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फिर से नागेश्वर राव के हाथ में सीबीआई की कमान, आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादले रद्द

आलोक वर्मा के तबादले के बाद सीबीआई निदेशक का प्रभार फिलहाल अतिरिक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव के पास है.

एम नागेश्वर राव, (फोटो साभार: फ़ेसबुक)

एम नागेश्वर राव, (फोटो साभार: फ़ेसबुक)

नई दिल्ली: अंतरिम सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव ने सीबीआई के प्रमुख के रूप में अपने दो दिन के कार्यकाल में आलोक वर्मा द्वारा किए गए तबादलों संबंधी फैसले को रद्द कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की एक लम्बी बैठक के बाद आलोक वर्मा को बीते गुरुवार को सीबीआई निदेशक पद से हटा दिया गया था.

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा को गृह मंत्रालय के तहत अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स का निदेशक नियुक्त किया गया है. सीबीआई निदेशक का प्रभार फिलहाल अतिरिक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव के पास है.

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति में लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी थे. जस्टिस सीकरी को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया था.

वर्मा ने कहा कि समिति को सीबीआई निदेशक के तौर पर उनके भविष्य की रणनीति तय करने का काम सौंपा गया था. उन्होंने कहा, ‘मैं संस्था की ईमानदारी के लिए खड़ा रहा और यदि मुझसे फिर पूछा जाए तो मैं कानून का शासन बनाए रखने के लिए दोबारा ऐसा ही करूंगा.’

छुट्टी पर भेजे जाने के 77 दिन बाद वर्मा बुधवार को अपनी ड्यूटी पर लौटे. एजीएमयूटी काडर के आईपीएस अधिकारी वर्मा बुधवार को सुबह करीब दस बजकर 40 मिनट पर सीबीआई मुख्यालय पहुंचे. सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने के विवादास्पद सरकारी आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया था.

वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना दोनों को सरकार ने 23 अक्टूबर, 2018 की देर शाम जबरन छुट्टी पर भेज दिया था और उनके सारे अधिकार ले लिये थे. अधिकारियों के अनुसार सीबीआई मुख्यालय पहुंचने पर वर्मा का राव ने स्वागत किया.

1986 बैच के ओड़िशा काडर के आईपीएस अधिकारी एम नागेश्वर राव (तत्कालीन संयुक्त निदेशक) को 23 अक्टूबर, 2018 को देर रात को सीबीआई निदेशक के दायित्व और कार्य सौंपे गये थे. उन्हें बाद में अतिरिक्त निदेशक के रुप में प्रोन्नत किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के आदेश को दरकिनार कर दिया था लेकिन उन्हें उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के आरोपों की सीवीसी जांच पूरी होने तक कोई बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से रोक दिया था.

‘बड़े नीतिगत’ फैसले की स्पष्ट परिभाषा के अभाव में एक प्रकार की अनिश्चितता बनी ही रही कि किस हद तक वर्मा के अधिकार सीमित किये जाएंगे. शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्मा के खिलाफ कोई भी अगला निर्णय उच्चाधिकार प्राप्त समिति ही लेगी जो सीबीआई निदेशक का चयन और नियुक्ति करती है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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