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उमर खालिद. (फोटो साभार: फेसबुक)

उमर ख़ालिद ‘आतंकवादी’ है कि नहीं?

जो लोग ये कहते हैं कि अगर निर्दोष होगा तो अपने आप बाहर आ जाएगा, उनको मैं कह दूं, क्यों न आपको साल भर के लिए जेल में बंद कर दिया जाए? क्यों न देश के हर नागरिक को 18 साल का होते ही साल भर के लिए जेल में बंद कर दिया जाए. हम सब निर्दोष हैं, बाहर आ ही जाएंगे

कृषि विधेयकों के विरोध में हुए भारत बंद के दौरान अंबाला के करीब हाइवे पर प्रदर्शन करते विभिन्न किसान संगठनों के लोग. (फोटो: पीटीआई)

मनुष्यता के लिए विरोध अनिवार्य है

किसान के प्रतिरोध में सिर्फ किसान रहें, मजदूर प्रतिरोध में सिर्फ मजदूर, दलितों के विरोध में सिर्फ दलित, यह भी अत्याचार को बनाए रखने का एक तरीका है. यह विरोध का संप्रदायवाद है. सत्ता इसलिए कहती है कि किसान का विरोध तब अशुद्ध है जब उसमें छात्र और व्यापारी शामिल हों.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का बकाया चुकाने के लिए 10 साल का समय दिया

वोडाफोन आइडिया, भारती एयरटेल और टाटा टेलीसर्विसेज जैसी कंपनियों को लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये के समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर का भुगतान दूरसंचार विभाग को करना है. सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को आगाह किया है कि एजीआर के बकाये की किस्त के भुगतान में चूक की स्थिति में उन पर जुर्माना और ब्याज लगेगा.

मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा. (फोटो साभार: एएनआई)

असम राइफल्स के अधिकारी भूल जाते हैं कि मिज़ोरम में आफस्पा लागू नहीं है: राज्य सरकार

मिज़ोरम के गृह विभाग के अतिरिक्त सचिव रामदीन लियानी ने बताया कि मुख्य सचिव ने 24 अगस्त को केंद्रीय गृह सचिव को दो पत्र लिखकर असम राइफल्स द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोहों का ‘बहिष्कार’ करने तथा कोरोना स्क्रीनिंग प्रोटोकॉलों के कथित उल्लंघन के बारे में जानकारी दी है.

Bengaluru: A view of the deserted Electronic City Flyover in Bengaluru on Sunday May 24, 2020.

लोगों और सामान के अंतरराज्यीय आवागमन पर राज्य पाबंदी न लगाएं: केंद्र

सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में केंद्रीय गृह सचिव ने कहा है कि ऐसी खबरें मिली हैं कि विभिन्न ज़िलों और राज्यों द्वारा स्थानीय स्तर पर आवाजाही पर पाबंदी लगाई जा रही है. ऐसी पाबंदियों से विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के अंतरराज्यीय आवागमन में दिक्कतें पैदा होती हैं और इससे आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ता है.

विनोद दुआ. (फोटो: द वायर)

विनोद दुआ ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, सरकार की सभी आलोचनाएं राजद्रोह नहीं हैं

हिमाचल प्रदेश के एक भाजपा नेता की शिकायत पर विनोद दुआ पर फ़र्ज़ी ख़बरे फैलाने और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप में राजद्रोह समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है. दुआ ने अदालत में कहा कि अगर वे प्रधानमंत्री की आलोचना करते हैं, तो यह सरकार की आलोचना के दायरे में नहीं आता.

(फोटो: द वायर)

सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह मामले में विनोद दुआ पर दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण की अवधि बढ़ाई

हिमाचल प्रदेश के एक भाजपा नेता ने विनोद दुआ पर एक शो के माध्यम से फ़र्ज़ी सूचनाएं फैलाने और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. दुआ के ख़िलाफ़ राजद्रोह, मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने जैसे आरोपों में केस दर्ज किया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

केंद्र सरकार की कोविड-19 नीति में आदिवासियों की स्थिति क्या है?

कोरोना वायरस महामारी के चलते केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई नीतियों का विश्लेषण करें, तो स्पष्ट रूप से दिखता है कि आदिवासियों और वन निवासियों के अधिकारों और उनकी ज़रूरतों की अनदेखी की गई है.

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विनोद दुआ राजद्रोह मामले में जांच रिपोर्ट नहीं सौंपने पर सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाई

एक भाजपा नेता द्वारा पत्रकार विनोद दुआ पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने एक वीडियो शो के माध्यम से ‘फ़र्ज़ी सूचनाएं’ फैलाई हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है. शिकायत पर ​हिमाचल प्रदेश पुलिस ने राजद्रोह का मामला दर्ज किया है.

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण. (फोटो: रॉयटर्स)

कभी नहीं कहा कि पतंजलि की कोरोनिल से कोरोना का इलाज हो सकता है: आचार्य बालकृष्ण

बाबा रामदेव ने बीते 23 जून को ‘कोरोनिल’ नाम की दवा लॉन्च करते हुए इसके कोविड-19 के इलाज में शत-प्रतिशत कारगर होने का दावा किया था. इसके बाद आयुष मंत्रालय ने दवा के विज्ञापन पर रोक लगाते हुए कंपनी से इसके क्लीनिकल ट्रायल और रिसर्च आदि का ब्योरा देने को कहा था.

हरिद्वार में कोरोनिल दवा लॉन्च करते योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण (फोटो: ट्विटर/पतंजलि आयुर्वेद)

पतंजलि कोरोना किट: चंडीगढ़ में रामदेव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज, जयपुर के निम्स अस्पताल को नोटिस

पतंजलि आयुर्वेद की कोरोना किट को लेकर चंडीगढ़ की एक अदालत में मिलावटी दावा बेचने और धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज करवाया गया है. वहीं राजस्थान सरकार ने इस दवा के ‘क्लीनिकल ट्रायल’ को लेकर निम्स अस्पताल से स्पष्टीकरण मांगा है.

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कोरोना वायरस की दवा बनाने का पतंजलि का दावा सवालों के घेरे में क्यों है?

वीडियो: बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद ने कोविड-19 के इलाज में शत- प्रतिशत कारगर होने का दावा करते हुए दवा लॉन्च की है. हालांकि आयुष मंत्रालय ने उनके दावों की जांच-पड़ताल होने तक इस दवा का प्रचार बंद करने और बेचने से रोकने का आदेश दिया है.

हरिद्वार में कोरोनिल दवा लॉन्च करते योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण (फोटो: ट्विटर/पतंजलि आयुर्वेद)

पतंजलि की ‘कोरोना किट’ वैज्ञानिक तौर से प्रमाणित नहीं, न ही उचित विभागों से अनुमति मिली

पतंजलि आयुर्वेद की कोरोना दवाई किट की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. कंपनी ने कोरोना के शत-प्रतिशत उपचार का दावा करने वाली इस दवा संबंधी कुछ दस्तावेज़ आयुष मंत्रालय को सौंपे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये साबित नहीं होता है कि इससे कोविड-19 ठीक हो जाएगा.

हरिद्वार में कोरोनिल दवा लॉन्च करते योग गुरु रामदेव और आचार्य बालकृष्ण (फोटो: ट्विटर/पतंजलि आयुर्वेद)

सरकार ने कोविड-19 की ‘दवा’ पर पतंजलि से मांगा ब्योरा, जांच पूरी होने तक प्रचार पर रोक

योग गुरु रामदेव ने मंगलवार को ‘कोरोनिल’ नाम की दवाई लॉन्च करते हुए इसके कोविड-19 के इलाज में शत-प्रतिशत कारगर होने का दावा किया था. इसके बाद आयुष मंत्रालय ने इसके विज्ञापन पर रोक लगाते हुए कंपनी से इसके क्लीनिकल ट्रायल और रिसर्च आदि का ब्योरा देने को कहा है.

19 जून को सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

सरकार कह रही है कि यह राजनीति का समय नहीं, लेकिन वह ख़ुद क्या कर रही है

मुख्य विपक्षी दल के सवाल करने को उसकी क्षुद्रता बताया जा रहा है. 20 सैनिकों के मारे जाने के बाद कहा गया कि बिहार रेजीमेंट के जवानों ने शहादत दी, यह बिहार के लोगों के लिए गर्व की बात है. अन्य राज्यों के जवान भी मारे गए, उनका नाम अलग से क्यों नहीं? सिर्फ बिहार का नाम क्यों? क्या यह क्षुद्रता नहीं?