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माधव शर्मा

राजस्थान की राजधानी जयपुर के मालवीय नगर में घरेलू कामगार महिलाओं का एक समूह जो लॉकडाउन के बाद विभि​न्न समस्याओं का सामना कर रहा है. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान: क्यों कोरोना वायरस के कारण घरेलू कामगार महिलाओं की समस्याएं और बढ़ गई हैं

कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के बाद घरेलू कामगार महिलाओं की आर्थिक हालत ख़राब है. काम न होने, मालिकों द्वारा मज़दूरी घटाने, सामाजिक भेदभाव के साथ-साथ ये वर्ग सरकार की उदासीनता से भी प्रताड़ित है.

उदयपुर जिले के खेरवाड़ा में हिंसा के दौरान तैनात पुलिस बल. (फोटो: विशाल अग्रवाल)

राजस्थान: शिक्षक भर्ती पर आदिवासी ज़िलों में हुई हिंसा क्यों गहलोत सरकार की विफलता है

पिछले हफ़्ते राजस्थान में सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित शिक्षक पदों पर अनुसूचित जनजाति वर्ग की भर्ती के लिए हुआ आंदोलन हिंसा में बदल गया था. हिंसा उदयपुर सहित प्रदेश के चार ज़िलों डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ में फैल गई थी. इस दौरान दो लोगों की मौत भी हुई. क्षेत्र में अभी शांति है, लेकिन तनाव बरक़रार है.

बूंदी जिले के बुधपुरा के मजदूर राजू भील और  उनका परिवार.

राजस्थान: खनन क्षेत्र के लाखों मज़दूर भुगत रहे हैं लॉकडाउन का ख़ामियाजा

कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र हुए लॉकडाउन के बाद राजस्थान में खानें भी बंद हो गई थीं. अप्रैल से राज्य सरकार ने खनन कार्य की अनुमति दी थी, लेकिन अधिकतर मज़दूर घर लौट गए हैं या फिर उनके पास खान तक पहुंचने का साधन नहीं है.

Rajasthan Artist Dare Khan and his group Special Arrangment

राजस्थान: लॉकडाउन में काम को तरसे लोक कलाकार

आम तौर पर लोक कलाओं से गुलज़ार रहने वाले राजस्थान में कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते सन्नाटा पसरा है. ऐसे में ख़ाली बैठे लोक कलाकार आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. उनकी सहायता के लिए शुरू की गई राज्य सरकार की योजना कई विसंगतियों के चलते मददगार साबित नहीं हो रही है.

जैसलमेर में पाक विस्थापित ताराचंद और उनका परिवार.

‘मोदी सरकार हमारी नागरिकता के लिए क़ानून तो ले आई, लेकिन मुश्किल वक़्त में भूल गई’

कोरोना वायरस के मद्देनज़र हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान राजस्थान में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है. राज्य सरकार ने सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब भी सभी विस्थापितों तक मदद नहीं पहुंची है.

फतेहगढ़ में घुमंतु समूह. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

राजस्थान: दर-बदर रहने वाले घूमंतु समुदाय भुगत रहे हैं लॉकडाउन का खामियाज़ा

कोरोना के चलते हुए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में घुमंतू समुदाय के कई समूह फंसे हुए हैं, न काम है न खाने पीने की कोई व्यवस्था. कुछ आम नागरिकों से मिली मदद के सहारे रह रहे इस समुदाय का कहना है कि सरकार द्वारा ग़रीबों के लिए हुई घोषणाओं में से उन्हें किसी का लाभ नहीं मिला है.

खेतों में उड़ती टिड्डियों के बीच किसान. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान में टिड्डियों के हमले के बाद किसान सरकार की उदासीनता के शिकार

इन दिनों उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के 11 ज़िले और गुजरात के कुछ क्षेत्रों के किसान टिड्डियों के हमले से प्रभावित हैं. सरकारी अधिकारियों के अनुसार टिड्डियों के हमले से तक़रीबन 3.70 लाख हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो चुकी है.

कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल. (फोटो साभार: ट्विटर/@Pintuchoudhry3)

आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति जितनी दिख रही है, उससे कहीं भयावह है

विशेष रिपोर्ट: राजस्थान के कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में पिछले एक महीने में 100 से अधिक बच्चों की मौत हुई थी. अस्पताल में साल 2019 में बच्चों की मौत का आंकड़ा 963 है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के अन्य अस्पताल भी कोटा से बेहतर स्थिति में नहीं हैं.

बूंदी ज़िले के बुधपुरा में अपने घर के आगे पड़े पत्थरों से कॉबल बनाते श्याम, उनकी बहन मीना और 16 साल का चचेरा भाई राजू. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान के कॉबल मज़दूरों को क्या ‘बंधुआ’ कहना ज़्यादा उचित होगा?

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के बूंदी ज़िले का बुधपुरा गांव कॉबल यानी फर्श पर लगाए जाने वाले पत्थरों के लिए जाना जाता है. पत्थर के खदानों से निकले मलबे से कॉबल बनाने के काम की स्थिति ये है कि एक बार जब मज़दूर यहां काम करना शुरू कर देता है, तो ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर कभी यहां से निकल नहीं पाता.

(फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान का रूप कंवर सती कांड, जिसने देश को हिलाकर रख दिया था

विशेष रिपोर्ट: राजस्थान के सीकर ज़िले के दिवराला गांव में चार सितंबर 1987 को बीमारी से पति के निधन के बाद उनकी चिता पर जलकर 18 वर्षीय रूप कंवर की भी मौत हो गई थी.

Jodhpur: Senior Congress leader and former chief minister Ashok Gehlot leaves after filing his nomination from Sardarpura constituency ahead of the state Assembly elections, in Jodhpur district, Monday, Nov. 19, 2018. (PTI Photo)(PTI11_19_2018_000161B)

महिलाओं-बच्चों के प्रति होने वाले अपराध की जानकारी देने से क्यों कतरा रही है राजस्थान सरकार

राजस्थान विधानसभा में भाजपा के तीन और कांग्रेस के एक विधायक ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों से जुड़े सवाल पूछे थे. गृह विभाग ने इन सवालों के जवाब देने में असमर्थता जता दी है.

वसुंधरा राजे और ओम बिड़ला. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर मोदी-शाह ने क्या वसुंधरा को कोई संदेश दिया है?

राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला दूसरी बार संसद पहुंचे हैं. इसी क्षेत्र के झालावाड़-बारां ज़िले से प्रदेश की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह चौथी बार सांसद चुने गए हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने उनमें न तो कोई विश्वास जताया है और न ही केंद्र में उन्हें कोई जगह दी है.

सीकर में दामिनी की मां. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

बलात्कार पीड़िताओं के पुनर्वास पर क्यों ध्यान नहीं देती सरकार?

राजस्थान में इस साल अप्रैल तक बलात्कार के 1509 मामले सामने आए, इनमें से 349 मामलों में चालान हुआ लेकिन मुआवज़ा सिर्फ़ 50 युवतियों को ही मिला.

क्वीन हरीश. (फोटो साभार: फेसबुक)

क्वीन हरीश: एक मर्द जो औरत बना और उसकी संपूर्णता में समा गया

राजस्थान के जैसलमेर में रहने वाले प्रसिद्ध लोक नर्तक ‘क्वीन हरीश’ की बीते दो जून को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.

(फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: क्या वोटरों ने ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी ख़ैर नहीं’ के नारे को दोहराया है?

महज़ पांच महीने पहले राजस्थान की सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस लोकसभा चुनाव में प्रदेश की एक भी सीट नहीं जीत पाई है.