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हमारे पास जल का कोई साधन नहीं, इसलिए यात्रियों को मुफ्त पानी नहीं दे सकते: दिल्ली मेट्रो

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अदालत को बताया कि वह अपनी सेवाओं पर प्रतिक्रियाओं के लिए यात्रियों से नियमित रूप से बातचीत करती है और किसी ने भी पेयजल के अभाव के बारे में शिकायत नहीं की है.

दिल्ली मेट्रो. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिल्ली मेट्रो. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा है कि वह यात्रियों को मुफ्त पेयजल मुहैया नहीं कर सकती क्योंकि उसके पास ख़ुद जल का कोई साधन नहीं है और वह जलापूर्ति के लिए अन्य एजेंसियों पर निर्भर है.

डीएमआरसी ने अदालत से कहा कि वह अपने कर्मचारियों के लिए तीसरे पक्ष के विक्रेताओं से पेयजल खरीदती है और यदि किसी मेट्रो स्टेशन पर भुगतान के साथ मिलने वाला पेयजल उपलब्ध नहीं है तो वह यात्रियों को मुफ्त में मुहैया करेगी.

दिल्ली मेट्रो ने मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की पीठ के समक्ष दाख़िल किए गए एक हलफ़नामे में यह कहा है.

दिल्ली मेट्रो ने हलफ़नामा में यह भी कहा है कि लगभग सभी मेट्रो स्टेशनों पर दो रुपये प्रति ग्लास पेयजल उपलब्ध है और जहां यह उपलब नहीं है, वहां यात्री कर्मचारी से पानी मांग सकते हैं जो उन्हें मुफ्त में मुहैया करेंगे.

डीएमआरसी ने अदालत को यह भी बताया कि वह अपनी सेवाओं पर प्रतिक्रियाओं के लिए अपने यात्रियों से नियमित रूप से बातचीत करती है और किसी ने भी पेयजल के अभाव के बारे में शिकायत नहीं की है.

डीएमआरसी ने अदालत को बताया कि इस बारे में यात्रियों को सूचना देने वाले संकेत लगाए जाएंगे. बहरहाल, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी.

दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ कुश कालरा की ओर से दाख़िल याचिका की सुनवाई कर रहा था. यह याचिका उस फैसले के ख़िलाफ़ दाख़िल किया गया है जिसमें कहा गया है कि मेट्रो के यात्री का मुफ्त पानी पीने का अधिकार नहीं है.

पेशे से अधिवक्ता कुश कालरा ने याचिका में मांग की गई थी कि अदालत डीएमआरसी को आदेश दे कि वह अपने स्टेशनों पर मुफ्त में पीने के पानी और शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराए.

याचिका में उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली मेट्रो के तमाम स्टेशनों पर कूड़ेदान की भी कमी है. इसके बाद डीएमआरसी ने स्टेशनों पर जैविक और अजैविक कूड़ा डालने के लिए पारदर्शी कूड़ेदान लगाए थे.

इससे पहले बीते 20 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान डीएमआरसी से कहा था कि वह कैसे यात्रियों को मुफ्त पेयजल नहीं मुहैया कराने को सही ठहरा सकता है जब कोच्चि, जयपुर, लखनऊ और अन्य शहरों में मेट्रो सेवाएं ऐसा कर रही हैं.

पीठ ने डीएमआरसी से पूछा था कि कैसे मेट्रो स्टेशनों के भीतर वह यात्रियों को एक स्थान पर पेयजल मुहैया कराने जा रही है, जिससे सबकी उस तक पहुंच हो.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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