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कोलकाता में बना सेक्स वर्कर्स के जीवन और संघर्ष पर समर्पित दुर्गा पूजा पंडाल

उत्तर कोलकाता में तैयार किया गया है पंडाल. आयोजनकर्ताओं के अनुसार, इसके माध्यम से वे इन सेक्स वर्करों की समाज में सहभागिता बढ़ाने और उन्हें वह सम्मान देने की कोशिश कर रहे जिसकी वो हक़दार हैं.

कोलकाता में सेक्स वर्करों के जीवन और संघर्ष पर बना पूजा पंडाल. (फोटो साभार: फेसबुक/D.D Creations and Photography)

कोलकाता में सेक्स वर्करों के जीवन और संघर्ष पर बना पूजा पंडाल. (फोटो साभार: फेसबुक/D.D Creations and Photography)

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के त्योहार के समय अलग-अलग थीम पर आधारित पंडाल चर्चा में रहते हैं. इस बार भी उत्तर कोलकाता में बना एक पंडाल चर्चा का विषय बना हुआ है. यह पंडाल सेक्स वर्कर के जीवन और संघर्ष पर आधारित है.

उत्तर कोलकाता में अहिरिटोला जुबकबृंदा दुर्गा पूजा पंडाल तक जाने वाली सड़कों पर इस थीम को लेकर पेंटिंग भी बनाई गई हैं. इस पंडाल में सेक्स वर्कर्स के जीवन और उनके संघर्ष को दर्शाने की कोशिश की गई है.

पंडाल तक जाने वाली सड़क पर कई कलाकृतियां भी बनाई गई है. (फोटो साभार: फेसबुक/Ileen Aditya Roy)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पंडाल की ओर जाने वाली सड़क पर 300 फुट लंबी पेंटिंग बनाने के अलावा दोनों तरफ की दीवारों पर पेंटिंग बनाई गई है. पेंटिंग के माध्यम से सेक्स वर्कर के संघर्ष और उन परिस्थितियों को भी दिखाने की कोशिश की गई है जिसकी वजह से उन्हें यह काम करना पड़ता है.

इस पंडाल के माध्यम से उत्तर कोलकाता के चर्चित रेड लाइट एरिया सोनागाछी को दर्शाने की कोशिश की गई है. मालूम हो कि सोनागाछी में लगभग 10,000 सेक्स वर्कर रहती हैं.

पंडाल की थीम को ‘उत्सारितो अलो’ दिया गया है. इस थीम से दुर्गा पूजा के आयोजनकर्ता इन सेक्स वर्कर्स की समाज में सहभागिता और बढ़ाने और उन्हें वह सम्मान देने की कोशिश कर रहे जिसकी वो हक़दार हैं.

बता दें दुर्गा पूजा के दौरान दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल मिट्टी में किसी वैश्यालय की मिट्टी मिलाने का चलन है.

अहिरिटोला जुबकबृंदा दुर्गा पूजा समिति के कार्यकारी अध्यक्ष उत्तम साहा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया, ‘हमारे रूढ़िवादी समाज ने हमेशा से ही सेक्स वर्करों को उपेक्षा की नज़र से देखा है. हम यह महसूस करने में असफल रहे हैं कि वे भी किसी की मां और बहन हैं. उनके पास भी एक परिवार है. लोगों की प्रताड़ना और घृणा की जगह उन्हें भी सम्मान और प्यार से जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए.’

इस थीम को जमीन पर उतारने और कलाकृतियों को पेंट करने के लिए सेक्स वर्कर्स के लिए काम करने वाले एनजीओ दरबार महिला समन्वय कमेटी को आमंत्रित किया गया था. संगठन की सचिव काजोल बोस ने इंडियन एक्सप्रेस से अपनी बातचीत में कहा, ‘हम पूजा समिति की पहल से बहुत खुश हैं और इस विषय को पूजा का केंद्र बनाना बहुत अच्छा लगा.’

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