राजनीति

मायावती के बाद केजरीवाल ने भी ईवीएम के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथमदृष्टया गड़बड़ी के पुख़्ता सबूत मिले हैं. वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि वे ईवीएम से छेड़छाड़ के मामले को लेकर अदालत जाएंगी.

Arvind Mayawati

(फाइल फोटो: पीटीआई)

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वालों में अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हो गए हैं. उन्होंने पंजाब चुनाव में ईवीएम में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है.

उत्तर प्रदेश चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद बसपा प्रमुख मायावती ने भी कहा था कि ईवीएम मशीन में गड़बड़ियां की गईं, जिससे बटन चाहे कोई भी दबाई जाए, लेकिन वोट भाजपा को पड़े.

केजरीवाल का दावा है कि उनके पास प्रथमदृष्टया गड़बड़ी के पुख़्ता सबूत हैं तो मायावती ने कहा है कि इस मसले को लेकर कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगी.

अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को आरोप लगाया है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के खराब प्रदर्शन के पीछे की वजह ईवीएम में गड़बड़ी हो सकती है. केजरीवाल ने कहा कि आप के खाते में आने वाले लगभग 20 से 25 प्रतिशत वोट संभवत: शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को चले गए हैं.

केजरीवाल ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आम आदमी पार्टी को महज 20 सीटें मिलना समझ से परे है और यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि विभिन्न राजनीतिक पंडितों ने पार्टी के लिए भारी जीत की भविष्यवाणी की थी.

उन्होंने कहा, जब आप को भारी जीत एक पूर्व निर्धारित निष्कर्ष था तो अकालियों को 30 प्रतिशत वोट कैसे मिल गए? किसी ने नहीं कहा था कि कांग्रेस इतना अच्छा प्रदर्शन करेगी और दो तिहाई बहुमत ले आएगी. हमें संदेह है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण आप के हिस्से के 20-25 प्रतिशत मत शिअद-भाजपा को चले गए.

बीते 11 मार्च को पंजाब विधानसभा चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद यह पहली बार है, जब केजरीवाल मीडिया से मुखातिब हुए. हालांकि, आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने गोवा का ज़िक्र नहीं किया. गोवा में आम आदमी पार्टी के हिस्से में एक भी सीट नहीं आई है.

मंगलवार को केजरीवाल ने दिल्ली के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर उन्हें राज्य के चुनाव आयोग से संपर्क करने का निर्देश दिया था. इस निर्देश में उन्हें आयोग के समक्ष यह अनुरोध करने के लिए कहा गया है कि दिल्ली का आगामी निकाय चुनाव मतपत्रों के जरिए कराया जाए.

केजरीवाल ने यह मांग की कि पंजाब में लगभग 32 स्थानों पर ईवीएम में दर्ज मतों की तुलना वीवीपीएटी (वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल) से कराई जाए, जहां पेपर ऑडिट प्रणाली सक्रिय थी.

उन्होंने कहा, यह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और मतदान प्रणाली में लोगों के विश्वास की बात है. प्रथमदृष्टया हमारे पास गड़बड़ी के पुख्ता सबूत हैं. जब उनसे इसी तर्ज पर वर्ष 2015 में आप को मिली भारी जीत की वजह बताने को कहा गया था तो उन्होंने कहा कि शायद इसका संबंध इस बात से है कि भाजपा को तब अति विश्वास था कि वह जीत हासिल कर लेगी.

उन्होंने कहा, इसलिए तब वे गड़बड़ी में शामिल नहीं हुए होंगे. यही जदयू-राजद की बिहार में हुई जीत को बयां करता है. यहां तक कि भाजपा को भी यकीन था कि वह राज्य में जीत जाएगी.

उधर, बसपा ने ईवीएम से कथित छेड़छाड़ के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है. मायावती ने लखनउ में कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है और इसलिए हर महीने वह काला दिवस मनाएगी.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि चुनाव आयोग ने 11 मार्च को नतीजे घोषित होने के बाद हमारी शिकायत पर उचित जवाब नहीं दिया है.

पार्टी ने इस मामले में अब अदालत जाने का फैसला किया है ताकि देश को भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी से बचाया जा सके और लोकतंत्र की रक्षा की जा सके.

मायावती ने कहा कि बसपा इस धोखाधड़ी का पर्दाफ़ाश करने के लिए उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में आंदोलन करेगी. पार्टी हर महीने की 11 तारीख़ को उत्तर प्रदेश तथा अन्य प्रदेशों के राज्य मुख्यालयों पर काला दिवस मनाएगी.

इस कड़ी में पहला प्रदर्शन 11 अप्रैल को होगा. चुनाव परिणाम आने के बाद बसपा ने चुनाव आयोग से ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत की थी, लेकिन चुनाव आयोग ने अपने जवाब में किसी भी गड़बड़ी की संभावना से इनकार करते हुए इस आरोप को निराधार बताया था.

बसपा नेता ने 11 मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. उनका कहना है कि बेईमानी से हासिल की गई जीत को छिपाने के लिए भाजपा अब कह रही है कि अगर ईवीएम में गड़बड़ी होती तो वे पंजाब, गोवा और मणिपुर में भी वैसा ही कर देते.

मायावती ने कहा कि भाजपा को जनता को इतना भोला नहीं समझना चाहिए. अगर वे अन्य राज्यों में भी ऐसा ही करते तो जनता की ओर से उठने वाले सवालों का उचित जवाब देने की स्थिति में नहीं होते और आसानी से पकड़ में आ जाते. भाजपा ने छोटे राज्यों में ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं की क्योंकि उन्हें अपने बचाव के लिए भी कुछ चाहिए था.

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह कहती थी कि केंद्र का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है इसलिए भाजपा ने इसी पर ध्यान केंद्रित किया. भाजपा ने ईवीएम में गड़बड़ी करके जीत हासिल की और यह जीत बेईमानी, धोखाधड़ी और लोकतंत्र की हत्या कर हासिल की गई है.

उन्होंने कहा, पार्टी के लोग कह रहे हैं कि उन्होंने बसपा के लिए वोट किया लेकिन हमारे वोट कमल में कैसे जुड़ गए. उन्हें हैरत है कि ऐसा कैसे हो सकता है.

मायावती ने कहा कि मुस्लिम और दलित बहुल इलाकों में भी भाजपा को वोट मिले. भाजपा कहती है कि तीन तलाक मुद्दे पर उसे मुसलमान महिलाओं का वोट मिला है जबकि सच्चाई ये है कि भाजपा ने एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया. अगर भाजपा मुस्लिम महिलाओं की शुभचिंतक होती तो वह कम से कम 20 से 25 टिकट मुसलमानों को देती.

उन्होंने कहा कि भाजपा का अगर ईवीएम से छेड़छाड़ से इंकार करने का कोई आधार है और अगर वह वाकई ईमानदार और लोकतंत्र के प्रति निष्ठावान है तो उसे बसपा के आरोपों से भागना नहीं चाहिए और तत्काल नये सिरे से बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने चाहिए. इससे साबित हो जाएगा कि लोकतंत्र की हत्या किसने की है.

पार्टी संस्थापक कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मायावती ने याद दिलाया कि कांशीराम ने अनुसूचित जाति-जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सत्ता से दूर रखने के प्रयासों को लेकर आगाह किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)