नॉर्थ ईस्ट

नॉर्थ ईस्ट डायरी: असम में इंसान-हाथी टकराव चरम पर, इस साल 70 हाथी व 48 लोगों की मौत

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के प्रमुख समाचार.

A herd of elephants cross a road that passes through the flooded Kaziranga National Park in the northeastern state of Assam, India, July 12, 2017. Picture taken July 12, 2017. REUTERS/Anuwar Hazarika

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

गुवाहाटी: असम में इस साल इंसान-हाथी के बीच टकराव ख़तरनाक स्तर तक पहुंच गया और इससे संरक्षणवादियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं साथ ही राज्य सरकार इस मुद्दे से निपटने के लिए कदम उठाने के वास्ते बाध्य हो गई है.

वन विभाग के मुताबिक, इस साल 70 हाथी मारे गए हैं जिसके पीछे ट्रेन की चपेट में आने से लेकर ज़हर देने और करंट लगने तक जैसे कारण शामिल हैं.

अप्राकृतिक तरीके से 48 हाथियों की मौत हुई हैं. हालांकि, संरक्षणवादियों का दावा है कि यह आंकड़ा 70 तक जा सकता है. घायल हाथी अक्सर पड़ोसी राज्यों में भटक जाते हैं और यहां तक कि वे भूटान और बांग्लादेश चले जाते हैं.

वन विभाग के एक अनुमान के मुताबिक, इस साल नवंबर तक हाथियों के कुचले जाने के कारण कुल 48 लोगों की मौत हुई है.

शुष्क मौसम के दौरान जब पशु अपने ठिकानों से भोजन और पानी की तलाश में बाहर निकलते हैं तो इंसान के हताहत होने के ज्यादातर मामले सामने आते हैं.

असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोनितपुर ज़िले में पांच हाथियों के एक ट्रेन की चपेट में आने की हालिया घटना पर चिंता व्यक्त की है और वन विभाग को संकटों से निपटने के लिए ठोस उपाय करने के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाथियों की मौतों की संख्या में बढ़ोतरी गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में हाथियों के नए इलाकों में जाने के मामले दिखाई दे रहे हैं.

पर्यावरण एवं वन मंत्री प्रमिला रानी ब्रह्मा ने उल्लेख किया कि उनके मंत्रालय ने इंसान-हाथी संघर्ष का समाधान करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं. मानव आबादी बढ़ने, वन क्षेत्रों के अतिक्रमण और हाथियों के मार्गों भटकने के कारण हाल के वर्षों में इन संघर्षों में बढ़ोतरी देखने को मिली है.

त्रिपुरा: पत्रकार शांतनु भौमिक हत्या मामले में राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस

पत्रकार शांतनु भौमिक. (फोटो साभार: फेसबुक/शांतनु भौमिक)

पत्रकार शांतनु भौमिक. (फोटो साभार: फेसबुक/शांतनु भौमिक)

अगरतला: त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार, केंद्र और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को नोटिस जारी करके जवाब मांगा कि टेलीविजन पत्रकार शांतनु भौमिक की हत्या मामले की जांच सीबीआई से क्यों नहीं कराई जानी चाहिए.

पत्रकार की 20 सितंबर को उस समय हत्या कर दी गई थी जब वह इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट आॅफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) द्वारा एक प्रदर्शन कवर करने पश्चिमी त्रिपुरा ज़िले के मंडाई गए थे.

पत्रकार के पिता साधन भौमिक ने रिट याचिका दायर करके सीबीआई जांच की मांग की. इस याचिका को बीते मंगलवार को सुनवाई के लिए रखा गया.

मुख्य न्यायाधीश टी. वाईफेई और न्यायमूर्ति एस. तलापात्रा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील सम्राट कर भौमिक की दलीलों पर गौर करने के बाद नोटिस जारी किए.

त्रिपुरा के महाधिवक्ता बिजन चंद्र दास ने कहा कि अदालत ने तीनों पक्षों को नोटिस जारी किए हैं. उन्होंने कहा कि इस याचिका पर 20 दिसंबर को फिर से सुनवाई होगी.

मिज़ोरम दक्षिण एशियाई देशों के लिए प्रवेशद्वार जल्द बनेगा: मोदी

Prime Minister Narendra Modi inaugurated crucial connectivity and power projects in Mizoram and Meghalaya to accelerate development in the northeastern states, a focus area of his government's Act East Policy. PTI

मिज़ोरम में तुईरियल हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

आइज़ोल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार की एक्ट ईस्ट नीति जल्द ही मिज़ोरम को दक्षिण एशियाई देशों का प्रवेश द्वारा बना देगी.

उन्होंने राजधानी आइज़ोल को म्यांमार के सित्वे बंदरगाह को जोड़ने वाली कालदान मल्टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना का उद्घाटन किया और कहा कि इससे राज्य को व्यापक स्तर पर फायदा होगा.

मोदी ने तुईरियल पनबिजली परियोजना भी राष्ट्र को समर्पित की.

उन्होने कहा, ‘पूर्वोत्तर राज्यों में विकास को लेकर अटल जी के कार्यकाल में बहुत गंभीर प्रयास हुए थे. अटल जी कहते थे आर्थिक सुधार का एक बड़ा मकसद है क्षेत्रीय भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना. इस दिशा में उन्होंने काफी कदम भी उठाए थे. 2014 में हमारी सरकार बनी तो एक बार फिर इस क्षेत्र को, हम सरकार की नीतियों और फैसलों में आगे लेकर आए हैं.’

मोदी ने कहा, ‘मैंने तो एक नियम बनाया है कि हर 15 दिन में कैबिनेट का कोई ना कोई मंत्री उत्तर पूर्व के राज्यों का दौरा ज़रूर करेगा. ये भी नहीं होगा कि सुबह आए, दिन में किसी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और शाम को वापस चला जाए. मेरी इच्छा थी कि मंत्रिमंडल के मेरे साथी यहां रुककर, आपके बीच रहकर आपकी आवश्यकताओं को समझें, उनके मुताबिक अपने मंत्रालयों में नीतियां बनाएं.’

मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने बुनियादी सुविधाओं के अंतर को पाटने के लिए पूर्वोत्तर विशेष बुनियादी ढांचा योजना की शुरुआत की है. उन्होंने कहा कि योजना के तहत अगले तीन वर्षों में केंद्र 5,300 करोड़ रुपये प्रदान करेगा.

मिज़ोरम अतिरिक्त बिजली वाला तीसरा राज्य बना: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि सिक्किम और त्रिपुरा के बाद मिज़ोरम पूर्वोत्तर का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है जिसके पास अतिरिक्त बिजली है .

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर के लाभ के लिए चलाई जा रही केंद्रीय योजनाएं अब गति पकड़ रही हैं और उनकी सरकार क्षेत्र में विकास के लिए प्रतिबद्ध है.

प्रधानमंत्री ने राज्य में 60 मेगावॉट की तुईरियल पनबिजली परियोजना का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘60 मेगावॉट की तुईरियल पनबिजली परियोजना के पूरा होने और इसके लोकार्पण के साथ ही हमने मिज़ोरम के इतिहास में मील का एक महत्वपूर्ण पत्थर पार कर लिया है.’

मोदी ने कहा कि इस परियोजना के आरंभ होने के साथ ही मिजोरम पूर्वोत्तर का ऐसा तीसरा राज्य बन गया है जिसके पास अतिरिक्त बिजली है.

उन्होंने कहा, ‘पनबिजली परियोजना से हर साल 25.1 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होगी और राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस परियोजना का पूरा होना जारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए हमारी प्रतिबद्धता को जाहिर करता है. इससे पूर्वोत्तर के विकास का नया दौर शुरू हुआ है.’

मोदी ने कहा कि तुईरियल परियोजना को वर्ष 1998 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने मंज़ूरी दी थी और और यह मिज़ोरम में सफलतापूर्वक आरंभ होने वाली केंद्र की पहली बड़ी परियोजना है.

मिज़ोरम: प्रधानमंत्री से अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का अनुरोध

आइज़ोल: मिज़ोरम की सिविल सोसाइटी और छात्र संगठनों के एक समूह ने बीते शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि खास तौर पर बांग्लादेशी चकमा शरणार्थियों सहित सभी अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जाए.

मोदी की यहां की यात्रा के दौरान एनजीओ समन्वय समिति ने उन्हें सौंपे एक ज्ञापन में दावा किया कि राज्य में चकमा आबादी की दशकीय वृद्धि 1981 से 1991 के बीच 200.47 प्रतिशत थी.

ज्ञापन में कहा गया है कि जब आपने 2014 में आम चुनाव से पहले असम का दौरा किया था, तब आपका ज़ोर अवैध प्रवासियों के विषय पर था और आपने हमें आश्वस्त किया था कि आपकी सरकार देश से विदेशियों को वापस भेजने के लिए काम करेगी.

भागवत ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में आरएसएस के संगठनात्मक कार्य की समीक्षा की

mohan bhagwat reuters

संघ प्रमुख मोहन भागवत. (फोटो: रॉयटर्स)

अगरतला: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में संगठन के कार्य की को समीक्षा की. संघ के एक पदाधिकारी ने यह जानकारी दी.

संघ प्रमुख मोहन भागवत पांच दिवसीय दौरे के तहत बीते शुक्रवार को त्रिपुरा पहुंचे. संघ प्रमुख के अगरतला में एक जनसभा को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है. गौरतलब है कि यहां संघ की बैठक काफी मायने रखती है क्योंकि वाम मोर्चा शासित त्रिपुरा में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होना है.

संघ प्रचारक मनोरंजन प्रधान ने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा को बताया कि चार प्रांतों के आरएसएस से संबद्ध सभी बड़े संगठन तीन दिवसीय समीक्षा बैठक में उपस्थित थे, जो शनिवार से शुरू हुई.

उन्होंने कहा कि भागवत ने संघ पदाधिकारियों के साथ संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा की और प्रथम चरण में उन्होंने पूर्वोत्तर के हालात की समग्र रूप से समीक्षा की.

उन्होंने बताया कि बाद में प्रांतों पर चर्चा हुई. संघ ने अपने संगठन को क्षेत्र में चार प्रांतों में बांट रखा है- मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दक्षिण असम.

बता दें कि भाजपा और आरएसएस वाम शासित त्रिपुरा में अगली सरकार बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है.

पूर्वात्तर के तीन राज्यों- मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में फरवरी में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन तीनों राज्यों में विधानसभा की 60-60 सीटें हैं.

त्रिपुरा: तृणमूल छोड़ने वाले छह विधायकों को भाजपा विधायक के तौर पर मान्यता 

अगरतला: त्रिपुरा में 2013 के विधानसभा चुनावों में खाता खोलने में विफल रहने वाली भाजपा के अब छह विधायक हो गए हैं. विधानसभा अध्यक्ष आरसी देबनाथ ने तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले छह विधायकों को भगवा दल के विधायक के तौर पर मान्यता दे दी है.

एक शीर्ष अधिकारी ने बीते रविवार को बताया कि ये छह विधायक कांग्रेस की टिकट पर जीते थे और 2016 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. इस वर्ष आठ अप्रैल को एक बार फिर पाला बदलते हुए वे भाजपा में आ गए.

विधानसभा के सचिव बी. मजूमदार ने कहा, विधानसभा अध्यक्ष रमेन्द्र चन्द्र देवनाथ बीते शनिवार को इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि विधायकों ने तृणमूल कांग्रेस से सभी संबंध तोड़ लिए और भाजपा में शामिल हो गए और उन्हें भाजपा विधायक के तौर पर मान्यता दी गई है.

60 सदस्यीय विधानसभा में अब माकपा नीत वाम मोर्चा की 51 सीट, कांग्रेस की तीन और भाजपा की छह सीट हो गई है.

ये छह विधायक हैं सुदीप राय बर्मन, आशीष कुमार साहा, दीबा चंद्र हरांगखाल, विश्वबंधु सेन, प्राणजीत सिंह राय और दिलीप सरकार.

वहीं भाजपा ने विधायकों को मान्यता देने में विलंब के लिए विधानसभा अध्यक्ष की आलोचना की.

भाजपा प्रवक्ता मृणाल कांति देब ने कहा, उन्होंने आठ नवम्बर को सदन में मान्यता :भाजपा सदस्य के तौर पर: के लिए आवेदन दिया था. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विस्तृत कानूनी पड़ताल के बाद उन्हें मान्यता दी जाएगी, संभवत: वह प्रक्रिया में विलंब करना चाहते थे.

अरुणाचल प्रदेश: अन्ना ने कहा, भ्रष्टाचार के ख़ात्मे के लिए लोकायुक्त गठित हो

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे. (फोटो: पीटीआई)

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे. (फोटो: पीटीआई)

इटानगर: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को अरुणाचल प्रदेश में सभी क्षेत्रों से भ्रष्टाचार ख़त्म करने के लिए तुरंत लोकायुक्त का गठन करने की वकालत की.

भ्रष्टाचार विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने ‘अन्ना का सत्याग्रह’ के नाम से आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सभी राज्यों के दौरे के बाद उनकी यात्रा 23 मार्च को नई दिल्ली में विशाल धरने के साथ समाप्त होगी.

अनेक राज्यों में उनकी यात्रा लोगों से बातचीत करने के लिए निकाली गई थी, ताकि वहां विकास और शिकायतों के बारे में जाना जा सके.

80 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, ‘राज्य की राजधानी की गड्ढे वाली सड़कें, जो भूस्खलन के कारण बहुत खतरनाक हो गई हैं और बिना तारों के खड़े बिजली के खंभे विकास के स्तर को दिखाते हैं.‘’

हजारे ने कहा, ‘प्रत्येक राज्य में छोटी-मोटी समस्याएं होती हैं, जिसे संबंधित सरकार हल कर सकती है, लेकिन आज के दिनों में इन्हें नकारना ही शासन की पहचान बन गई है.’ उन्होंने कहा, ‘लोगों की भागीदारी के बगैर विकास नहीं हो सकता है.’

मेघालय: एक हज़ार से ज़्यादा बच्चों के जन्म में मदद करने वाली 80 वर्षीय नर्स सेवानिवृत्त

एक हज़ार से ज़्यादा बच्चों के जन्म में मदद करने वाली मेघालय की नर्स केयिक मुखिम. (फोटो साभार: द शिलॉन्ग टाइम्स)

एक हज़ार से ज़्यादा बच्चों के जन्म में मदद करने वाली मेघालय की नर्स केयिक मुखिम. (फोटो साभार: द शिलॉन्ग टाइम्स)

शिलॉन्ग: मेघालय के पूर्वी खासी पहाड़ी ज़िले के दूरस्थ गांवों में 62 सालों से एक हज़ार से ज़्यादा बच्चों के जन्म में मदद देने वाली और आपात स्थितियों में लोगों की मदद करने वाली 80 वर्षीय नर्स केयिक मुखिम अंतत: अपनी इच्छा से सेवानिवृत्त हो गईं.

एक नर्स और दाई केयिक मुखिम (80) पूर्वी खासी पहाड़ी ज़िले के दूरदराज़ के एक गांव की रहने वाली हैं और उन्होंने उम्र संबंधी समस्याओं के कारण स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली है.

केयिक को उनके इलाके के लोग प्यार से कोंग केयिक के नाम से बुलाते हैं. उन्होंने इस वर्ष जून तक खारांग रूरल सेंटर (केआरसी) में अपनी सेवाएं दीं.

केआरसी की प्रबंधन समिति ने शनिवार को उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया था जहां उनके बच्चे और अन्य कर्मचारी भी मौजूद थे.

कोंग केयिक ने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा को बताया, ‘बढ़ती उम्र अब मेरा साथ नहीं दे रही है और मुझे यह ज़िम्मेदारी अब नए लोगों को देनी होगी जिन पर मुझे यकीन है कि वह गांव में गरीब और ज़रूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए काम जारी रखेंगे.’

उन्होंने इन वर्षों में यहां पर सुरक्षित प्रसव के काम में महत्पूर्ण योगदान किया. उन्हें केआरसी की तरफ से कुछ नकदी, एक स्मृति चिह्न और एक प्रशस्ति पत्र दिया गया.

मानवीय कार्यकर्ता एनी मार्गरेट बार ने इस संस्थान की स्थापना की थी. कोंग कियेक उन चुनिंदा छात्रों में से थीं जिन्हें बार ने वर्ष 1952 में इस संस्थान में शामिल किया था.

नगालैंड: मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग कैबिनेट में छह नए मंत्री शामिल

नगालैंड के मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग. (फोटो: पीटीआई)

नगालैंड के मुख्यमंत्री टीआर जेलिआंग. (फोटो: पीटीआई)

कोहिमा: नगालैंड के मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग ने बीते शनिवार को अपने मंत्रिमंडल में छह नए चेहरों को शामिल किया. इन नए मंत्रियों को उन छह लोगों की जगह शामिल किया गया है जिन्हें हाल ही में मंत्रिमंडल से हटाया गया था.

राज्यपाल पीबी आचार्य ने यहां राजभवन में नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. नए मंत्रियों के कार्यभार की घोषणा अभी नहीं की गई है.

मंत्रिमंडल में शामिल किए गए ये मंत्री एनपीएफ के विधायक एसआई जमीर, वाई विखेहो स्वू, पी. लोंगोन, कुझोलुजो निएनो और सीएल जॉन और भाजपा के पी. पाइवांग कोनयाक हैं.

नवंबर 2015 से राज्य के सभी विधायक नगा पीपल्स फ्रंट (एनपीएफ) नीत सत्तारूढ़ नगालैंड जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा हैं.

विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं जिसमें एक सीट रिक्त है. नगालैंड विधानसभा का कार्यकाल मार्च, 2018 में खत्म हो रहा है.

जेलियांग ने 13 दिसंबर को चार मंत्रियों को हटाया था. इन चार मंत्रियों में गृह मंत्री वाई. पटोन, स्कूली शिक्षा और संसदीय कार्य मंत्री तोखेहो येपथोमी, पीडब्ल्यूडी सड़क और पुल मंत्री नीकीसली निकी किरे और पर्यावरण मंत्री नैबा करोनू शामिल थे. इसके बाद शुक्रवार रात दो और मंत्रियों हटाया गया था. इनमें से एक मंत्री भाजपा का भी था.

हटाए गए इन मंत्रियों पर जेलियांग सरकार को कथित तौर पर गिराने के लिए अभियान चलाने का आरोप है.

त्रिपुरा: भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पार्क का उद्घाटन

अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने शनिवार को अगरतला से करीब 130 किमी. दूर स्थित दक्षिण त्रिपुरा ज़िले के चोट्टाखोला में भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पार्क का उद्घाटन किया. सरकार ने कहा कि यह पार्क त्रिपुरा और बांग्लादेश की मित्रता का ऐतिहासिक गवाह है.

उन्होंने कहा, ‘लंबे समय तक, जब भी बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के इतिहास की चर्चा की जाएगी, तब चोट्टाखोला कैंप से लड़ने वाले बांग्लादेश के मुक्ति योद्धाओं के बलिदान को याद किया जाएगा. मैं मुक्ति संग्राम के योद्धाओं के बलिदान को सलाम करता हूं.’

सरकार ने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साहसिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि त्रिपुरा ने पूरे दिल से इस मुक्ति संग्राम का समर्थन किया था.

उल्लेखनीय है कि 20 गुणा 20 के क्षेत्रफल में बने इस पार्क में सात छोटी पहाड़ियां और त्रिशना वन्य अभयारण्य के करीब एक झील शामिल हैं. इस पार्क की आधारशिला नवंबर 2010 में बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश मंत्री दिपु मोनी ने रखी थी.

थेम्स नदी का कूड़ा साफ करने के लिए असम के व्यक्ति ने बनाई साइकिल

नई दिल्ली: साहसिक कार्य करने में रुचि रखने वाले असम के ध्रुव बरूआ ने प्लास्टिक प्रदूषण के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से बांस से एक ऐसी विशेष साइकिल बनाई जिसे उन्होंने कूड़ा-कचरा साफ करने के लिए ब्रिटेन की थेम्स नदी में चलाया.

उन्होंने लेचालाडे, ग्लूकेस्टेरशायर से लंदन के निकट टावर ब्रिज तक सितंबर में नौ दिनों तक करीब 241 किलोमीटर तक साइकिल चलाई और प्लास्टिक की बोतलें, कप और गिलास, चॉकलेट रैपर, दूध की बोतलें और चिकन के पैकेट जैसी चीज़ें इकट्ठा की. उन्होंने प्रतिदिन कूड़े की दो टोकरी इकट्ठा की.

असम के धेमाजी ज़िले के रहने वाले और अब लंदन में बस गए ध्रुव ने समाचार एजेंसी पीटीआई/भाषा से बातचीत में कहा, ‘यह सब अचानक नहीं हुआ. यह एक नियमित चलने वाली प्रक्रिया थी. मैंने हमेशा साहसिक कार्य किए हैं लेकिन ऐसे कार्य उद्देश्य के साथ किए हैं.’

35 वर्षीय ध्रुव पहले एक कॉरपोरेट प्रबंधन सलाहकार थे और अब वह एक व्यवसायी हैं. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने बांस से एक साइकिल बनाई.

उन्होंने कहा, बांस ब्रिटेन और वियतनाम का था. मैंने इसे टुकड़ों में काटा और इटली से पहियों वाले एक बेडे़ का इस्तेमाल किया.

उन्होंने कहा, लोगों में इस साइकिल को देखने के लिए उत्सुकता है और कई लोग उन्हें रोककर उनसे साइकिल के बारे में बात करते हैं. इसलिए मैं उनको वह सब बता पाता हूं कि जो मैंने किया है और उनसे प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने का आग्रह करता हूं.’

हालांकि ध्रुव के लिए यह सब कुछ इतना आसान नहीं रहा और उन्हें अपने इस कार्य के पहले दिन काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा.

उनकी योजना अब अपनी बांस की इस साइकिल से शांति का संदेश फैलाने के लिए अगले वर्ष दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल से उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग तक यात्रा करने की है.

सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैव विविधता के शोध का दायरा बढ़ाया

इम्फाल स्थित जैव संसाधन एवं स्थायी विकास संस्थान. (फोटो साभार: फेसबुक)

इम्फाल स्थित जैव संसाधन एवं स्थायी विकास संस्थान. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: जैव विविधता के लिहाज़ से दुनिया के सर्वाधिक समृद्ध क्षेत्रों में शुमार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्र सरकार ने जैव संसाधनों की खोज और इनके पर्यावरण अनुकूल दोहन के लिए शोध का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है.

इसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में जैव विविधता के क्षेत्र में शोध के लिए केंद्र सरकार द्वारा मणिपुर की राजधानी इम्फाल में संचालित जैव संसाधन एवं स्थायी विकास संस्थान की दो शोध इकाई मेघालय में शुरू की जाएंगी.

केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद संस्थान के दो नए कैंपस शिलांग और तुरा में स्थापित होंगे.

संस्थान के निदेशक प्रो. दीनबंधु साहू ने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए विकास की रूपरेखा तय करने में संस्थान के शोधपरक परामर्श, क्षेत्र की राज्य सरकारों के लिए मददगार साबित होते हैं.

प्रो. साहू ने बताया कि मेघालय सरकार की मदद से शिलॉन्ग और तुरा में संस्थान के दोनों कैंपस इस महीने के अंत तक शुरू हो जाएंगे.

उन्होंने कहा कि इसका मकसद जैव विविधता से समृद्ध मेघालय और आसपास के क्षेत्रों में जैव तकनीक के माध्यम से सामाजिक आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करना है. इसके तहत मेघालय में विकास कार्यों से जुड़े सभी विभाग संस्थान के साथ तालमेल कायम कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाएंगे.

इसके अलावा राज्य में पयावरण एवं जैव संसाधनों के संतुलित दोहन की दिशा में यह संस्थान, राज्य के स्थानीय शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर शोधपरक अध्ययन भी राज्य सरकार के साथ साझा करेगा.

जैव संसाधनों की विविधता के लिहाज से विश्व के सर्वाधिक समृद्ध 25 चिह्नित क्षेत्रों में, आठवें स्थान वाले भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास और जैव संसाधनों के उचित दोहन का रोडमेप तैयार करने में केंद्र और राज्य सरकारों को अध्ययन रिपोर्टों के आधार पर मदद पहुंचाने के मकसद से अपने तरह का यह विशिष्ट संस्थान साल 2001 में इम्फाल में शुरू किया गया था.

मणिपुर: दो साल में 1000 से ज़्यादा नगा उग्रवादी गिरफ्तार

नई दिल्ली: मणिपुर में दो साल पहले प्रतिबंधित एनएससीएन (के) संगठन द्वारा सेना के एक काफिले पर हमला किए जाने के बाद अब तक सुरक्षा बलों ने 1,000 से ज्यादा नगा उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है. सेना के काफिले पर हुए हमले में 18 सैनिकों की मौत हो गई थी.

सेना के जवानों पर चार जून 2015 को हुए हमले के बाद गहन तलाशी अभियानों में एनएससीएन (के) संगठन के 531 भूमिगत उग्रवादियों के साथ ही सक्रिय रूप से काम करने वाले 542 उग्रवादियों को भी मणिपुर और नगालैंड से गिरफ्तार किया गया है.

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘यह अभियान अब भी चल रहा है और सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर एनएससीएन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम हुए हैं.’

अधिकारी ने दावा किया कि ऐसा पहली बार हुआ है जब सिर्फ दो साल के भीतर इतनी बड़ी संख्या में नगा उग्रवादियों को गिरफ्तार किया गया है.

पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने एनएससीएन (के) संगठन के 34 उग्रवादियों को मार गिराया और इसके भूमिगत तथा सक्रिय सदस्यों से 571 अत्याधुनिक हथियार बरामद किए.

केरल में हुए दलित महिला बलात्कार एवं हत्याकांड में असम का मज़दूर दोषी

Court Hammer (2)

कोच्चि: कोच्चि की एक अदालत ने केरल में पिछले वर्ष विधि की एक दलित छात्रा के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के मामले में असम के एक प्रवासी मजदूर को बीते मंगलवार को दोषी क़रार दिया.

एर्नाकुलम की प्रधान सत्र अदालत के न्यायाधीश एन. अनिल कुमार अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया.

इस मुकदमे में मोहम्मद अमीरूल इस्लाम को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 302 हत्या, 376 बलात्कार, 376 ए के तहत दोषी ठहराया गया है. आरोपी को धारा 201 सबूत मिटाना और एससी/एसटी अत्याचार निरोधक संशोधन कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी नहीं पाया गया.

अदालत ने अपराध में इस्लाम की भूमिका स्थापित करने के लिये वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करने के लिये जांच दल की प्रशंसा की. जांच दल ने डीएनए प्रौद्योगिकी और कॉल रिकॉर्ड की जांच जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया था ताकि अपराध में अमीरूल की संलिप्तता साबित की जा सके.

अदालत ने विशेष लोक अभियोजक और उनकी टीम की भी पेशेवर तरीके से मुकदमा चलाने के लिये तारीफ की.

फैसले का स्वागत करते हुए पीड़िता की मां ने कहा, किसी भी लड़की के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए. वैज्ञानिक तौर पर यह साबित हो चुका है कि इस्लाम ने ही वह घृणित अपराध किया था. उसे फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए, ताकि ऐसे तत्वों को सख्त संदेश दिया जा सके.

उन्होंने कहा कि अगर मौत की सजा से कम कोई भी सजा सुनाई जाती है तो वह ऊपरी अदालत में अपील दायर करेंगी. वहीं बचाव पक्ष के वकील बीए अलूर ने कहा कि मामले में इस्लाम को न्याय से वंचित किया गया.

पिछले वर्ष अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई के दौरान करीब 100 गवाहों का परीक्षण किया गया. अभियोजन पक्ष ने इसे दुर्लभतम में दुर्लभ मामला बताया था.

असम से यहां मजदूरी करने आए और मामले में एकमात्र आरोपी इस्लाम पर एक महिला के साथ बलात्कार करने और उसकी हत्या करने का आरोप लगाया गया था.

इस्लाम ने विधि विषय की दलित छात्रा से 28 अप्रैल, 2016 को पेरंबवूर में बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी. इस्लाम अपराध को अंजाम देने के बाद पेरंबवूर से तुरंत भाग गया था. उसे पड़ोसी तमिलनाडु के कांचीपुरम से अपराध के 50 दिन बाद गिरफ्तार किया गया था.

सिक्किम: 11 समुदायों ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा मांगा

नई दिल्ली: सिक्किम के 11 समुदायों ने बीते मंगलवार को केंद्र सरकार से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिये जाने की मांग की है.

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार सिक्किम के मूल निवासी समुदायों के प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और अपनी मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल में राई, मांगर, गुरुंग, थामी, भुजेल, जोगी, सन्यासी, गिरि, नेवार, खास भावन और चेत्री और देवान याखा जैसे समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे.

विज्ञप्ति के अनुसार प्रतिनिधियों ने अपने समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा. उन्होंने राज्य विधानसभा में अपने प्रतिनिधित्व, नौकरियों में आरक्षण, आयकर में छूट आदि मुद्दों पर भी चर्चा की.

सिंह ने इन समुदायों के योगदान की सराहना की और उन्हें न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करने का विश्वास दिलाया. उन्होंने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय के साथ ज्ञापन को साझा किया जाएगा.

आपदा प्रभावित मणिपुर, मिजोरम, केरल के लिए 305 करोड़ रुपये सहायता

Imphal: An aerial view of the flood affected areas in Imphal, Manipur on Saturday. PTI Photo(PTI7_15_2017_000092B)

इस साल मणिपुर में आई बाढ़ का दृश्य. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गृह मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2016-17 में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित मणिपुर, केरल और मिजोरम राज्य को केंद्र से कुल 305.14 करोड़ रुपये की राहत सहायता मंज़ूर की गई है.

इसका फैसला गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया.

गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, केंद्रीय सहायता, बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित मणिपुर और मिजोरम को तथा सूखे से प्रभावित केरल के लिए मंज़ूर की गई है.

समिति ने मणिपुर को राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) से 130.65 करोड़ रुपये को मंज़ूर किया है.

समिति ने केरल के लिए 125.47 करोड़ रुपये को मंज़ूर किया है जिसमें एनडीआरएफ से 112.05 करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) से 13.42 करोड़ रुपये दिये जाएंगे.

समिति ने मिज़ोरम के लिए 49.02 करोड़ रुपये को मंज़ूर किया जिसमें एनडीआरएफ से 42.77 करोड़ रुपये तथा एनआरडीडब्ल्यूपी से 6.25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.

असम: झारखंड के संथाल व उरांव आदिवासियों को आदिवासी दर्जा देने का प्रस्ताव

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास की पहल पर झारखंड के असम में रहने वाले संथाल और उरांव आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा शीघ्र मिलने की संभावना है.

एक सरकारी विज्ञप्ति में यहां बताया गया है कि मुख्यमंत्री रघुबर दास से गुवाहाटी में बीते बुधवार को असम सरकार के मुख्य सचिव, कार्मिक सचिव तथा टी ट्राइब के प्रधान सचिव ने मुलाकात की.

दास को बताया कि असम सरकार ने झारखंड के मूल आदिवासी संथाल और उरांव समुदाय के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को विधिवत प्रस्ताव भेजा है.

विज्ञप्ति में बताया गया है कि पिछले सौ वर्ष से अधिक समय से असम में रह रहे तथा असम के चाय बागानों में कार्य के लिए गए और पिछले कई पीढ़ियों से वहीं कार्य कर रहे इन आदिवासी समुदाय को बहुत जल्द ही असम के अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

Categories: नॉर्थ ईस्ट, भारत, राजनीति

Tagged as: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Comments