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माधव शर्मा

बूंदी ज़िले के बुधपुरा में अपने घर के आगे पड़े पत्थरों से कॉबल बनाते श्याम, उनकी बहन मीना और 16 साल का चचेरा भाई राजू. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान के कॉबल मज़दूरों को क्या ‘बंधुआ’ कहना ज़्यादा उचित होगा?

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के बूंदी ज़िले का बुधपुरा गांव कॉबल यानी फर्श पर लगाए जाने वाले पत्थरों के लिए जाना जाता है. पत्थर के खदानों से निकले मलबे से कॉबल बनाने के काम की स्थिति ये है कि एक बार जब मज़दूर यहां काम करना शुरू कर देता है, तो ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर कभी यहां से निकल नहीं पाता.

(फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान का रूप कंवर सती कांड, जिसने देश को हिलाकर रख दिया था

विशेष रिपोर्ट: राजस्थान के सीकर ज़िले के दिवराला गांव में चार सितंबर 1987 को बीमारी से पति के निधन के बाद उनकी चिता पर जलकर 18 वर्षीय रूप कंवर की भी मौत हो गई थी.

Jodhpur: Senior Congress leader and former chief minister Ashok Gehlot leaves after filing his nomination from Sardarpura constituency ahead of the state Assembly elections, in Jodhpur district, Monday, Nov. 19, 2018. (PTI Photo)(PTI11_19_2018_000161B)

महिलाओं-बच्चों के प्रति होने वाले अपराध की जानकारी देने से क्यों कतरा रही है राजस्थान सरकार

राजस्थान विधानसभा में भाजपा के तीन और कांग्रेस के एक विधायक ने महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ होने वाले अपराधों से जुड़े सवाल पूछे थे. गृह विभाग ने इन सवालों के जवाब देने में असमर्थता जता दी है.

वसुंधरा राजे और ओम बिड़ला. (फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: ओम बिड़ला को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर मोदी-शाह ने क्या वसुंधरा को कोई संदेश दिया है?

राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला दूसरी बार संसद पहुंचे हैं. इसी क्षेत्र के झालावाड़-बारां ज़िले से प्रदेश की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकीं वसुंधरा राजे के बेटे दुष्यंत सिंह चौथी बार सांसद चुने गए हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने उनमें न तो कोई विश्वास जताया है और न ही केंद्र में उन्हें कोई जगह दी है.

सीकर में दामिनी की मां. (सभी फोटो: माधव शर्मा)

बलात्कार पीड़िताओं के पुनर्वास पर क्यों ध्यान नहीं देती सरकार?

राजस्थान में इस साल अप्रैल तक बलात्कार के 1509 मामले सामने आए, इनमें से 349 मामलों में चालान हुआ लेकिन मुआवज़ा सिर्फ़ 50 युवतियों को ही मिला.

क्वीन हरीश. (फोटो साभार: फेसबुक)

क्वीन हरीश: एक मर्द जो औरत बना और उसकी संपूर्णता में समा गया

राजस्थान के जैसलमेर में रहने वाले प्रसिद्ध लोक नर्तक ‘क्वीन हरीश’ की बीते दो जून को एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.

(फोटो: पीटीआई)

राजस्थान: क्या वोटरों ने ‘मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी ख़ैर नहीं’ के नारे को दोहराया है?

महज़ पांच महीने पहले राजस्थान की सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस लोकसभा चुनाव में प्रदेश की एक भी सीट नहीं जीत पाई है.

राजस्थान के गौलारी ग्राम पंचायत के चंदरपुरा गांव में पानी की समस्या के चलते लोग पलायन कर गए हैं. पलायन करने वाले लोगों ने अपने घर के दरवाजों को गोबर और पत्थर से बंद ​कर दिया है. (फोटो: माधव शर्मा)

पानी की वजह से पलायन के लिए मजबूर राजस्थान के ग्रामीण

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के धौलपुर ज़िले के डांग क्षेत्र के गौलारी, बीलौनी और डौमई ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले तमाम गांवों में इन दिनों पीने के पानी की भारी किल्लत बनी हुई है.

किरोड़ी लाल मीणा. (फोटो साभार: फेसबुक)

राजस्थान: क्या किरोड़ी लाल मीणा अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं?

राजस्थान में पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता किरोड़ी लाल मी​णा ने 17 टिकट अपने चहेतों को दिलवाए थे, इन सभी को हार का सामना करना पड़ा था. इस बार लोकसभा चुनाव में मीणा की पसंद के किसी भी प्रत्याशी को भाजपा ने टिकट नहीं दिया.

(फोटो साभार: फेसबुक)

क्या मोदी-शाह और वसुंधरा राजे के बीच एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं?

राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि लोकसभा चुनाव में क़रीबियों को टिकट न मिलने और विरोधियों को टिकट दिए जाने से वसुंधरा राजे नाराज़ चल रही हैं.

जयपुर शहर सीट से भाजपा उम्मीदवार रामचरण बोहरा और कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल. (फोटो साभार: फेसबुक)

जयपुर शहर सीटः भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों पर भारी जातीय समीकरण

राजस्थान की जयपुर शहर सीट से भाजपा ने रामचरण बोहरा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने ज्योति खंडेलवाल को अपना प्रत्याशी घोषित किया है.

राजस्थान के जयपुर मेटल एंड इलेक्ट्रिकल्स कंपनी के कर्मचारी 13 साल से ज़्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो: माधव शर्मा)

सबसे बड़े लोकतंत्र में धरना-प्रदर्शनों की आवाज़ क्यों नहीं सुनी जाती?

विशेष रिपोर्ट: राजस्थान के कई शहरों और कस्बों में कुछ प्रदर्शन ​आठ से दस वर्षों से चल रहे हैं. इस बीच भाजपा और कांग्रेस की सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी सरकार ने इन लोगों की शिकायतों को कभी गंभीरता से नहीं लिया.

अपने बच्चों के साथ गोपी भील. (फोटो: माधव शर्मा)

राजस्थान के आदिवासी भील किसी भी दल की प्राथमिकता में क्यों नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले में रहने वाले आदिवासी भील समुदाय के लोग भूख, ग़रीबी, बीमारी का शिकार होकर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.

मकराना की मार्बल खानों में लो​हे की ट्राली से उतरते मज़दूर. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

मकराना के मार्बल की चमक के बीच तबाह होती मज़दूरों की ज़िंदगी

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान में नागौर ज़िले के मकराना की मार्बल खदानों में काम करने वाले मज़दूरों की स्थिति बहुत दयनीय है. हर दिन हज़ारों मज़दूर अपनी जान जोखिम में डालकर 250-400 फीट नीचे मार्बल की खदानों में उतरने को मजबूर हैं.

जयपुर विकास प्राधिकरण की कार्रवाई से प्रभावित घुमंतू समुदाय के लोग. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

राजस्थान: सरकार ने घुमंतुओं को ज़मीन तो दी नहीं, उल्टा उनकी बस्ती उजाड़ दी

जयपुर विकास प्राधिकरण ने बीते 16 फरवरी को जयपुर के रावण गेट के पास रह रहे घुमंतू समुदाय के 200 से ज़्यादा परिवारों की झोपड़ियां अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ दीं. अब ये परिवार ठंड के दिनों में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.

राजस्थान में बाड़मेर ज़िले के दूधियाकलां गांव में दो साल पहले स्कूल बंद हो जाने से अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

राजस्थान: समायोजन के नाम पर प्राथमिक स्कूल बंद, दो साल से बिना शिक्षा घर बैठे हैं बच्चे

राजस्थान में पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने क़रीब 20,000 प्राथमिक सरकारी स्कूलों को माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मर्ज कर दिया था. इस फैसले का लगभग 10 लाख बच्चों पर असर हुआ.

राजस्थान में बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

राजस्थान: बालश्रम से छुड़ाए गए 152 बच्चे महीनों से घर लौटने का कर रहे इंतज़ार

राजस्थान के चूड़ी कारख़ानों से दिसंबर 2017 से नवंबर 2018 के बीच में मुक्त कराए गए ये सभी बच्चे बिहार से हैं.

डूंगरपुर ज़िले की सागवाड़ा और चौरासी सीट से भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक रामप्रसाद (बाएं) और राजकुमार रोट (दाएं).

क्यों भाजपा-कांग्रेस को राजस्थान में भारतीय ट्राइबल पार्टी को गंभीरता से लेना चाहिए

राजस्थान विधानसभा चुनाव में डूंगरपुर ज़िले की चार में से दो सीटों पर भारतीय ट्राइबल पार्टी ने जीत हासिल की, वहीं भाजपा और कांग्रेस को सिर्फ़ एक-एक सीट मिल सकी.

सिलिकोसिस से पीड़ित पोसराम. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

क्यों राजस्थान में सिलिकोसिस के मरीज़ राजनीतिक दलों की प्राथमिकता में नहीं हैं

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान के खदानों में काम करने वाले मज़दूर मुख्य रूप से सिलिकोसिस की चपेट में आते हैं, हर साल इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ रही है लेकिन इसके मरीज़ों को लेकर भाजपा और कांग्रेस चिंतित नहीं दिखतीं.

घुमंतू समुदाय की एक महिला. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

क्यों राजस्थान में घुमंतू समुदाय भाजपा और कांग्रेस की चुनावी चर्चा से बाहर है

ग्राउंड रिपोर्ट: राजस्थान की आबादी में क़रीब 55 लाख लोग घुमंतू समुदाय से आते हैं लेकिन भाजपा और कांग्रेस के पास इन्हें लेकर न कोई नीति दिखाई देती है और न ही नीयत.

(फोटो साभार: Flipkart Stories)

क्यों राजस्थान के पोकरण का चुनावी माहौल सांप्रदायिक होता जा रहा है

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा ने बाड़मेर ज़िले में पड़ने वाले नाथ संप्रदाय के तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी महाराज को पोकरण से टिकट दिया है तो कांग्रेस ने क्षेत्र के प्रसिद्ध सिंधी-मुस्लिम धर्मगुरु ग़ाज़ी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को चुनाव मैदान में उतारा है.