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नेशनल हेराल्ड: प्रकाशक की अपील ख़ारिज, दो हफ़्ते में दिल्ली परिसर ख़ाली करने का आदेश

केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि बीते कम से कम दस साल से हेराल्ड हाउस के दिल्ली परिसर में प्रेस का कोई काम नहीं हो रहा है और इसका पट्टा समझौते का उल्लंघन करके केवल वाणिज्यिक उद्देश्यों से इस्तेमाल किया जा रहा था.

 New Delhi: In this file photo dated Nov. 22, 2018 is a view of the National Herald House in New Delhi. Associated Journals Ltd (AJL), publisher of Congress mouth piece National Herald, was directed by the Delhi High Court to vacate its premises located in Delhi within two weeks on Friday, Dec. 21, 2018.  (PTI Photo/Ravi Choudhary)  (PTI12_21_2018_000130)

नई दिल्ली के आईटीओ इलाके में स्थित हेराल्ड हाउस, जिसे दो हफ़्ते में ख़ाली करने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने एसोसिएटेड जनल्र्स लिमिटेड को दिया है. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कांग्रेस के मुखपत्र ‘नेशनल हेराल्ड’ के प्रकाशक ‘एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड’ (एजेएल) को राष्ट्रीय राजधानी स्थित परिसर दो सप्ताह के भीतर ख़ाली करने का निर्देश दिया.

उच्च न्यायालय ने परिसर ख़ाली करने के केंद्र के आदेश को चुनौती देने वाली एजेएल की अपील ख़ारिज कर दी.

नेशनल हेराल्ड ने बीते 30 अक्टूबर को 56 साल पुराने पट्टे को कैंसिल करने और हेराल्ड हाउस को ख़ाली करने के आदेश को चुनौती दी थी.

केंद्र और भूमि एवं विकास कार्यालय (एलडीओ) ने अपने आदेश में कहा कि बीते कम से कम दस साल से परिसर में प्रेस का कोई काम नहीं कर रही है और इसका पट्टा समझौते का उल्लंघन करके केवल वाणिज्यिक उद्देश्यों से इस्तेमाल किया जा रहा था.

एजेएल ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में आरोपों को ख़ारिज किया है.

जस्टिस सुनील गौर ने 56 साल पुराना पट्टा समाप्त करने के केंद्र सरकार के 30 अक्टूबर के आदेश को चुनौती वाली अपील खारिज कर दी.

अदालत ने कहा कि एजेएल को दो सप्ताह के अंदर आईटीओ स्थित परिसर को ख़ाली करना होगा. इसके बाद सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत क़ब्ज़ाधारियों को बेदख़ल करना) क़ानून 1971 के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी.

अदालत ने 22 नवंबर को एजेएल की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था.

केंद्र ने कहा कि नोटिस जारी करने से पहले सभी प्रक्रियाओं का विधिवत पालन किया गया है.

एजेएल ने केंद्र के रुख़ का विरोध करते हुए कहा था कि वेब संस्करणों का प्रकाशन 2016 में शुरू हुआ था और तब परिसर में प्रिंटिंग प्रेस की अनुपस्थिति का मुद्दा नहीं उठा था.

एजेएल ने कहा था कि अप्रैल 2018 तक सरकार शांत रही और फिर उसने निरीक्षण के लिए नोटिस फिर भेजा और इसमें उसने कहा कि वह 10 अक्टूबर 2016 को नोटिस में बताए गए उल्लंघनों की जांच करने आ रही है.

एजेएल ने दलील दी थी कि कई बड़े अख़बार अन्य स्थानों पर प्रिटिंग का काम करते हैं.  अदालत ने इससे पहले सरकार से 30 अक्टूबर के आदेश के क्रियान्वयन पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा था.

भाजपा इस मामले को लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाती रही है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड पर 90 करोड़ रुपये के क़र्ज़ का बोझ हटाने के लिए सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी ने यंग इंडिया नाम की एक कंपनी बनाई है.

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड जवाहर लाल नेहरू द्वारा शुरू किए गए नेशनल हेराल्ड अख़बार समेत तीन अख़बारों का प्रकाशन करता है. जवाहर लाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अख़बार प्रधानमंत्री बनने से पूर्व शुरू किया था.

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2008 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड क़र्ज के चलते बंद हो गया. भाजपा ने आरोप लगा कि प्रकाशन के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति होने के बावजूद गांधी परिवार ने कांग्रेस पार्टी के फंड का इस्तेमाल इसका क़र्ज़ चुकाने के लिए किया है.

साल 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को 90 करोड़ रुपये का क़र्ज़ देने में अनियमितता का आरोप लगाकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)