नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: ‘नगा समझौते से प्रभावित नहीं होगी पूर्वोत्तर की क्षेत्रीय अखंडता’

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में नगालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम, असम, मिज़ोरम, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख समाचार.

नगालैंड की राजधानी कोहिमा के किसामा गांव में बीते नौ दिसंबर को हॉर्नबिल उत्सव के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह. (फोटो: पीटीआई)

नगालैंड की राजधानी कोहिमा के किसामा गांव में बीते नौ दिसंबर को हॉर्नबिल उत्सव के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह. (फोटो: पीटीआई)

शोखुवी/नगालैंड: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते गुरुवार को कहा कि नगा उग्रवाद मुद्दे पर अंतिम समझौता करते समय पूर्वोत्तर राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

वह अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित होने की आशंका को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे. केंद्र सरकार और नगा उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम के बीच शांति समझौते से क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित होने की आशंका है.

सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘किसी को कोई चिंता या आशंका नहीं होनी चाहिए. किसी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता प्रभावित नहीं होगी.’

उग्रवादी समूह की महत्वपूर्ण मांग अरुणाचल प्रदेश, असम और मणिपुर के नगा बहुल इलाकों का एकीकरण करना है जिसका तीनों राज्यों ने पुरज़ोर विरोध किया है.

गौरतलब है कि तीनों राज्यों में इस समय भाजपा की सरकार है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले सप्ताह कहा था कि नगालैंड इतिहास बनाने की दहलीज़ पर खड़ा है जहां नगा राजनीतिक मुद्दे पर जल्द अंतिम समझौता किया जाएगा.

पूर्वोत्तर में 70-80 फीसद उग्रवाद ख़त्म हो गया है: गृहमंत्री

शोखूवी/नगालैंड: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते बृहस्पितवार कहा कि पूर्वोत्तर में उग्रवाद की समस्या करीब 75-80 फीसद खत्म हो गई है.

यहां असम राइफल्स ट्रेनिंग सेंटर में आयोजित सैनिक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश का सबसे पुराना अर्धसैनिक बल अनुकरणीय दोहरी सेवा कर रहा है. एक तरफ वह 1642 किलोमीटर लंबी भारत-म्यांमार खुली सीमा की चौकसी का काम करता है तो दूसरी तरफ उग्रवाद विरोधी अभियानों में भी अहम भूमिका निभाता है.

उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बता सकता हूं कि पूर्वोत्तर में उग्रवाद की समस्या 75 से 80 फीसद तक खत्म हो चुकी है.’

सिंह ने दोनों देशों की खुली सीमा की चौकसी के असम राइफल्स के चुनौतीपूर्ण कार्य को भी रेखांकित किया.

उन्होंने कहा, ‘यह आपके लिए मुश्किल काम है क्योंकि म्यांमार एक मित्र देश है. आपको कूटनीतिक संवेदनशीलता का भी ध्यान रखना होता होगा जिससे हमारे संबंधों में किसी तरह का गतिरोध न आए.’

नगा लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है केंद्र: राजनाथ

किसामा/नगालैंड: केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्र सरकार नगा लोगों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के वास्ते अपना सर्वश्रेष्ठ देने को लेकर प्रतिबद्ध है.

सिंह ने यहां हॉर्नबिल उत्सव में कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार नगा लोगों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की ओर प्रतिबद्ध है.’

राज्य की राजधानी कोहिमा से करीब 12 किलोमीटर दूर नगा विरासत गांव में गृह मंत्री की यह टिप्पणी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की उस टिप्पणी के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा कि नगालैंड इतिहास बनाने की दहलीज़ पर है क्योंकि नगा राजनीतिक मुद्दे के अंतिम समझौते पर जल्द ही पहुंचा जाएगा और शांति हासिल की जाएगी.

नगालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्य ने 19 सितंबर को कहा था कि विवादास्पद नगा मुद्दे को अगले एक या दो महीने के भीतर हल किया जाएगा.

नगालैंड के मुख्यमंत्री टीआर ज़ेलियांग ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सात दशक से चल रहे नगा राजनीतिक मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाए.

जेलियांग ने कहा कि सभी नगा उग्रवादी समूहों का साथ आना एक स्थायी समाधान निकालने के लिए अच्छा मौका है.

वार्षिक पर्यटन उत्सव में नगा लोगों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार भारत-म्यांमार सीमा पर मुक्त आवागमन फिर से शुरू करने की प्रक्रिया में है ताकि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को कोई परेशानी ना हो.

उन्होंने कहा, ‘सीमा पर व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि सीमा पर गैरकानूनी तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाई जाए.’

नगालैंड की सीमा म्यांमार के साथ लगती है.

मुक्त आवागमन के तहत भारत और म्यांमार की सीमा पर रह रहे लोगों को बगैर यात्रा दस्तावेज के एक-दूसरे के स्थानों पर जाने की अनुमति होगी.

सिंह ने कहा कि नगालैंड के पास पूर्वोत्तर राज्य का शांति, स्थिरता, समृद्धि और वृद्धि के पथ पर नेतृत्व करने का मौका है. गृह मंत्री ने कहा कि नगालैंड को भविष्य की ओर देखना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘अपने समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों और प्रतिभावान लोगों के साथ नगालैंड के पास अनंत संभावनाएं हैं. शांति सुनिश्चित करने से आर्थिक वृद्धि, नौकरियों और समृद्धि की क्षमताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है.

पूर्वोत्तर में आधुनिकीकरण परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगा भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की मुक्त एवं खुली हिंद प्रशांत रणनीति को आगे बढ़ाते हुए भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम का गठन किया गया है.

इसके तहत जापान की मदद से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक आधुनिकीकरण से जुड़ी विशिष्ठ परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा.

विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि 14 सितंबर 2017 को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम गठित करने के संबंध में ज्ञापन पत्र पर हस्ताक्षर किया गया था.

इस फोरम की पहली संयुक्त बैठक विदेश मंत्रालय और जापान दूतावास के बीच बीते मंगलवार को हुई. इस बैठक की सह अध्यक्षता विदेश सचिव डॉ. एस. जयशंकर और भारत में जापान के राजदूत केन्झी हिरामात्सु ने की.

इसमें भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की मुक्त एवं खुली हिंद प्रशांत रणनीति को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई. इसमें यह विचार किया गया कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक आधुनिकीकरण से जुड़ी विशिष्ठ परियोजनाओं को कैसे आगे बढ़ाया जाएगा.

इसके तहत पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी, आधारभूत संरचना के विकास, औद्योगिक संपर्क के साथ पर्यटन, संस्कृति एवं खेल से जुड़ी गतिविधियों के ज़रिये दोनों देशों के लोगों के बीच सम्पर्क बढ़ाने की पहल शामिल है.

इन गतिविधियों में विदेश मंत्रालय और जापान दूतावास के अलावा भारत की ओर से पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय, वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, गृह मंत्रालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्य शामिल हैं.

जापान की ओर से इसमें जापान इंटरनेशनल कोआॅपरेशन एजेंसी, जापान वाय कारोबार संगठन, जापान फाउंडेशन और जापान नेशनल टूरिज़्म आॅर्गनाइजेशन शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान जो समझौते हुए थे उनमें भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना भी शामिल है.

दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में दक्षतापूर्ण और प्रभावकारी रूप से कनेक्टिविटी बढ़ाने और विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर सहमति बनी थी.

इसके अलावा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के विकास के लिए इंडिया-जापान एक्ट ईस्ट फोरम बनाने को लेकर भी दोनों देशों के बीच समझाौता हुआ था.

यह पहल तब काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब भारत पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास एवं आधारभूत परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहता है.

त्रिपुरा: सरकार 10,323 शिक्षकों की नौकरी बचाने की कोशिश कर रही है

अगरतला: त्रिपुरा के शिक्षा मंत्री तपन चक्रवर्ती ने बीते शुक्रवार को कहा कि सरकार 10,323 शिक्षकों की नौकरी बचाने की कोशिश कर रही है. उच्चतम न्यायालय के आदेश की वजह से 31 दिसंबर के बाद उनकी बर्खास्तगी हो जाएगी.

त्रिपुरा उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति स्वप्न चंद्र दास की खंड पीठ ने मई 2014 में दोषपूर्ण नियुक्ति प्रणाली के कारण 10,323 शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश दिए थे.

उच्चतम न्यायालय ने मार्च 2017 में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था.

ऑल त्रिपुरा 10,323 टीचर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बीते बृहस्पतिवार को शिक्षा मंत्री से मिलकर नौकरी की सुरक्षा की मांग की थी.

चक्रवर्ती ने संवाददाताओं से कहा, हमने शिक्षकों से कहा है कि हम उनकी नौकरी बचाने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक विशेष याचिका दायर की है जिस पर 11 दिसंबर को सुनवाई हो सकती है.

त्रिपुरा में शिक्षकों का आंदोलन: रेल और रोड जाम ख़त्म

धलाई ज़िले के सिंधुकुमारपाड़ा में नौकरी की सुरक्षा की मांग करते हुए शिक्षकों के एक धड़े ने शुक्रवार से रेलवे ट्रैक और असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया था जिसे पुलिस ने शनिवार को खुलवा दिया.

कार्यवाहक पुलिस अधीक्षक (पुलिस नियंत्रण) हरकुमार देबवर्मा ने कहा कि जाम दोपहर करीब दो बजे हटाया गया और अब वाहन चलने शुरू हो गए हैं.

सीआरपीसी की धारा 144 के तहत दोपहर करीब डेढ़ बजे निषेधाज्ञा लगाई गई और राजमार्ग तथा रेल पटरियों पर लोगों के इकट्ठा होने को अवैध करार दिया गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आंदोलनकारी शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने बताया कि किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. करीब 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया और एक सरकारी स्कूल के अंदर रखा गया.

असम: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पंचायत प्रमाण पत्र नागरिकता के सबूत नहीं

(फोटो: पीटीआई/nrcassam.nic.in)

(फोटो: पीटीआई/nrcassam.nic.in)

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने बीते मंगलवार को कहा कि ग्राम पंचायत सचिव या कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी प्रमाण पत्र तब तक नागरिकता का सबूत नहीं हैं जब तक वह किसी भारतीय नागरिक की पीढ़ी से संबंध को स्थापित ना कर दे.

शीर्ष अदालत ने कहा कि ग्राम पंचायत सचिव की तरफ से जारी प्रमाण पत्र किसी विवाहित महिला का आवास एक गांव से दूसरे गांव स्थानांतरित होने की जानकारी भर है.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने कहा, केवल प्रमाण पत्र किसी भी तरीके से प्रमाण पत्र धारक के नागरिकता के दावे को सत्यापित नहीं करता है.

पीठ ने कहा, इस तरह का सबूत तभी हो सकता है अगर दावा करने वाले और उस पीढ़ी से जुड़ा व्यक्ति (जो नागरिक रहा हो) का संबंध सत्यापित होता है.

अदालत ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार कर दिया जिसने ग्राम पंचायत सचिव की तरफ से जारी इस तरह के प्रमाण पत्रों को अवैध क़रार दिया और आदेश के खिलाफ अपील को एक हद तक अनुमति दे दी.

कई लोगों और संगठनों ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी जिसने इस तरह के प्रमाण पत्रों के माध्यम से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) में नाम शामिल करने के दावे को अवैध करार दिया था.

पीठ ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत सचिव या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की तरफ से जारी प्रमाण पत्र तभी मान्य होंगे जब इस तरह के प्रमाण पत्र धारक और जिस व्यक्ति की पीढ़ी का होने का दावा किया जा रहा है, उनमें कोई जुड़ाव स्थापित किया जाए.

इसने कहा, प्रमाण पत्र का तभी सीमित उपयोग किया जा सकेगा अगर उपयुक्त जांच एवं पुष्टिकरण के माध्यम से यह सही पाया जाता है.

उच्चतम न्यायालय गुवाहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र नागरिकता के दावे के लिए वैध और मान्य दस्तावेज़ नहीं है.

ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल करते हुए करीब 48 लाख दावे किए गए हैं. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के मसौदे को 31 दिसंबर से पहले प्रकाशित करना है.

सिक्किम: सीएम के भाई ने सरकार की आलोचना कर बनाई नई पार्टी

गंगटोक: सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के छोटे भाई आरएन चामलिंग ने बीते बुधवार को सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) सरकार के प्रदर्शन की आलोचना की और नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान किया.

पश्चिम सिक्किम के श्रीबदाम में एक जनसभा के दौरान  सिक्किम राज्य मंच नाम की नई पार्टी बनाने का ऐलान करते हुए आरएन चामलिंग ने कहा कि उनका संगठन सरकार और व्यवस्था दोनों में बदलाव के लिए संघर्ष करेगा.

उन्होंने कहा कि एसडीएफ वर्ष 1994 से 23 साल के निरंतर शासन के दौरान लोगों को सामान की आपूर्ति करने में विफल रहा है.

आरएन चामलिंग ने रंगांग-यंगयान सीट से विधानसभा उपचुनाव जीता था. यह सीट से मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2014 में इस्तीफा देने की वजह से खाली हुई थी क्योंकि वह दो सीटों से चुनाव जीते थे.

असम: उपराष्ट्रपति ने मीडिया से समाचार और विचार को न जोड़ने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू. (फोटो: पीटीआई)

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू. (फोटो: पीटीआई)

गुवाहाटी: उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बीते रविवार को मीडिया से आग्रह किया कि वह समाचार को रंग न दें और उसके विचार संपादकीय पृष्ठों तक ही सीमित रहने चाहिए.

नायडू यहां असमी मीडिया समूह प्रतिदिन-सादिन द्वारा आयोजित एक पुरस्कार समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने उल्लेख किया कि आदर्श अखबार या आदर्श समाचार चैनल को समाज, सामाजिक समस्याओं और क्षेत्र व देश के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘सभी समाचार संगठनों को कुछ बुनियादी सिद्धांतों का पालन करना चाहिए- समाचार को सनसनीखेज न बनाएं, समाचार और विचार को न जोड़ें, कोई पेड न्यूज़ न हो, और भारतीय संस्कृति तथा परंपराओं को बढ़ाएं.’

उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘समाचार को रंग न दें. एक संपादकीय पृष्ठ होता है जहां विचार स्वतंत्रता से व्यक्त किए जा सकते हैं, लेकिन समाचार की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए.’

उन्होंने उल्लेख किया कि मीडिया संगठनों को विकास के लिए और आतंकवाद के खात्मे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि इसका   हमारी संस्कृति और परंपरा में कोई स्थान नहीं है.

नायडू ने कहा,   कोई भी धर्म आतंकवाद का समर्थन नहीं करता और हर कोई जानता है कि पड़ोसी देश हमारे देश में आतंकवाद की मदद, सहयोग कर रहा है, इसे विा पोषित कर रहा है और बढ़ावा दे रहा है.

उन्होंने कहा कि मीडिया को किसी जनसांख्यिकी बदलाव को मजबूती के साथ सामने लाना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि देश की भारतीयता और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित न हो.

उपराष्ट्रपति ने मीडिया से यह भी आग्रह किया कि वह संप्रेषण के लिए मातृभाषा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करे.

मणिपुर: एचआईवी संक्रमण के पीछे अब यौन संपर्क मुख्य कारण

इम्फाल: मणिपुर में एचआईवी/एड्स संक्रमण फैलने के पीछे अब यौन संपर्क मुख्य कारण बन गया है. राज्य में इससे पहले नशे के लिए प्रयोग होने वाली सुईयों का कई लोगों पर इस्तेमाल करने के कारण एचआईवी संक्रमण ज़्यादा फैलता था.

मणिपुर एड्स कंट्रोल सोसायटी (एमएसीएस) द्वारा वर्ष 2016-17 के लिए किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक राज्य में एचआईवी/एड्स के फैलाव के 78 प्रतिशत मामलों में एचआईवी विषाणु अब यौन संबंधों के कारण एक से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है.

सर्वेक्षण में बताया गया कि 15 प्रतिशत मामले सुईयों के साझा इस्तेमाल के कारण देखने को मिले जबकि शेष सात प्रतिशत मामले परिजन से बच्चों में फैलने वाले मामले हैं.

एमएसीएस की परियोजना निदेशक वेलेंटिना अरामबम ने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा को बताया, ‘जनसाधारण में पिछले दस सालों में एचआईवी या एड्स, यौन संबंधों के कारण फैलने लगा है जबकि पहले यह विषाणु सुईयों के साझा इस्तेमाल के कारण फैलता था.’

राज्य में अगस्त 2017 तक एचआईवी/एड्स से प्रभावित होने वाले 24,457 मामले सामने आए हैं.

90 के दशक के दौरान मणिपुर में एचआईवी/एड्स के मामले बहुत ज़्यादा बढ़ गए थे और उस समय पैदा हुए बच्चे अब वयस्क हो गए हैं और यौन रूप से सक्रिय हैं.

अरामबम ने कहा कि ऐसे पुरुष या महिलाएं इनकार और विषाणु फैलने के डर से अपने साथी को इस संक्रमण के बारे में नहीं बताते.

उन्होंने बताया कि सघन अभियान चलाने के कारण सुईयों की साझेदारी से फैलने वाले संक्रमण में कमी आई है.

अरामबम ने बताया, ‘एक समय में एचआईवी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या के लिहाज़ से पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ऊपर रहने वाला मणिपुर अब पांचवें स्थान पर आ गया है.’

मेघालय: कांग्रेस अध्यक्ष डीडी लपांग नहीं लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री डीडी लपांग. (फोटो: पीटीआई)

मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री डीडी लपांग. (फोटो: पीटीआई)

शिलॉन्ग: मेघालय में सत्तारूढ़ कांग्रेस को एक और झटका लगा है. दरअसल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य के चार बार मुख्यमंत्री रहे डीडी लपांग ने अगले साल की शुरुआत में होने वाला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है.

गौरतलब है कि एक महीने पहले उप मुख्यमंत्री आरसी लालू और पार्टी की वरिष्ठ नेता रोशन वरज्री ने भी इसी तरह के इरादे ज़ाहिर किए थे. ये दोनों कैबिनेट मंत्री भी हैं.

85 वर्षीय लपांग ने अपने फैसले की जानकारी देने के लिए बीते रविवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी.

लपांग ने एक बयान में कहा, ‘उन्होंने मेरी कुशलता की कामना की और कहा कि मुझे पार्टी को एकजुट बनाए रखना चाहिए तथा अपना अनुभव और सलाह कार्यकर्ताओं तथा नेताओं से साझा करूं.’

राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में पदोन्नति पर चर्चा के लिए बुलाई गई एक बैठक के दौरान लपांग ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी सीपी जोशी से भी मुलाकात की.

उन्होंने रविवार को सोनिया से मिलने से पहले अपने फैसले के बारे में मुख्यमंत्री मुकुल संगमा को जानकारी दी थी.

गौरतलब है कि लपांग चार बार मुख्यमंत्री रहे, लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.

असम: युवती का जला हुआ शव बरामद, तीन गिरफ़्तार

गुवाहाटी: शहर में एक कॉलेज छात्रा का जला हुआ शव उसके सहपाठी के घर के गुसलखाने में पाया गया. मामले में सहपाठी और उसके परिवार के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

गुवाहाटी पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त पश्चिम अमिताभ बसुमतारी ने बीते मंगलवार को बताया कि सोमवार शाम लड़की को जली हुई अवस्था में पाया गया. अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया.

पीड़िता के सी. दास कॉमर्स कॉलेज में पांचवें सेमेस्टर में पढ़ती थी और पल्टन बाज़ार इलाके में रहती थी. वह शांतिपुरा इलाके में स्थित उसकी सहपाठी के घर के गुसलखाने में जली हुई हालत में मिली.

बासुमतारी ने कहा, प्रारंभिक जांच के बाद हमने दोस्त, उसकी मां और बहन को संभावित हत्या में उनकी संदिग्ध भूमिका के लिए गिरफ़्तार किया.

कॉलेज के प्राचार्य घनश्याम नाथ ने कहा कि युवती एक प्रतिभाशाली छात्रा थी और सोमवार को ही कॉलेज की परीक्षा में शामिल हुई थी.

उधर, कॉलेज के छात्रों ने भरालू पुलिस थाने जाकर दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पलटन बाज़ार इलाके में रहने वाले लोगों के एक समूह ने इस घटना के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन किया.

अरुणाचल प्रदेश: सीएम ने सियांग नदी में प्रदूषण पर चिंता जताई

चीन की सियांग नदी अरुणाचल प्रदेश में आकर ब्रह्मपुत्र नदी कहलाती है. (फोटो साभार: यूट्यूब)

चीन की सियांग नदी अरुणाचल प्रदेश में आकर ब्रह्मपुत्र नदी कहलाती है. (फोटो साभार: यूट्यूब)

इटानगर: अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य की सियांग नदी में नेफेलोमीट्रिक टर्बिडिटी यूनिट (एनटीयू) की ज्यादा मात्रा में होने पर चिंता जाहिर की है.

पेमा ने कहा कि उनकी सरकार केंद्र से लगातार संपर्क में है ताकि नई दिल्ली इस मुद्दे को चीन के समक्ष उठा सके.

नेफेलोमीट्रिक टर्बिडिटी यूनिट एनटीयू किसी तरल पदार्थ में निलंबित कणों का सांद्रण है.

दक्षिणी तिब्बत से यारलुंग सांगपो के रूप में बहने वाली सियांग नदी असम में ब्रह्मपुत्र नदी कहलाती है .

पेमा इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर सकते हैं.

पासीघाट एडवांस लैंडिंग ग्राउंड में बीते शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में पेमा ने कहा कि उनकी सरकार ने सियांग नदी में पानी की गुणवत्ता में अचानक हुए बदलाव और पानी में एनटीयू की ज़्यादा मात्रा होने का मुद्दा उठाया है. पानी में एनटीयू की मात्रा ज़्यादा होने के कारण राज्य में जलीय जीव-जंतु और यहां तक कि मवेशी भी मारे जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री को पासीघाट में आपदा प्रबंधन के संसदीय सचिव कलिंग मोयोंग, लोकसभा सांसद निनांग एरिंग और उपायुक्त टेमियो टाटक ने स्थिति से अवगत कराया. मोयोंग स्थानीय विधायक हैं.

एरिंग ने हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सियांग नदी के पानी की गुणवत्ता में अचानक आए बदलाव का मुद्दा चीनी सरकार के सामने उठाने का अनुरोध किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Categories: नॉर्थ ईस्ट, भारत, राजनीति

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