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उत्तर प्रदेश: प्रतापगढ़ के दो महिला आश्रय गृहों से 26 महिलाएं लापता

प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दो महिला आश्रय गृहों के निरीक्षण में सामने आया कि एक आश्रय गृह में 15 में से 12, तो दूसरे में 17 में से 14 महिलाएं गायब पाई गईं.

(फोटो: गूगल मैप)

(फोटो: गूगल मैप)

प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के देवरिया के बाद अब प्रतापगढ़ में गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा संचालित दो महिला आश्रय गृहों से 26 महिलाएं लापता हैं. बुधवार को जिला अधिकारी द्वारा महिला एवं बालिका आश्रय गृहों की जांच के दौरान यह मामला सामने आया. देवरिया मामले के बाद सरकार ने 75 जिलों के अधिकारियों को इन आश्रय गृहों की जांच के आदेश दिए थे.

रविवार को देवरिया के बालिकागृह से 24 लड़कियों को मुक्त कराए जाने के बाद पूरे राज्य के महिला आश्रय गृहों की जांच हो रही है. देवरिया मामले में एक लड़की बालिकागृह से भाग निकली और यौन शोषण की जानकारी पुलिस को दी. जिसके बाद कार्रवाई कर लड़कियों को मुक्त कराया था.

हिंदुस्तान टाइम्स  के मुताबिक, जिलाधिकारी (डीएम) शंभु कुमार ने बताया कि महिला आश्रय गृहों में व्याप्त विसंगतियों की जांच के लिए एक टीम गठित की गई थी.

डीएम की अध्यक्षता वाली टीम ने पहले अचलपुर में एक महिला आश्रय का निरीक्षण किया. आश्रय गृह के दस्तावेज़ों में 15 पंजीकृत महिलाओं को दिखाया गया था, लेकिन उनमें से 12 वहां मौजूद नहीं थीं.

आश्रय गृह की अधीक्षक नेहा प्रवीण ने दावा किया कि सभी महिलाएं काम के लिए चली गई हैं. हालांकि, आश्रय गृह के अधिकारी अकाउंट का रजिस्टर तक नहीं दिखा सके और न ही आश्रय गृह में सीसीटीवी कैमरे थे, जो नियमानुसार अनिवार्य हैं.

जांच टीम ने अचलपुर के बाद अष्टभुजा नगर स्थित स्वाधार जागृति गृह का निरीक्षण किया, जहां दस्तावेजों में 17 महिलाओं को पंजीकृत पाया गया. हालांकि, निरीक्षण के दौरान 14 महिलाएं वहां मौजूद नहीं थीं.

स्वाधार जागृति गृह की संचालिका रमा मिश्रा ने जांच टीम को बताया कि महिलाएं किसी निजी काम से बाहर गई हैं.

अमर उजाला के अनुसार, संचालिका रमा मिश्रा 2013 में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष व सभासद भी रह चुकी हैं. मिश्रा तीन साल से भी अधिक समय से महिला आश्रय का संचालन कर रही हैं.

स्वाधार जागृति महिला आश्रय गृह में छापेमारी के दौरान प्रशासन रात तक महिलाओं का इंतजार करता रहा. रात करीब दस बजे एसडीएम सदर एसपी सिंह दल बल के साथ आश्रय गृह पहुंचे. जहां सिर्फ तीन महिलाएं ही मिलीं.

जिलाधिकारी के अनुसार, दोनों आश्रय गृहों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. यदि उनके रजिस्टरों में दर्ज़ महिलाओं की संख्या निरीक्षण के दूसरे दौर के दौरान भी मेल नहीं खाती है.

वहीं, देवरिया मामले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार देर शाम संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘देवरिया की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है. इसकी गंभीरता को देखते हुए दोपहर में बैठक की थी. बालिकाओं के बयान और अन्य स्थितियों को देखते हुए तथा मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए ही इसे सीबीआई को भेजने का निर्णय किया गया है.’

हरदोई जिला के एक बालिकागृह में भी 21 में से 19 लड़कियों के लापता होने का मामला सामने आया था.

हरदोई ज़िलाधिकारी की जांच में एक एनजीओ द्वारा निराश्रित महिलाओं के लिए संचालित आश्रय गृह में 21 में से 19 महिलाएं ग़ायब पाई गईं. प्रशासन का कहना है कि अनुदान पाने के लिए संस्थान ने रजिस्टर में महिलाओं के फर्ज़ी नाम दर्शाए थे.

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