य ने बसपा प्रमुख मायावती पर गंभीर आरोप लगाते हुए बसपा छोड़ने की घोषणा की और भाजपा में शामिल हो गए.

भाजपा के टिकट पर 2017 में वह पांचवीं बार पडरौना विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए और उन्‍हें योगी आदित्यनाथ की सरकार में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री बनाया गया. स्‍वामी प्रसाद मौर्य की पुत्री संघमित्रा मौर्य बदायूं से भारतीय जनता पार्टी की सांसद हैं.

मौर्य के बाद बांदा के विधायक बृजेश प्रजापति और तिलहर विधायक रोशन लाल वर्मा ने भी भाजपा छोड़ी

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद बांदा जिले के तिंदवारी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बृजेश कुमार प्रजापति और शाहजहांपुर जिले के तिलहर से भाजपा विधायक रोशन लाल वर्मा ने भी मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

ऐसा माना जाता है कि प्रजापति मौर्य के खेमे के हैं. तिंदवारी विधायक बृजेश कुमार प्रजापति के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) मनोज कुमार ने मंगलवार को बताया, तिंदवारी विधायक बृजेश प्रजापति ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है.’

उन्होंने बताया कि प्रजापति ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को अपना इस्तीफा भेजा है.

प्रजापति ने 2012 का चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा था, लेकिन हार गए थे. वह 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले मौर्य के साथ ही बसपा से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए थे.

वहीं, शाहजहांपुर से मिली सूचना के अनुसार, रोशन लाल वर्मा ने भाजपा पर दलितों, पिछड़ों और वंचितों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए त्यागपत्र दिया है.

वर्मा ने कहा, ‘मैंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है. मैं स्‍वामी प्रसाद मौर्य के साथ रहूंगा. हम लोगों की शिकायतें उठाते थे तो उन्हें नहीं सुना जाता था, हमें नहीं सुना जाता था. हमने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह से शिकायत की लेकिन कुछ नहीं हुआ.’

उन्होंने यह भी बताया कि वे सपा में शामिल हो रहे हैं. वर्मा ने कहा, ‘भाजपा नीत सरकार में दलित व पिछड़े अल्पसंख्यक कमजोर लोगों की लगातार उपेक्षा हो रही थी. बेरोजगारी बढ़ी है.’

वर्मा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दिखा रही है कि रोजगार दिए गए हैं जबकि यह सब फर्जी है, इसी से क्षुब्ध होकर उन्होंने पार्टी छोड़कर सपा का दामन थामा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)